Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

केंद्रीय गृह मंत्रालय में शिकायत के बाद सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘मास्टर माईंड जिंदा-सूखा’ का रद्द किया प्रमाण पत्र

सर्टिफिकेट जारी करने वाले सेंसर बोर्ड सदस्यों-अधिकारियों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई

मुंबई : जनरल अरुण कुमार वैद्य के हत्यारों सुखदेव सिंह सूखा और हरजिंदर सिंह जिंदा को महिमामंडित करने वाली फिल्म ‘मास्टर माईंड जिंदा-सूखा’ के प्रदर्शन के लिए जारी सेंसर सर्टिफिकेट को फिल्म सेंसर बोर्ड ने रद्द कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद  सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी सहित बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर से फिल्म को देखा और बीते जुलाई में जारी सेंसर सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया। सूत्रों के अनुसार सेंसर बोर्ड अध्यक्ष निहलानी ने इस तरह की फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने पर नाराजगी जताई है।

सर्टिफिकेट जारी करने वाले सेंसर बोर्ड सदस्यों-अधिकारियों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई

मुंबई : जनरल अरुण कुमार वैद्य के हत्यारों सुखदेव सिंह सूखा और हरजिंदर सिंह जिंदा को महिमामंडित करने वाली फिल्म ‘मास्टर माईंड जिंदा-सूखा’ के प्रदर्शन के लिए जारी सेंसर सर्टिफिकेट को फिल्म सेंसर बोर्ड ने रद्द कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद  सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी सहित बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर से फिल्म को देखा और बीते जुलाई में जारी सेंसर सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया। सूत्रों के अनुसार सेंसर बोर्ड अध्यक्ष निहलानी ने इस तरह की फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने पर नाराजगी जताई है।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में 1984 में हुए आपरेशन ब्लू स्टार के कमांडिग आफिसर रहे वैद्य की 10 अगस्त 1986 को पुणे में हत्या कर दी गई थी। बाद में वैद्य की हत्या के मामले में जिंदा व सूखा को फांसी की सजा हुई थी। इन दोनों को केंद्र विंदु में रख कर बनाई गई पंजाबी फिल्म मास्टर माईंड जिंदा-सूखा को इसी साल सेंसर बोर्ड की रिवाईजिंग कमेटी ने यूए सर्टिफिकेट जारी कर दिया था। फिल्म 7 अगस्त को रिलिज होने वाली थी। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय के खुफिया विभाग ने इस फिल्म को देश के खिलाफ बताते हुए गृह मत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की।

गृह मंत्रालय ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय को कहा कि इस फिल्म को जारी सेंसर सर्टिफिकेट पर फिर से विचार किया जाए। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने सिनेमेट्रोग्राफी एक्ट की धारा 32 के तहत सेंसर बोर्ड को निर्देश दिया कि फिल्म को फिर से देखा जाए। बीते मंगलवार को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी व तत्कालिन मुख्यकार्यकारी अधिकारी मनीष देसाई सहित 10 सदस्यों वाली कमेटी ने इस फिल्म को फिर से देखा। सूत्रों के अनुसार इस फिल्म में भारतीय सेना की खराब छवि पेश की गई है। फिल्म के कई संवाद भडकाऊ पाए गए।

फिल्म में जनरल वैद्य के हत्यारों जिंदा व सूखा को नायक के रुप में पेश किया गया है। साथ ही सेंसर बोर्ड की तरफ से फिल्म के शीर्षक पर भी आपत्ति जताई गई है। हालांकि इसके पहले जब इस फिल्म के यूए सर्टिफिकेट जारी कर इसके प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी। उस वक्त इस सारी बातों को नजरअंदाज किया गया था। सूत्रों के अनुसार सेंसर बोर्ड अध्यक्ष निहलानी इस बात पर आश्चर्य जताया कि इस तरह की फिल्म को कैसे सेंसर सर्टिफिकेट जारी किया गयास सूत्रों के अनुसार इस मामले में फिल्म को पहले सर्टिफिकेट जारी करने की सिफारिश करने वाले अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

सेवानिवृत्त होने के बाद हुई थी वैद्य की हत्या

तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर जनरस अरुण कुमार वैद्य ने स्वर्ण मंदिर को आतंकियों से खाली कराने के लिए आपरेशन ब्लू स्टार चलाया था। 31 जुलाई 1986 को सेना से रिटायर होने के बाद जनहल वैद्य पुणे में रहने लगे थे। यहीं पर उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। वैद्य की हत्या के बाद खालिस्तान कमांडो फोर्स ने प्रेस को बयान जारी कर उनकी हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि आपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए जनरल वैद्य की हत्या की गई। वैद्य की हत्या के मामले सूखदेव सिंह सूखा और हरजिंदर सिंह जिंदा को 9 अक्टूबर 1992 को फांसी दे दी गई थी।

मुंबई से विजय सिंह कौशिक की रिपोर्ट.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन