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उत्तर प्रदेश

जागरण प्रबंधन ने हिसाब-किताब मांगने पर एड एजेंसी संचालक को कैसे उलझा दिया? पढ़ें आप-बीती

अलीगढ़ | Sanchar Advertising के संचालक नवीन शर्मा ने हरदुआगंज थाने में दिए अपने लिखित स्पष्टीकरण में FIR को प्रताड़ना और पुरानी लेखा-अनियमितताओं को दबाने की साज़िश बताते हुए कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। नवीन शर्मा ने कहा कि पूरा मामला व्यावसायिक लेन-देन का है, जिसे आपराधिक रंग देकर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है।

यह रहे उनके स्पष्टीकरण के मुख्य बिंदु—

  1. 2017 से Jagran प्रबंधन से लगातार हिसाब-किताब साफ कराने की मांग

नवीन शर्मा के अनुसार मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक उन्होंने अजय अभिषेक श्रीवास्तव, शैलेंद्र दीक्षित और विनय तिवारी जैसे Jagran अधिकारियों को बार-बार ई-मेल भेजकर बिलिंग, भुगतान और एजेंसियों के लेन-देन का पूरा विवरण देकर खाते निपटाने का आग्रह किया था। लेकिन 2018 से 2024 तक प्रबंधन ने कोई सहयोग नहीं किया।

  1. बिना FIR के 2024 में उनके खिलाफ भ्रामक खबर छापी गई

सितंबर 2024 में स्थानीय अख़बार ने उन्हें “धोखाधड़ी” जैसे आरोपों में घेरा, जबकि उस समय थाने में उनके खिलाफ कोई FIR या शिकायत दर्ज ही नहीं थी। RTI (अक्टूबर 2025) में भी यही पुष्टि हुई। नवीन शर्मा का आरोप—यह खबर सामाजिक दबाव और बदनाम करने के उद्देश्य से छापी गई थी।

  1. जैसे ही 2025 में उन्होंने फिर से हिसाब मांगा—उसी दिन FIR

2025 में उन्होंने जब Director शैलेंद्र जैतली को ई-मेल भेजकर 2017–18 का पुराना हिसाब निपटाने की मांग दोहराई, तो उसके बाद 31 अक्टूबर 2025 को अचानक FIR दर्ज करा दी गई। वे इसे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हैं।

  1. Jagran के स्थानीय स्टाफ की पुरानी अनियमितताओं का आरोप – एक एजेंसी मालिक की आत्महत्या का भी हवाला

नवीन शर्मा ने कहा कि Jagran के कुछ स्थानीय कर्मचारियों की मनमानी और गलत प्रथाएँ वर्षों से शिकायत का विषय रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं अनियमितताओं और दबाव के चलते अलीगढ़ के विज्ञापन कारोबारी अशोक सक्सेना ने कथित रूप से आत्महत्या तक कर ली थी, लेकिन प्रबंधन ने कभी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की। उनका आरोप—“आज वही दबाव का मॉडल मेरे ऊपर दोहराया जा रहा है।”

  1. पूरा मामला सिविल / बिज़नेस ट्रांजैक्शन का, FIR में अपराध खोजने की मजबूरी

शर्मा का कहना है कि सभी ई-मेल, बिलिंग और भुगतान विवरण यह साबित करते हैं कि विवाद पूरी तरह व्यावसायिक लेन-देन और पुराने खाते निपटाने का है, ना कि कोई आपराधिक धोखाधड़ी। FIR को उन्होंने “झूठा, दबाव आधारित और बदले की कार्रवाई” बताया।

  1. शर्मा बोले—मैं जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हूँ। उन्होंने IO को भरोसा दिलाया है कि वे सभी रिकॉर्ड, ई-मेल, RTI, बिलिंग और पेमेंट दस्तावेज़ जाँच टीम को सौंपने को तैयार हैं।
  2. नवीन शर्मा का अनुरोध—मामले को वास्तविक संदर्भ में देखा जाए

उन्होंने पुलिस से इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है—

विवाद का मूल स्वरूप पूरी तरह लेखा-जोखा है। FIR से पहले 7 वर्षों तक कोई मुकदमा या शिकायत नहीं। 2024 की झूठी खबर और 2025 की तुरंत दर्ज FIR का संदिग्ध समय-क्रम। Jagran कर्मचारियों के पुराने विवाद भी संदर्भ में लिए जाएँ। जाँच तथ्य और दस्तावेज़ों के आधार पर हो। नवीन शर्मा ने कहा कि वे न्याय और निष्पक्ष जांच पर पूरा भरोसा रखते हैं।

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1 Comment

1 Comment

  1. Geetika

    December 8, 2025 at 1:46 pm

    Is prakran ki nishpaksh jaanch hona chahiye jisse navin ji ko nyay mil sake aur kanoon vyavastha per vishvas bana rahe

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