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उत्तर प्रदेश

एनेस्थीसिया की मात्रा और ऑक्सीजन की अस्थिरता ने ली अनाया की जान, डॉक्टरों पर FIR का आदेश

भास्कर गुहा नियोगी-

वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने शहर के निजी एएसजी मल्टी स्पेशलिटी आई हॉस्पिटल में आंख की रेटिना के ऑपरेशन के दौरान सात वर्षीय अनाया रिज़वान की मौत को घोर चिकित्सकीय लापरवाही माना है। अदालत ने भेलूपुर थाना प्रभारी को चिकित्सकों के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।

14 अक्टूबर को आंख की सर्जरी के लिए महमूरगंज स्थित एएसजी अस्पताल में भर्ती हंसती-खेलती अनाया ऑपरेशन थिएटर से लाश बनकर बाहर आई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मौत का कारण स्पष्ट न होने के बावजूद ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया देने, ऑक्सीजन की आपूर्ति, मॉनिटरिंग और आपातकालीन प्रबंधन में गंभीर लापरवाही सामने आती है।

अदालत ने कहा कि एनेस्थीसिया की मात्रा और ऑक्सीजन की आपूर्ति में अस्थिरता के कारण अनाया की सांस और हृदय क्रिया रुक गई, जिसके बाद भी समय रहते पुनर्जीवन (Resuscitation) का प्रयास नहीं किया गया।

अदालत ने अस्पताल प्रमुख डॉ. प्रत्यूष रंजन के बयान को भी विरोधाभासी बताया। एक ओर वह ऑपरेशन थिएटर में CCTV न होने की बात कहते हैं, वहीं माइक्रोस्कोप के माध्यम से ऑपरेशन रिकॉर्डिंग होने की बात स्वीकार करते हैं। इतना ही नहीं, रिकॉर्डिंग मांगे जाने पर वे “क्लाउड सुरक्षा” का हवाला देकर फुटेज देने से इंकार कर देते हैं।

वादीनी द्वारा लगातार पुलिस और प्रशासन को प्रार्थनापत्र देने के बावजूद FIR दर्ज न करने और अस्पताल द्वारा नोटिस व मांगे गए साक्ष्यों पर मौन साधने को अदालत ने कानूनी प्रक्रिया में बाधा बताया है।

“घंटों मेरी बेटी को यूँ ही छोड़ दिया गया” — मां आफरीन

सोमवार को कचहरी में आयोजित प्रेस वार्ता में अनाया की मां आफरीन बानों ने कहा कि घटना के बाद अस्पताल का रवैया बेहद अमानवीय रहा। उन्होंने बताया—

  • “ऑपरेशन के दौरान जब अनाया की हालत बिगड़ती गई, डॉक्टर झूठ बोलते रहे कि सब ठीक है।”
  • “घंटों मेरी बेटी OT में पड़ी रही, तत्काल इलाज तक नहीं किया गया।”
  • “मेरी बच्ची को एम्बुलेंस से ले जाते समय मुझे साथ बैठने तक नहीं दिया।”
  • “मौत के बाद भी CCTV फुटेज व अन्य रिकॉर्ड मांगे तो अस्पताल ने देने से साफ इंकार कर दिया।”

आफरीन ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद अब उन्हें इंसाफ की उम्मीद जगी है—“मैं चाहती हूं कि दोषियों को सजा मिले ताकि कोई दूसरी अनाया इनकी लापरवाही की शिकार न बने।”

“मुनाफाखोरी ने मानवीयता निगल ली है” — अधिवक्ता

वादी पक्ष के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि चिकित्सकीय पेशा संवेदनशील है, लेकिन अनाया प्रकरण बताता है कि कुछ चिकित्सक अपनी मानवीयता तक भूल रहे हैं। उन्होंने कहा—“मरीजों की जान की कीमत पर चल रही मुनाफाखोरी रोकने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है।”

लूट का माध्यम बन चुके हैं निजी अस्पताल

बनारस सहित पूरे प्रदेश में कई निजी अस्पताल लूट के केंद्र बन गए हैं। यहाँ मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन कई बार जान और माल दोनों खोकर लौटते हैं। मरीजों और उनके परिजनों की बेबसी, आर्थिक मजबूरी और सूचना के अभाव का फायदा उठाकर ये संस्थान फल-फूल रहे हैं।

मरीजों के साथ हुई लापरवाही और अत्याचार की ऐसी सैकड़ों घटनाएं हैं, जो सामने नहीं आ पातीं। इन पर रोक लगाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की है, वे अक्सर चुप्पी साधे रहते हैं।

कोर्ट का आदेश…

मूल खबर…

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