गोरखपुर के बेबाक और निर्भीक पत्रकार सत्येंद्र कुमार के कथित उत्पीड़न से जुड़े मामले ने अब जाकर एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। इस प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जाँच की माँग को लेकर भेजे गए पत्र को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा गम्भीरता से लिये जाने की सूचना सामने आई है। इस आशय का पत्र वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गोरखपुर के पास भी पहुँच चुका है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
पत्रकार सत्येंद्र कुमार द्वारा प्रेषित विस्तृत पत्र में वर्ष 2022 से लेकर अब तक की घटनाओं का क्रमबद्ध और तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है। पत्र में न केवल घटनाओं की श्रृंखला को स्पष्ट किया गया है, बल्कि प्रत्येक आरोप के समर्थन में ठोस साक्ष्य होने का दावा भी किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह उभरकर सामने आ रहा है कि, यह पूरा प्रकरण कथित रूप से कुछ भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों के बीच मिलीभगत का परिणाम है।
हाल ही में ‘भड़ास’ पर प्रसारित एक ऑडियो में दैनिक जागरण गोरखपुर से जुड़े पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी की कथित बातचीत ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है। इस ऑडियो में पत्रकार दुर्गेश यह कहते हुए सुने गए यह कि पत्रकार सत्येंद्र कुमार के विरुद्ध गैंगेस्टर एक्ट लगाए जाने में कुछ पत्रकारों की भूमिका रही है। यदि यह तथ्य जाँच में पुष्ट होते हैं, तो यह न केवल पत्रकारिता की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा, बल्कि संस्थागत भ्रष्टाचार की गहराई को भी उजागर करेगा।
लगभग साढ़े तीन वर्षों से चल रहे इस पूरे प्रकरण में अब तक शामिल हमले, आपराधिक साजिशें और फर्जी मुकदमे गंभीर जाँच की मांग कर रहे हैं । सत्येंद्र कुमार द्वारा सीबीआई जांच की माँग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में यह प्रकरण आने के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि अब इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
इस घटनाक्रम ने उन लोगों के बीच बेचैनी पैदा कर दी है, जो कथित रूप से पत्रकारिता के आवरण में रहते हुए भ्रष्ट तंत्र के साथ अनुचित गठजोड़ में संलिप्त रहे हैं। अब यह मामला केवल एक व्यक्ति के उत्पीड़न तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, पारदर्शिता और पत्रकारिता की विश्वसनीयता से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है।
इस प्रकरण में अब गोरखपुर पुलिस का जवाब चाहे जो भी हो लेकिन इतना तय हो चुका है कि अब इस सनसनीखेज प्रकरण को महज किसी संस्थागत रिपोर्ट के बल पर दबा पाना संभव नहीं होगा। वर्तमान परिदृश्य बता रहे हैं कि पत्रकार सत्येंद्र ने इस लड़ाई को देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था तक पहुँचाकर इसे एक निर्णायक स्तर पर ला खड़ा किया है, जहाँ से अब पीछे लौटने की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई देती।
कोर्ट से संबंधित पत्रावली-

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