नई दिल्ली, 28 जुलाई। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज एसएलपी(सी) संख्या 019705/2025, देशराज मोहन बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य के मामले में सुनवाई की। लेबर अथॉरिटी द्वारा वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा (1) के तहत एप्लिकेशन को लंबे समय तक लटकाए रखने के इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। सोमवार को माननीय जस्टीस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह एवं जस्टीस एसवीएन भाटी की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की।
मजीठिया क्रांतिकारियों से जुड़े इस मामलों में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकार्ड (एओआर) श्री राहुल श्याम भंडारी जी ने अमूल्य सहयोग दिया। श्री राहुल भंडारी की सुस्पष्ट एवं सधि हुई ड्राफ्टिंग और मजीठिया वेजबोर्ड से जुड़े मामलों पर अच्छी पकड़ी की वजह से ही एचटी के मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में मजीठिया की रिकवरी के रेफरेंस के खिलाफ ना केवल स्टे आर्डर को खारीज किया था, बल्कि रिट याचिकाएं भी रद्द करवाने में कामयाबी हासिल की थी।
ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17(2) के तहत लेबर कोर्ट को रेफर किए जाने वाले मामलों में लेबर कोर्ट को 6 माह में निर्णय सुनाने का आदेश दिया था। हालांकि इसे नहीं माना जा रहा है। इस बारे में भी इस केस में चर्चा की गई है। देशराज जी का मामला लेबर अथॉरिटी में फंसा होने के चलते मुख्य मुद्दा लेबर अथॉरिटी को भी टाइमबाउंड करवाना है और लेबर कोर्ट को भेजे जाने वाले रेफरेंस आर्डर में ही माननीय सुप्रीम कोर्ट के 6 माह में फैसला करने के टाइमबाउंड आर्डर को शामिल करवाना भी शामिल है। देश भर में किए कए और किए जा रहे मजीठिया वेजबोर्ड की रिकवरी के रेफरेंस आर्डर में लेबर अथॉरिटी सुप्रीम कोर्ट के 6 माह के टाइमबाउंड आर्डर का हवाला नहीं दे रही है।
मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ रहे अखबार कर्मचारियों की मानें तो लेबर कोर्ट स्टेटमेंट ऑफ क्लेम में टाइमबाउंड आर्डर लगाए जाने के बावजूद इसे अनदेखा करते आ रहे हैं। इसके चलते रिकवरी के मामले सालों से लटके हुए हैं। इसके लिए अलग से याचिका दायर करने की जरूरत बताई जा रही है, मगर मौजूदा केस में इस इश्यू को भी उठाने का प्रयास किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार रिकवरी के मामले को लटकाए जाने से जुड़े के इस केस में बाकी इश्यू सुनवाई के दौरान उठाए जा सकते हैं। फिलहाल पहली सुनवाई में नोटिस किया जाना बड़ी बात है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के टाइमबाउंड आर्डर पर हाईकोर्ट द्वारा पीड़ित अखबार कर्मचारी की याचिका स्वीकार किए जाने या संज्ञान लिए जाने को लेकर भी निर्देश जारी करने की मांग की गई है। ज्ञात रहे कि याचिकाकर्ता ने पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका दायार की थी, मगर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका को वापस लिए जाने की अनुमति देते हुए इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाए जाने और ऐसे मामलों में हाईकोर्ट द्वारा दखल दिए जाने को लेकर दिशानिर्देश दिए जाने संबंधि आदेश पारित किया था।
फिलहाल हिमाचल प्रदेश की लेबर अथॉरिटी से जवाब तलबी की जाएगी। इस केस (DIARY NO. – 36049/2025, DESHRAJ MOHAN VS. STATE OF HIMACHAL PRADESH) की अगली सुनवाई 09 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

