जगेंद्र हत्याकांड पर मुख्यमंत्री की हठधर्मिता और शिवपाल का बयान शर्मनाक

शाहजहांपुर : पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव से मदद मिलने के बजाय सरकार अपनी हठधर्मिता पर उतारू है। सपा के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह ने जो बयान जगेंद्र की हत्या को लेकर दिया, वह शाहजहांपुर ही नहीं, पूरे देश को शर्मसार करने वाला है। 

एक मौत होती है स्वभाविक। जगेंद्र सिंह को एक मंत्री की साजिश का शिकार होना पड़ रहा है। उनको जिंदा फूंका गया है। उस पर कार्रवाई करने के बजाय प्रदेश के जिम्मेदार मंत्री बयान दे रहे हैं कि जांच से पहले कोई मंत्री हटाया नहीं जाएगा। एफआईआर का मतलब अपराधी नहीं होता! तो मैं पूछना चाहता हूं प्रदेश के इन जिम्मेदारों से क्या जगेंद्र पर मुकदमा लिखाने के बाद उसकी जांच करवाई गई थी। या वैसे ही कोतवाल को पेट्रोल लेकर दबिश देने भेज दिया। अगर ऐसा ही है तो प्रदेश के थानों से एफआईआर का सिस्टम खत्म कर दो और जांच कमेटियां बना दो। उनकी रिपोर्ट आने के बाद अपराधियों को पकड़वा लेना। 

एक ओर जगेंद्र के परिजनों को इंसाफ दिलाने के लिए पूरे देश के पत्रकार एकजुट होकर सीएम से न्याय मांग रहे हैं, उस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा और वह मीडिया से सरकार की छवि खराब होने से बचाने को सहयोग मांग रहे हैं। यह कैसे दोहरी नीति है। किस मुंह से मीडिया से सहयोग मांग रहे हैं। उसी मुंह से, जिससे कोतवाल श्रीप्रकाश राय को यह कहा गया था कि जाओ जगेंद्र को फूंक दो! प्रदेश के मुखिया के कानों में उस विधवा की कराह नहीं पहुंची, उन बेटों की आह नहीं पहुंची, जिनके सिर से बाप का साया उठ चुका है। उस बूढे बाप की पथराई आंखों में अपने बेटे के इंतजार के आंसू भी नहीं दिखे! जो खुटार में अपने जांबाज जगेंद्र के मरने के बाद न्याय मांग रहा है। 

अरे न्याय भी तो सपा से और आप से ही चाहिए, कम से कम एक दिवंगत पत्रकार की मदद कर देते सीएम साहब। यूपी के उस मंत्री को बर्खास्त ही कर देते। जांच में बेगुनाह होता तो फिर सौंप देते ताज। जैसा राजा भैया को सौंपा था। पत्रकार तो एक मंत्री की बर्खास्तगी चाह रहे हैं। आप तो पूरे मीडिया से अपनी सरकार की छवि बनाने की भीख मांग रहे हैं। उसी सरकार की छवि, जिसको राममूर्ति जैसे मंत्री दागदार कर रहे हैं। अरे सीएम साहब छवि सुधारना है तो पहले मंत्रियों को सुधार लो, खुद ब खुद सुधर जाएगी छवि। सहयोग मांगने से पहले कम से कम एक बार सोच लिया होता कि जिस मीडिया कर्मी के लिए पूरा देश आपसे न्याय मांग रहा है, उसमें आप कतई सहयोग नहीं कर रहे हैं और आप मीडिया से सहयोग की अपेक्षा रख रहे हैं। 

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