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मजीठिया वेतनमान मांगने पर हिसार भास्कर ने दो को सस्पेंड किया, गोली मारने की धमकी

मुन्ना प्रसाद हिसार (हरियाणा) दैनिक भास्कर में 26 वर्ष से काम कर रहे हैं। इस समय वह भास्कर में सीटीपी ऑपरेटर हैं। मुन्ना प्रसाद ने मजीठिया वेतनमान के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस कर रखा है। जब भास्कर प्रबंधन को ये बात पता चली तो उसने मुकदमा वापस लेने के लिए उन पर दबाव बना दिया। पेपर में जो छोटी-छोटी गलतियां होती रहती हैं, उन्हीं को आधार बनाकर भास्कर प्रबंधन ने मुन्ना प्रसाद और उनके एक अन्य सहकर्मी सुरेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया। 

सुरेंद्र कुमार को भास्कर प्रबंधन द्वारा जारी सस्पेंशन लेटर

मुन्ना प्रसाद हिसार (हरियाणा) दैनिक भास्कर में 26 वर्ष से काम कर रहे हैं। इस समय वह भास्कर में सीटीपी ऑपरेटर हैं। मुन्ना प्रसाद ने मजीठिया वेतनमान के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस कर रखा है। जब भास्कर प्रबंधन को ये बात पता चली तो उसने मुकदमा वापस लेने के लिए उन पर दबाव बना दिया। पेपर में जो छोटी-छोटी गलतियां होती रहती हैं, उन्हीं को आधार बनाकर भास्कर प्रबंधन ने मुन्ना प्रसाद और उनके एक अन्य सहकर्मी सुरेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया। 

सुरेंद्र कुमार को भास्कर प्रबंधन द्वारा जारी सस्पेंशन लेटर

भास्कर प्रबंधन द्वारा सुरेंद्र कुमार को जारी सस्पेंशन लेटर

इस प्रकरण पर मुन्ना प्रसाद ने सिविल थाना, सीएम कार्यालय और लेबर डिपार्टमेंट में लिखित फरियाद की।  लेकिन कही से भी कार्रवाई पूरी तरह से नहीं हो रही है। पुलिस ने उन्हें बुलाकर कहा कि भास्कर आफिस जाकर वह इंक्वायरी करेगी, क्योंकि भास्कर के प्रोडक्शन हेड शांतनु विश्नोई ने उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। सुरेंद्र कुमार को भी गोली मारने की धमकी दी गई। बताते हैं विश्नोई के लाइसेंसी हथियार है। धमकी देते हुए विश्नोई ने ये भी कहा कि उसका बाप पुलिस में है तो कानून उसका क्या बिगाड़ लेगा। इससे मुन्ना प्रसाद और सुरेंद्र ने अपनी जान का खतरा बताया है। 

मुन्ना प्रसाद का कहना है कि पुलिस दिए गए समय पर ऑफिस छानबीन करने नहीं पहुंची। क्योंकि शांतनु के पिता पुलिस इंस्पेक्टर हैं। इसलिए बाहर का बाहर ही मामला निपटा दिया गया। 

भास्कर प्रबंधन द्वारा सुरेंद्र कुमार को जारी सोकॉज लेटर

मुन्ना प्रसाद द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री को दिया गया पत्र

मुन्ना प्रसाद से संपर्क : [email protected]

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1 Comment

1 Comment

  1. maheshwari mishra

    June 2, 2015 at 7:22 pm

    ये कार्रवाई पूर्णतः दुर्भावनापूर्ण और गैरकानूनी है. २६ साल से सब ठीक था केस के बाद उसी काम में गलती दिखवे लगी.पीडि़तों को लेबर कोर्ट जाना चहिए. चूंकि कुछ राज्यों में लेबर कोर्ट सेवामुक्ती के मामलों पर सीधे सुनवाई नहीं करता तो लेबर आफिस में शिका़यत करनी पड़ती है. चूंकि विभाग भष्टाचार के परियाय होते हैं. बातें बड़ी बड़ी मारते है और कंपनी से पैसे लेकर केस साल भर आफिस में दबा लेते हैं. इसलिए केस पर जो भी हुआ हो. ४५ दिन के बाद कार्रवाई विवरण लेकर केस आवेदक सीधे कोर्ट लगा दें इस परकि़या में ६ माह का समय लगता हैं. आफिस के माध्म से कार्रवाई होने में साल से दो साल लग सकते हैं.

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