अखिलेश सरकार सीबीआई से नहीं कराएगी जगेंद्र हत्याकांड की जांच, अब हाईकोर्ट की सुनवाई का इंतजार

शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग को प्रदेश सरकार ने ठुकरा दिया है। अब देश-प्रदेश के आंदोलित पत्रकारों और संगठनों की निगाह 25 जून को इस मामले की हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रदेश सरकार का एक आरोपी राममूर्ति वर्मा के होने से इस मांग को ठुकराए जाने की मुख्य वजह माना जार हा है। हत्याकांड में कोतवाली प्रभारी समेत पांच पुलिस वाले भी अभियुक्त हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है लेकिन एक भी हत्यारोपी अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है।

शाहजहांपुर में धरने पर बैठे पत्रकार जगेंद्र सिंह के पत्नी बच्चे व अन्य

गौरतलब है कि एक जून को पेट्रोल छिड़क कर जगेंद्र को उनके घर में जिंदा फूंक दिया गया था। लखनऊ के एक अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा था। इस घटना की एक अदद चश्मदीद महिला गवाह भी मजिस्ट्रेट को दिए अपने बयान से मुकर चुकी है। उसे जगेंद्र सिंह की दोस्त बताकर मामले को दुष्प्रचारित किया जा रहा है। पुलिस ने उसके खिलाफ भी जगेंद्र की कथित ‘आत्महत्या’ में मदद की रिपोर्ट लिखी है। जगेंद्र ने इसी महिला के साथ मंत्री द्वारा बलात्कार करने का आरोप लगाया था। पुलिस उस महिला से किसी को मिलने नहीं दे रही है। मरने से पहले जगेंद्र बयान दे चुके हैं कि ‘मुझे पुलिस वालों ने मारा पीटा और आग लगा दी। मुझे गिरफ्तार कर लेते लेकिन मारा क्यों, तेल क्यों छिड़का।’ उन्होंने मरने से पूर्व साफ साफ राज्य के मंत्री राममूर्ति वर्मा का मुख्य गुनहगार के रूप में नाम लिया था। जगेंद्र ने फ़ेसबुक पर मंत्री के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ रखी थी। 

जगेंद्र का मददगार कहे जा रहे पूर्व विधायक देवेंदर सिंह एक समय में राममूर्ति वर्मा के निकट के लोगों में थे। जगेंद्र हत्याकांड पर अब दोनो आमने-सामने हैं। घटना के संबंध में एसपी बबलू कुमार का कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच चल रही है। जबकि जगेंद्र के परिजन सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वे पिछले लगभग एक सप्ताह से धरना दे रहे हैं। जगेंद्र के बेटे राहुल का कहना है कि जब रिपोर्ट में पुलिस वाले ही गुनहगार हैं तो वे निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं। वे सबूतों को मिटा रहे हैं। विधायक सुरेश कुमार खन्ना भी चाहते हैं कि घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिए। अखिलेश सरकार ने सीबीआई से जांच कराने से मना कर दिया है। एक मानवाधिकार संगठन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगा रखी है कि घटना की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया जाए। इस पर 25 जून को सुनवाई होनी है। 

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