
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिका से भारतीयों का निर्वासन 2009 से हो रहा है। यह बात सही है लेकिन जयशंकर ने अधूरा बयान दिया है।
अमेरिका से भारतीय नागरिकों का निर्वासन (डिपोर्टेशन) 2009 से ही नहीं, बल्कि उससे पहले से भी हो रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है, खासकर 2016 के बाद, जब डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त नीति अपनाई।
क्या वास्तव में 2009 से निर्वासन चल रहा है?
- 2009 से पहले भी भारतीयों का डिपोर्टेशन हुआ है – अमेरिका में इमीग्रेशन नीतियाँ दशकों से लागू हैं, और इससे पहले भी भारत समेत कई देशों के लोग डिपोर्ट होते रहे हैं।
- 2016 के बाद मामले तेजी से बढ़े – ट्रंप प्रशासन के दौरान अवैध प्रवासियों पर शिकंजा कसा गया, जिससे भारतीयों का निर्वासन बढ़ा।
- बाइडेन प्रशासन में भी जारी – जो बाइडेन के कार्यकाल में भी निर्वासन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन कुछ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया है।
भारतीयों के निर्वासन के मुख्य कारण:
अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करना (जैसे, मेक्सिको के रास्ते चोरी-छिपे घुसना)।
वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रहना।
अमेरिका की इमीग्रेशन पॉलिसी का उल्लंघन करना।
आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होना।
क्या भारत सरकार सिर्फ पुराना मामला बताकर बच सकती है?
2009 से पहले भी डिपोर्टेशन होता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में भारतीय लौटाए जा रहे हैं।
भारत सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह अमेरिका के साथ इस मामले को कूटनीतिक रूप से हल करे।
अगर बड़ी संख्या में भारतीय अवैध रूप से अमेरिका जा रहे हैं, तो भारत में भी जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत है।
निष्कर्ष: एस. जयशंकर का यह कहना कि “अमेरिका से निर्वासन 2009 से चल रहा है” पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन यह अधूरा सच है। निर्वासन की प्रक्रिया पहले से रही है, लेकिन 2016 के बाद इसमें ज़बरदस्त इज़ाफा हुआ है। सरकार को केवल “पुराना मामला” बताकर इससे बचने की बजाय इस पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

अशोक कुमार पांडेय-
इकोनॉमिक टाइम्स कह रहा है कि पहली बार हथकड़ी पहनाकर भेजा गया, विदेशमंत्री कह रहे हैं यह कोई नई बात नहीं है।
Economic Times झूठ बोल रहा है या…


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