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आज के अखबार (दो) : दिल्ली में बंगाल चुनाव और रैली की सरकारी खबरों को ही पहले पन्ने पर जगह मिली है

संजय कुमार सिंह

युद्ध के कारण देसी खबरों का हेडलाइन मैनेजमेंट हो रहा है और देसी खबरें पिट रही हैं। सोनम वांगचुक के मामले में भी यही हुआ है। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी मुख्य खबर के साथ ऐसी ही दूसरी खबर है। इसका शीर्षक है, ऐक्टिविस्ट्स ने (सरकार के इस कदम) की तारीफ की और कहा, केंद्र ने अपनी इज्जत बचा ली। कहने की जरूरत नहीं है कि केंद्र सरकार पर यह एक सख्त टिप्पणी है और इससे साबित होता है कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक को जबरन जेल में रखने के लिए एनएसए लगाया और उन्हें परेशान करने के लिए सरकारी वकील लगाकर कुतर्क करवाती रही। अन्य में हार के डर से, बदनामी से बचने के लिए एनएसए हटा दिया। यह शर्मनाक है कि एक लोकतांत्रिक देश में, देश भक्त होने का दावा और हिन्दू हित की बात करने वाली सरकार ने यह सब किया। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर कोई कड़ी टिप्पणी नहीं की या की तो अखबारों ने उसे प्रमुखता से नहीं छापा है। अमर उजाला ने सरकारी पक्ष को प्रमुखता से छापा है। हालांकि, एक उपशीर्षक से एनएसए लगाने और वापस लेने का कारण समझा जा सकता है। फिर भी सरकार का तर्क है कि शांति, स्थिरता व आपसी विश्वास के लिए फैसला लिया गया है।

देशबन्धु की आज की लीड का शीर्षक है, दो भारतीय जहाजों ने होर्मुज पार किया, गैस की किल्लत के बीच राहत की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि सरकार गैस की किल्लत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर कहा है कि कांग्रेस, निकट भविष्य में हार की सेंचुरी मारने वाली है। इसी हताशा में अब वो देश में पैनिक क्रिएट करने पर उतर आई है। इसलिए असम के मेरे भाई-बहनों और नौजवानों को कांग्रेस के फ्रस्ट्रेशन से बहुत सावधान रहना है। मुझे लगता है कि यह हार का डर है और कंप्रोमाइज्ड करार दिए जाने के बाद इजराइल जाना, इस बारे में कुछ बोल नहीं पाना और फिर ईरान के राष्ट्रपति से बात करने की मजबूरी तथा ईरान का साफ कह देना कि भारत जैसे देशों को राहत नहीं दी जा सकती है – ने प्रधानमंत्री को फ्रस्ट्रेट कर दिया है और वे भी पैनिक मोड में आ गए हैं। कारण जो हो, खबरें ऐसे नहीं लिखी या देखी जाती हैं। और बात इतनी ही नहीं है। आज द टेलीग्राफ की लीड बंगाल में मंत्री के घर पर पथराव और उनके घायल होने की खबर है। खबर के अनुसार, कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली थी। इस मौके पर कलकत्ता में जो सब हुआ उसका शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, सड़क पर शक्ति प्रदर्शन, मोदी ने टीएमसी के लिए उल्टी गिनती शुरू की।   

द टेलीग्राफ की खबर इस प्रकार है – शनिवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक सभा को संबोधित करने के लिए पहुंचने से कुछ घंटे पहले भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं में झड़प हुई। रैली में जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं और तृणमूल कार्यकर्ताओं की इस भिड़ंत ने कोलकाता के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक को युद्ध का मैदान बना दिया। हिंसा प्रभावित सेंट्रल एवेन्यू-विवेकानंद रोड चौराहे से कुछ ही गज की दूर स्थित बंगाल की मंत्री शशि पांजा के घर पर, ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से हमला किया गया। इस झड़प के लिए दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। भाजपा समर्थकों को दोषी ठहराते हुए, वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि उनकी पीठ और दाहिने कंधे में चोट लगी है तथा पार्टी के 50 अन्य कार्यकर्ता घायल हुए हैं। उनके घर की खिड़कियों के शीशे टूट गए थे; भूतल पर लगे मुख्य दरवाज़े पर भी ज़ोरदार हमलों के निशान साफ़ दिखाई दे रहे थे। पुलिस पर हमेशा की तरह इस बार भी देर से कार्रवाई करने का आरोप लगा। पुलिस का एक वाहन पूरी तरह से तोड़ दिया गया, और एक समय तो बोऊबाज़ार पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी सड़क के किनारे ज़मीन पर पड़े हुए दिखाई दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और लोगों पर ज़ुल्म करने वालों को सज़ा ज़रूर मिलेगी। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, “बंगाल में ‘महा जंगल राज’ के खात्मे की उलटी गिनती पहले ही शुरू हो चुकी है।” उन्होंने आगे कहा, “वह दिन दूर नहीं जब बंगाल में भाजपा के नेतृत्व में एक नई सरकार बनेगी। टीएमसी के गुंडे, जो लोगों पर ज़ुल्म करते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा; उन्हें उनके अपराधों के लिए सज़ा ज़रूर मिलेगी।” भाजपा  और पुलिस, दोनों में से कोई भी रैली में मौजूद लोगों की संख्या के बारे में कोई पक्का आँकड़ा देने को तैयार नहीं था। हालाँकि, मोदी ने कहा कि रैली में उमड़ी भीड़ ने बंगाल के मन की बात साफ़ कर दी है: “अब तृणमूल कांग्रेस को कोई नहीं बचा सकता। बंगाल में बदलाव तय हो चुका है और यह बात अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है।”

द टेलीग्राफ में प्रधानमंत्री की रैली की खबर अगर इस तरह थी तो दि एशियन एज की लीड और देशबन्धु की पहले पन्ने की खबर का शीर्षक मोदी का आरोप ही है। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा – घुसपैठियों, वोटबैंक को सुरक्षा देने के लिए टीएमसी एसआईआर  का विरोध कर रही है। तीन खास बातें हैं, 1) कोलकाता में 18.6 हजार करोड़ की केंद्रीय संरचना परियोजनाएं 2) राष्ट्रपति के अपमान के लिए दीदी की आलोचना की और 3) ममता राज का खत्मा नजदीक है। दि एशियन एज में गुवाहाटी के उनके भाषण को भी चार कॉलम में छापा गया है। एलपीजी की किल्लत को महत्व नहीं देने के सरकार के प्रयासों का नतीजा यह हुआ है कि सरकारी मूल खबर तो छपी नहीं बचाव और प्रचार की खबरें प्रमुखता से छप रही हैं। ऐसा ही लीड नवोदय टाइम्स का है। इसके अनुसार, वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति शुरू। यह दिलचस्प है कि सरकार जब सोनम वांगचुक को जेल में रखना चाहती थी, एनएसए लगाकर उसे साबित करने की कोशिश करती रही तब गाजियाबाद में पाकिस्तान के लिए छह लोग जासूसी करते रहे हैं। नवोदय टाइम्स में छपी खबर के अनुसार, ये लोग रेलवे स्टेशन व सुरक्षा बलों के ठिकानों की फोटो व वीडियो बनाकर भेज रहे थे। 18 मोबाइल में मिली विदेशी नंबरों की चैट व देश के कई महत्वपूर्ण ठिकानों की लोकेशन। जाहिर है, मामला साधारण नहीं है। लेकिन यह सरकार जब एक काम करती रहती है तो कोई न कोई दूसरा रह जाता है। यह खबर इसी का उदाहरण है। (समाप्त)

इससे पहले की किस्त – सोनम वांगचुक को जेल में रखकर एनएसए हटा लेने की सरकारी कार्रवाई ‘खबर’ नहीं है। लिंक यह रहा –  https://www.bhadas4media.com/sonam-wangchuk-ko-jail-mein-rakhkar/ 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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