कोरोना की तीसरी लहर ने दे दी दस्तक, अब ज़्यादा सावधानी की ज़रूरत

गिरीश मालवीय-

आपको अगर आज डेल्टा प्लस वेरियंट दिख रहा है इसका मतलब यह नही है कि वह दस पन्द्रह दिन पहले ही अस्तित्व में आया है…..सम्भव है कि उसे आए महीने भर से भी अधिक हो गया हो….. आप उसे आज खोज पाए हो…..


कल तक कहा जा रहा था कि डेल्टा प्लस वेरियंट से ग्रस्त एक मध्यप्रदेश के भोपाल में एक महिला मिली है अब बता रहे हैं कि शिवपुरी जैसे छोटे शहर में डेल्टा प्लस से 4 मौते हो चुकी है और चारो को वेक्सीन की दोनों डोज लग चुकी थी…..फिर भी नही बचे…..

किसी वायरस में इतनी तेजी से म्यूटेशन हो रहा हो तो कोई भी वेक्सीन सफल नही हो सकती ओर सब जानते है कि यह RNA वायरस है इसमे ऐसा होता ही है……


Vivek Kumar-

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को चेतावनी दी है कि कोरोना लॉकडाउन से बंद गतिविधियों को सावधानीपूर्वक ही बढ़ावा देना चाहिए. केंद्र की तरफ से बेहद महत्वपूर्ण कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर की पांच स्तरीय रणनीति को सुनिश्चित करने की अपील की गई है. साथ ही संक्रमण की रोकथाम के लिए टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट और वैक्सीनेशन को तवज्जो देने को कहा है.

केंद्र की तरफ से यह निर्देश एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया की उस चेतावनी के बाद जारी किया गया है जिसमें कोरोना की तीसरी लहर अगले 6 से 8 सप्ताह में दस्तक देने की बात कही गई है. गुलेरिया ने शनिवार को चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर अगले 6 से 8 हफ्ते में आ सकती है.

रणदीप गुलेरिया ने कहा कि ‘अगर कोरोना से जुड़े गाइडलाइंन को फॉलो नहीं किया गया तो तीसरी लहर 6-8 हफ्तों में आ सकती है. जरूरत है कि वैक्सीनेशन होने तक हम आक्रामक रूप से अपनी जंग जारी रखें.’

उन्होंने कहा कि अगर लोगों ने मास्क और सोशल डिस्टेन्सिंग जैसे जरूरी गाइडलाइन को फॉलो नहीं किया तो मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं. एम्स निदेशक ने कहा कि कोरोना के केस बढ़ने पर सर्विलांस और जिस क्षेत्र में केस बढ़ते हैं उसकी पहचान कर वहां लॉकडाउन लगाने की भी जरूरत पड़ सकती है.

इस चेतावनी के बीच केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने शनिवार को राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा. उन्होंने राज्यों में टेस्ट ट्रैक और ट्रीट की रणनीति को जारी रखने के लिए कहा है. उन्होंने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि टेस्टिंग रेट कम ना हो. इसके अलावा राज्यों से वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने को भी कहा है.

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए पत्र में गृह सचिव ने लिखा है कि मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि पांबदियों में छूट, जमीनी हकीकत के बारे में जानने के बाद लिया जाना चाहिए. केस कम होने के बाद गतिविधियों के लिए ढील देना जरूरी है लेकिन यह काम पूरी सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए. पाबंदियों में छूट के दौरान यह बेहद जरूरी है कि कोरोना संबंधी नियमों का पालन किया जाए. टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट और वैक्सीनेशन जरूरी है. कोरोना के नियमों के पालन की निगरानी की जानी चाहिए. मास्क, सैनिटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग, बंद जगहों पर उचित वेंटिलेशन होना चाहिए.

उन्होंने लिखा कि कुछ राज्यों में सख्ती में ढील देने के बाद फिर से भीड़ जुटने लगी है. इस बात का ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसी लापरवाही ना होने पाए. आर्थिक गतिविधियों को अनुमित देने के साथ ही कोरोना के नियमों का पालन लगातार जारी रहना चाहिए. कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट रणनीति जरूरी है. यह समस्या गंभीर है, स्थिति को ध्यान में रखते हुए टेस्टिंग कम नहीं होनी चाहिए. केंद्र की तरफ से जारी सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए.



सलीम अख़्तर सिद्दीक़ी-

केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों के परिजनों को 4 लाख का मुआवजा देने से इंकार कर दिया है। सरकार ने ये इंकार सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में किया है। सरकार का कहना है कि करोना की वजह से सरकार आर्थिक दबाव में है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार को बहुत पैसा खर्च करना पड़ रहा है, वहीं टैक्स वसूली भी बहुत कम हो गई है।

20 हजार करोड़ रुपये सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर खर्च के लिए सरकार पर पैसे हैं? कॉरपोरेटस के लाखों करोड़ माफ करने के लिए सरकार पर कोई आर्थिक दबाव नहीं पड़ता? सरकार ने पेट्रोल-डीजल से इतना पैसा कमा लिया है, जितना उसने अन्य टैक्सों से नहीं कमाया।

मतलब यह है कि पेट्रोल-डीजल ही सरकार के लिए कामधेनु गाय बने हुए हैं। वैसे कोरोनो के लिए 20 लाख करोड़ का पीएम केयर्स फंड किस काम आ रहा है? उस पर क्यों कुंडली मार कर बैठे हैं? क्यों उसे आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया है? क्यों उसका आडिट नहीं हो सकता? कुछ तो है जिसकी पर्देदारी है। परदा कभी तो उठेगा?

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं, क्लिक करें-

https://chat.whatsapp.com/CMIPU0AMloEDMzg3kaUkhs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *