नीरेंद्र नागर-
प्रवासी का अर्थ आप जानते ही होंगे। अगर नहीं जानते तो मैं बता देता हूँ। प्रवासी उसको कहते हैं जो अपना राज्य, देश या इलाक़ा छोड़कर कहीं और रहने या बसने के लिए चला जाए।
इसीलिए भारत हर साल ऐसे लोगों के लिए ‘प्रवासी’ भारतीय दिवस मनाता है जो भारत छोड़कर कहीं और बस गए हैं। जो बंगाली पश्चिम बंगाल छोड़कर अन्य राज्यों में रह रहे हैं, उनको भी ‘प्रवासी’ बंगाली कहा जाता है। पक्षी जो अपना मूल स्थान छोड़कर कहीं और आ गए हों, उनको भी ‘प्रवासी’ पक्षी कहते हैं।
तो प्रवासी का मतलब वह जो अपना इलाक़ा छोड़ कहीं और चला जाए – चाहे वह इंसान हो आ पक्षी; चाहे यह जाना कुछ समय के लिए हो, या हमेशा के लिए।
अब जब ‘प्रवासी का मतलब आप जान गए तो बताइए, ‘अप्रवासी’ का मतलब क्या होगा?
आप जानते ही होंगे कि ‘अ’ नकारात्मक उपसर्ग है जो किसी शब्द से पहले लगकर उलटा अर्थ देता है। जैसे नियमित का उलटा अनियमित, न्याय का उलटा अन्याय, चल का उलटा अचल, विवाहित का उलटा अविवाहित।
ऐसे में ‘अप्रवासी’ का मतलब क्या होगा? वह जो प्रवासी ‘न’ हो यानी जिसने प्रवास ‘नहीं किया हो। दूसरे शब्दों में वह जो अपना देश, राज्य या इलाक़ा छोड़कर कहीं और ‘नहीं’ गया हो।
यानी हमारे जैसे लोग। हम सभी भारतीय जो भारत में ही रह रहे हैं, अप्रवासी भारतीय हैं क्योंकि हम अपना देश छोड़कर कहीं और ‘नहीं’ रह रहे।
लेकिन हिंदी मीडिया में देखिए। सारे छोटे-बड़े संस्थान ‘प्रवासी’ भारतीयों के लिए ‘अप्रवासी’ भारतीय लिख रहे हैं। अचरज की बात है कि उन्होंने प्रवासी को भी पूरी तरह नहीं छोड़ा है। कुछ ख़बरों में वे उनको ‘प्रवासी’ भारतीय भी लिख रहे हैं।
यानी जो भारत से बाहर रह रहे हैं, वे उनकी नज़रों में ‘प्रवासी’ भी हैं और ‘अप्रवासी’ भी।
कैसी मूर्खता की बात है! क्या ‘प्रवासी’ और ‘अप्रवासी’ का एक ही अर्थ हो सकता है? अगर हो सकता है तो सत्य और असत्य का एक ही अर्थ होना चाहिए। न्याय और अन्याय का भी एक ही मतलब होना चाहिए। विवाहित और अविवाहित का भी एक ही माने होना चाहिए।
लेकिन किस संपादक या कॉपी एडिटर को इतना सोचने की फ़ुरसत है?
दुख की बात यह है कि हिंदी मीडिया के ऐसे दुष्प्रयोगों का असर जनमानस में इतना पड़ रहा है कि जब इस शब्द पर एक फ़ेसबुक पोल किया गया तो पता चला कि 73% लोग ‘अप्रवासी’ का यही अर्थ जानते हैं – वह जो परदेश में रहता है।
सच बात यह है कि ‘अप्रवासी’ जैसा कोई शब्द है ही नहीं और किसी भी ढंग के शब्दकोश में आपको यह नहीं मिलेगा। हाँ, इससे मिलता-जुलता एक और शब्द आपको कोश में मिल सकता है – ‘आप्रवासी’। यही वह शब्द है जिसको हमारे कुछ हिंदी पत्रकारों ने अपने अज्ञान के चलते ‘अप्रवासी’ कर दिया।
अब आप जानना चाहेंगे कि ‘आप्रवासी’ का क्या मतलब है और यह प्रवासी से किस तरह से भिन्न है।
इसके लिए आप किसी भी विवाहिता स्त्री की कल्पना करें जो अपने घर में बेटी है लेकिन ससुराल में बहू है।
स्त्री एक ही है लेकिन घर में उसे बेटी बुलाया जाता है और ससुराल में बहू। प्रवासी और आप्रवासी का मामला भी ऐसा ही है। एक भारतीय जो अमेरिका में बस गया है, वह हमारे और दुनिया के लिए प्रवासी भारतीय है, लेकिन अमेरिका के लिए वह आप्रवासी है। अंग्रेज़ी में इसे immigrant कहते हैं।
प्रवासी को ही तकनीकी भाषा में उत्प्रवासी (emigrant) भी कहते हैं। अंग्रेज़ी में ‘i’ प्रिफ़िक्स ‘अंदर के लिए और ‘e’ प्रिफ़िक्स ‘बाहर’ के लिए इस्तेमाल होता है। सो immigrant वह प्रवासी हुआ वह जो (किसी देश के) अंदर आता है, emigrant वह प्रवासी हुआ वह जो (किसी देश से) बाहर जाता है।
यानी हर भारतीय जो भारत छोड़कर कहीं और (जैसे अमेरिका या यूरोप में) जाकर बस जाता है, वह हमारे और दुनिया के बाक़ी देशों के लिए हुआ उत्प्रवासी (emigrant) और अमेरिका और यूरोप के लिए हुआ आप्रवासी (immigrant)।
शुरू-शुरू में हिंदी अख़बारों में आप्रवासी ख़ूब चला। आज भी अमर उजाला, पंजाब केसरी, हिंदुस्तान, जागरण में कभी-कभार ‘आप्रवासी’ लिखा मिलजाता है। लेकिन इन्हीं वेबसाइटों की दूसरी ख़बरों में ‘अप्रवासी’ और ‘प्रवासी’ भी मिल जाता है।
अब अंतिम सवाल। आख़िर यह ‘आप्रवासी’ ‘अप्रवासी’ में कैसे और क्यों बदला?
मुझे लगता है कि इसका कारण है NRI (Non-resident Indian) जिसको हिंदी में लिखा जाता है ‘अनिवासी’ भारतीय। हो सकता है, इस ‘अनिवासी’ भारतीय की देखादेखी कुछ मीडियाकर्मी ‘आप्रवासी’ भारतीय को भी ‘अप्रवासी’ भारतीय लिखने लगे हों। बेचारों को निवास-प्रवास का अंतर तो पता नहीं होगा! बस सोचा होगा, जैसे ‘अनिवासी’, वैसे ही ‘अप्रवासी’।
लेकिन उनकी इस शाब्दिक ‘करामात’ का असर यह हुआ कि आज जागरण और नवभारत टाइम्स जैसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थान भी आप्रवासी को भूल-भुलाकर अप्रवासी लिख रहे हैं।
तो निष्कर्ष यह कि ‘अप्रवासी एक ग़लत और अनावश्यक शब्द है। उसकी जगह प्रवासी ही लिखा जाना चाहिए। हाँ, immigrant और emigrant के लिए ‘आप्रवासी’ और ‘उत्प्रवासी’ शब्द चल सकते हैं हालाँकि इससे आसान कोई शब्द बन पाए तो पाठक के लिए बेहतर।
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