झारखंड के एडीजी अनुराग गुप्ता और सीएम के मीडिया एडवाइजर अजय कुमार के खिलाफ FIR दर्ज

विशद कुमार

रांची : आखिरकार 10 माह के बाद 30 मार्च को वर्ष 2016 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान वोट खरीदने के मामले को लेकर रांची पुलिस ने एडीजी स्पेशल ब्रांच अनुराग गुप्ता और मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। दोनों को भादवि की धारा 171(बी) और 171 (सी) के तहत आरोपी बनाया गया है।
बताते चले कि अनुराग गुप्ता एवं अजय कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश चुनाव आयोग ने पिछले साल जून 2017 में ही दिया था। मगर सरकार प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर टाल-मटोल करती रही थी। पिछले नौ मार्च को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सरकार को दोबारा पत्र लिखा, जिसमें जल्द से जल्द प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। अत: अपनी टाल-मटोल की नीति नाकामयाब होता देख आखिरकार मुख्यमंत्री ने 28 मार्च को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया । जिसके बाद सरकार के अवर सचिव अविनाश चंद्र ठाकुर ने जगन्नाथपुर थाना में इन दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाया।

सीएम रघुवर दास, एडीजी अनुराग गुप्ता और मीडिया एडवाइजर अजय कुमार

बता दें कि प्रेस सलाहकार अजय कुमार पूर्व में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार थे मगर जब चुनाव आयोग द्वारा अजय कुमार पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश आया तब सरकार ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार का पद समाप्त कर दिया और मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार योगेश किशलय को हटा कर उनके स्थान पर अजय कुमार को प्रेस सलाहकार बनाया गया।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों राज्य सरकार ने जून 2017 के आदेश के आलोक में चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था। जिसमें जून 2017 के आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया था। मगर सरकार के आग्रह को खारिज करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सरकार को दोबारा पत्र लिखा, जिसमें जल्द से जल्द प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया।

रघुवर दास द्वारा कार्रवाई से कतराने के मायने

उल्लेखनीय है कि 2016 में हुए राज्य सभा चुनाव को लेकर एडीजी स्पेशल ब्रांच अनुराग गुप्ता और मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अजय कुमार पर आरोप लगा था कि उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के लिए कांग्रेस के विधायक निर्मला देवी को पैसे का लालच दिया था और साथ ही धमकी भी दी थी।

राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड विकास मोर्चा (जनतांत्रिक) के केन्द्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक कांफ्रेंस करके आॉडियो व वीडियो सीडी जारी किया था। वीडियो सीडी, जो अब यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध है, उसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास भी दिखते हैं। वह विधायक निर्मला देवी के पति योगेंद्र साव से बात कर रहे हैं। अत: मामले में कार्रवाई होने पर आगे चल कर मुख्यमंत्री रघुवर दास भी फंस सकते हैं। यही वजह थी कि रघुवर दास मामले पर कार्रवाई से कतरा रहे थे।

बता दें कि झारखंड विकास मोरचा की शिकायत पर चुनाव आयोग की टीम ने मामले की जांच की थी। जांच में आरोप सही पाये जाने के बाद आयोग ने जून 2017 में अनुराग गुप्ता और अजय कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

जनवरी में शुरू हुए झारखंड बजट सत्र के चौथे दिन सरकार की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा मामले पर हंगामा होने के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सदन में कहा कि मामले की जांच स्पेशल ब्रांच को दी गयी है। विभाग अपना काम कर रहा है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल इंडसइंड बैंक के अधिकारी अद्वैत हेबर ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि मुख्य सचिव राजबाला वर्मा पैसा रिलीज करने के एवज में अपने बेटे की कंपनी में निवेश करने को कह रही हैं। मामले पर 31 अगस्त को सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक पत्र लिखा, जिसमें पूरे प्रकरण की जांच करने की मांग की गयी थी।

पत्र के आलोक में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता को जांच के लिए लिखा, लेकिन विभाग की तरफ से जांचकर्ता तक नियुक्त नहीं किया गया ।

स्पेशल ब्रांच नहीं करता ऐसे मामलों की जांच

जानकार बताते हैं कि किसी भी राज्य में स्पेशल ब्रांच का काम किसी भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच करना नहीं होता है। स्पेशल ब्रांच का काम शासन के खिलाफ चल रही गतिविधियों की जानकारी सरकार को देना होता है। राजनीति से जुड़ी सूचनाओं को इकट्ठा करना भी स्पेशल ब्रांच का ही काम होता है। संयुक्त बिहार के वक्त इस विभाग को नक्सल गतिविधी से जुड़े मामलों पर काम करने का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन इस विभाग से कभी भी क्राइम या भ्रष्टाचार से जुड़े मामले पर काम करने को नहीं कहा गया, ना ही विभाग ने अपनी तरफ से कभी ऐसा काम किया। ऐसे कामों के लिए राज्य में विजिलेंस और सीआईडी पहले से ही मौजूद हैं।

दोनों अधिकारियों की फाइल एक दूसरे के पास

इस मामले का सबसे मजेदार पहलू यह है कि राज्यसभा चुनाव के वक्त हॉर्स ट्रेडिंग के मामले में चुनाव आयोग की तरफ से सरकार को एक चिट्ठी लिखी गयी थी। चिट्ठी में स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता पर एफआईआर करने की बात लिखी हुई थी। ये फाइल राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के पास थी। वहीं मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्विट मामले में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की जांच का जिम्मा स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता को दे दिया था। ऐसे में दोनों पदाधिकारियों के टेबल पर एक-दूसरे के मामले की जांच की फाइल पड़ी हुई थी। ना ही अनुराग गुप्ता पर एफआईआर दर्ज हुआ और ना ही मुख्य सचिव मामले में जांच के लिए कोई जांचकर्ता ही नियुक्त किया गया है।

उस वक्त झारखंड विकास मोर्चा (जनतांत्रिक) के विधायक प्रदीप यादव ने सदन में साफ कहा था कि ‘सीएस के पास एडीजी की फाइल पड़ी हुई है और एडीजी के पास सीएस की फाइल। दोनों आरोपी अधिकारियों के पास एक दूसरे के आरोप से संबंधित फाइल पड़ी हुई है। ऐसे में कैसे दोनों में से कोई अधिकारी एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई करेगा। सीएम ने जान-बूझ कर सीएस मामले की जांच का जिम्मा एडीजी अनुराग गुप्ता को दिया। ताकि दोनों एक-दूसरे से कॉप्रॉमाइज कर सकें।’

आखिरकार 10 माह के बाद 30 मार्च 2018 को 2016 में हुए राज्यसभा चुनाव के वक्त हॉर्स ट्रेडिंग के मामले को लेकर रांची पुलिस ने एडीजी स्पेशल ब्रांच अनुराग गुप्ता और मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। दोनों को भादवि की धारा 171(बी) और 171 (सी) के तहत आरोपी बनाया गया है। जबकि पिछले महिने सरकार के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को उनकी सेवा निवृति के साथ ही उनपर लगे तमाम आरोपों से मुक्त करते हुए क्लीनचिट दे दिया।

अब देखना यह है कि अनुराग गुप्ता और अजय कुमार के खिलाफ हुई प्राथमिकी के बाद भी उन पर कारवाई होती है या नहीं ।

रांची से विशद कुमार कुमार की रिपोर्ट. संपर्क : vishadkumar217@gmail.com

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