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उत्तर प्रदेश

तो क्या एसओ ने डीएम बनकर लिखा पत्रकार पर फर्जी मुकदमा!

  • प्रेस काउंसिल का नोटिस मिला तो डीएम बोले- हमने नहीं दिया लिखित या मौखिक कोई आदेश
  • जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण से किनारा कर लिया, पशोपेश में थाना सुनगढ़ी पुलिस…

उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में रंगदार की तहरीर पर अगर जिलाधिकारी ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश नहीं दिया तो क्या उनके नाम संबोधित तहरीर पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने वाले सुनगढ़ी थाने के प्रभारी निरीक्षक खुद जिलाधिकारी बन गए! प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को उत्पीड़ित पत्रकार सुधीर दीक्षित की शिकायत पर जारी नोटिस के जवाब में जो कुछ जिलाधिकारी ने कहा, उसका तो यही आशय प्रतीत होता है या फिर मामला पीसीआई तक पहुंचने की वजह से प्रतिपक्षी में अपनी गर्दन बचाने की जुगत में लगे हैं।

कथित एफआईआर दर्ज कराने के मामले में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया का नोटिस मिलते ही जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण से किनारा कर लिया। उनके मुताबिक ना तो उन्होंने लिखित और ना ही मौखिक आदेश एफआईआर दर्ज करने का दिया है। उन्होंने गेंद पुलिस के पाले में सरका दी है। जिलाधिकारी का जवाब देख थाना पुलिस पशोपेश में है। थाना पुलिस ना तो खुलकर डीएम के जवाब को झुठलाने की हिम्मत जुटा पा रही है और ना ही यह स्वीकार करने को तैयार है कि जिलाधिकारी के नाम संबोधित प्रार्थना पत्र पर उसने स्वयं का निर्णय लेकर मुकदमा कायम किया था।

11 सितंबर को पत्रकार सुधीर दीक्षित ने उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक, पीलीभीत के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, पीलीभीत के निवर्तमान पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सोनकर (वर्तमान में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के कार्यालय से संबद्ध), सुनगढ़ी थाने के कोतवाल नरेश पाल सिंह, विवेचक/उप निरीक्षक दीपक कुमार सहित कुल 7 लोगों को पक्षकार बनाते हुए उनके विरुद्ध एक कर रंगदार से तथ्य पर प्रार्थना पत्र लेकर झूठा मुकदमा दर्ज कराकर उत्पीड़न करने के मामले की शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को की थी, जिसमें कहा गया था कि जनपद में भू माफियाओं व रसूखदारों के विरुद्ध खबरों के प्रकाशन से जिलाधिकारी नाराज हो गए और उन्होंने दुर्भावनावश एक ऐसे व्यक्ति की ओर से प्रार्थना पत्र लेकर थाना सुनगढ़ी को आदेश देकर मुकदमा कायम करा दिया, जिस व्यक्ति पर ठीक एक दिन पहले रंगदारी का उसी थाने में मुकदमा दर्ज था। जबकि जिस अवधि में घटना कारित होना दर्शाया गया, उस समय पत्रकार सुधीर दीक्षित एक्सीडेंट के बाद बिस्तर पर पड़े हुए थे। इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने सभी सातों पक्षकारों को 18 नवंबर को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा था।

प्रेस काउंसिल आफ इंडिया का नोटिस मिलते ही हड़कंप मच गया। जिलाधिकारी ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को भेजे गए नोटिस में साफ तौर पर इस बात से इनकार कर दिया कि उनके द्वारा पत्रकार सुधीर दीक्षित के विरुद्ध पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने के प्रार्थना पत्र पर किसी भी तरह का लिखित या मौखिक कोई आदेश दिया गया। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है और ना ही इससे प्रेस की स्वतंत्रता पर कुठाराघात हुआ है।

प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को भेजे गए डीएम के जवाब को जब सुनगढ़ी थाना पुलिस के स्टाफ ने देखा तो सभी पसोपेश में पड़ गए क्योंकि डीएम का जवाब हैरानी भरा था। थाना पुलिस ना तो खुलकर डीएम के जवाब को झुठलाने की हिम्मत जुटा पा रही है और ना ही यह स्वीकार करने को तैयार है कि जिलाधिकारी के नाम संबोधित प्रार्थना पत्र पर उसने स्वयं का निर्णय लेकर मुकदमा कायम किया था। डीएम के जवाब से पुलिस विभाग के इस शिकायत के पक्षकारों के चेहरे की रंगत उड़ गई, वह आपस में कानाफूसी करने लगे। थाना पुलिस इस जवाब से खुद को घिरा हुआ मान कर रही है।

थाना पुलिस ने खुलकर कुछ भी कहने के बजाय बस इतना ही कह कर खामोशी साध ली कि जिलाधिकारी के नाम संबोधित प्रार्थना पत्र भला थाने में कोई क्यों देगा ?

डीएम ने नहीं माना प्रेस काउंसिल का निर्देश

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने जिलाधिकारी को 6 नवंबर को भेजे नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि दो सप्ताह के अंदर जवाब दो प्रस्तुत करें। साथ ही जवाब की एक प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराएं। डीएम के जवाब की प्रति ना मिलने पर 28 दिसंबर को पत्रकार सुधीर दीक्षित ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को अवगत करा दिया , तब भी डीएम नेेे शिकायतकर्ता के जवाब की कॉपी नहीं भेजी बल्कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने कार्यालय में प्राप्त हुई जवाब की प्रति शिकायतकर्ता को उसके पते पर भेज कर उस पर प्रतिउत्तर मांगा। डीएम द्वारा प्रेस काउंसिल आफ इंडिया केेेे निर्देश का अनुपालन ना करने को भी पीसीआई के सदस्यों ने गंभीरता से लिया है।

डीएम के जवाब पर भेजा गया जवाब

पूरे प्रकरण से किनारा कर जिलाधिकारी ने जो जवाब प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को भेजा, उसको पूरी तरह गुमराह करने वाला बताते हुए पत्रकार सुधीर दीक्षित ने प्रत्युत्तर प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को साक्ष्यों के साथ भेज दिया है, जिससे पूरी तरह यह प्रमाणित होगा कि जिलाधिकारी ने ही मुकदमा दर्ज करने के लिए थाना पुलिस से कहा था।

डीएम को व्यक्तिगत रूप से बुलाने का अनुरोध

शिकायतकर्ता पत्रकार सुधीर दीक्षित ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को भेजे गए प्रत्युत्तर में अध्यक्ष जी से अनुरोध किया है कि जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव व सुनगढ़ी थाने के उस समय तैनात रहे प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के दौरान तलब किया जाए तभी यह साफ होगा कि कथित मुकदमा किसके कहन पर लिखा गया। अगर जिलाधिकारी ने आदेश नहीं दिया तो फिर प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार कब से जिलाधिकारी हो गए जो उन्होंनेे जिलाधिकारी को संबोधित प्रार्थना पत्र पर मुकदमा लिखा।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजा गया जिलाधिकारी पीलीभीत वैभव श्रीवास्तव का जवाब देखें और पढ़ें-

बरेली से वरिष्ठ पत्रकार निर्मलकांत शुक्ला की रिपोर्ट.

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