एनडीटीवी के फाउंडर प्रणय रॉय की एक तस्वीर ने पिछले कई दिनों से इंटरनेट पर बवाल मचा रखा है। कई लोगों ने इस पर लिखा। खूब लिखा। अब यही तस्वीर साझा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने पुराने दिनों को याद किया है। उन्होंने बताया कि साल 2021 में प्रणय रॉय ने उनके अलग विद्या के एक इंटरव्यू को पत्रकारिता का भविष्य बताकर खूब तारीफ की थी…नीचे पढ़ें
उमाशंकर सिंह-
डॉक्टर रॉय की इस ख़ूबसूरत तस्वीर से एक व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस होता है… जब मैं NDTV में रहते हुए सालों MoJo में मशगूल रहा तो प्रणय रॉय ने कई बार मुझे सराहा।
मैंने 2021 में अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन राजदूत का ‘two cam interview’ अकेले दो मोबाइल फ़ोन सेट से कर दिया तो उन्होंने एक ट्वीट पोस्ट में लिखा कि रिपोर्टिंग का भविष्य इसी तरह का होगा…
उनकी दूरदर्शी निगाह ने मानो भविष्य पढ़ लिया हो… डॉक्टर रॉय की ये तस्वीर (ऊपर) वर्तमान है।
प्रणय रॉय द्वारा 2021 में किए ट्वीट का हिंदी अनुवाद-
उमाशंकर का ‘मोjo’ (मोबाइल जर्नलिज्म) काम वाकई बेहद शानदार है। वह हर दिन यह दिखाते हैं कि भविष्य की रिपोर्टिंग कैसी होने वाली है।

मौजूदा दौर में मुझसे पूछा जाए कि पत्रकारिता के नज़रिए से महाभारत का सबसे बड़ा भुक्तभोगी पत्रकार कौन है… तो मैं साफ़ तौर पर कहूँगा कि महाभारत में भीष्म पितामह की भूमिका ने मुझे हमेशा से प्रेरित किया है। चाहे कितना भी बड़ा संकल्प लेना हो तो मैं क़तई भीष्म पितामह की तरह किसी संकल्प से इस तरह से बाँध नहीं सकता। मैं सब कुछ बर्बाद होता हुए देखूँ और जब इच्छा की पूर्ति हो तो विरोधी पक्ष के अर्जुन से प्यास बुझाने के लिए विद्या की फिर से परीक्षा लूँ…
मैं इसके विपरीत सब कुछ त्यागकर नई शुरुआत करते हुए नया भीष्म बनना पसंद करूँगा बिलकुल dekoder के प्रणव रॉय की तरह…
भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा छला हुआ, ठगा गया, बदनाम किया गया, विद्रुप सिस्टम का सबसे बड़ा शिकार प्रणव रॉय को मानता हूँ… नए भारत में उनकी भूमिका महाभारत के भीष्म पितामह की तरह ही है…
हम यदि पत्रकारिता को पेशा मानते हैं, इसकी नैतिकता को हम जीना चाहते हैं तो हमारे सामने प्रणव रॉय से बेहतर कोई नहीं हो सकता…
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान उनकी रिपोर्टिंग मोबाइल और माइक के साथ गंभीर पत्रकारिता को प्रोत्साहित कर रही है… पैदल घूमते हुए हर बड़े चेहरे से वैसा ही सवाल जैसा समय की ज़रूरत है…
मानों वे हार मानना नहीं चाहते तब तक जब तक कि भारतीय पत्रकारिता की साख दूरदर्शन के भीतर बैठकर दुमछल्ले बने पत्रकार एंकर की भाषा सुधर नहीं जाती.. -सुरेश महापात्रा, वरिष्ठ पत्रकार
नवेद शिकोह-
प्रणय रॉय का सच्चा प्यार …अपनी मोहब्बत को वो चांद पर घुमा लाया। वक्त हालात बदले, अब वो प्यार के उसी जज्बे से अपनी मोहब्बत को ठेले पर गोलगप्पे खिलने ले जाता है। चांद और ठेले तक ले जाने का सुख बराबर है। क्योंकि प्यार का जज्बा चांद और ठेले में फर्क नहीं समझता।
आप अट्ठारह के हों या अस्सी के, प्यार से कभी जी नहीं भरता। पत्रकारिता या किसी भी काम को जब आप अपनी महबूबा बना लेते हैं तो ये मोहब्बत मरते दम तक जारी रहती है। इससे जी कभी नहीं भरता।
प्रणय रॉय का पत्रकारिता से प्यार का जज्बा देखिए। लगभग पांच दशक पहले दूरदर्शन के एक न्यूज रीडर से सफर शुरू करने वाले प्रणय ने अपनी पत्नी राधिका के साथ भारत को सर्वश्रेष्ठ निष्पक्ष न्यूज चैनल एनडी टीवी दे दिया था। इन्हें निजी सैटेलाइट न्यूज चैनल का जनक कहा जाता है। सेटेलाइट न्यूज चैनलों की शुरुआत में इक्का-दुक्का ही न्यूज चैनल थे।
नब्बे के दशक में बड़े से बड़े कॉरपोरेट हाउस न्यूज चैनल शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उस समय प्रणय और राधिका ने एक बेहतरीन न्यूज चैनल स्थापित कर साबित किया था कि पत्रकार में दम हो तो वो पत्रकारिता के साथ खुद का मीडिया हाउस खड़ा करने का दम रखता है। करीब साढ़े तीन दशक तक एनडीटीवी चलाने वाले प्रणय रॉय का समय बदला और चैनल हाथ से निकल गया। कहां जाता है एनडीटीवी सरकार का भोंपू बनने को तैयार नहीं था इसलिए कंपनी के आर्थिक हालात बिगड़ते गए और गौतम अडानी ने एनडीटीवी खरीद लिया। इसके बाद प्रणय-राधिका के पास बड़ी जमा-पूंजी भी नहीं थी। लेकिन इस युगल के पास पत्रकारिता से लगाव, मोहब्बत और इमोशनल रिश्ते की पूंजी बची थी।
पत्रकारिता के हिमालय पर्वत की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने के बाद भी इस बूढ़े पत्रकार दम्पति का निष्पक्ष सच्ची पत्रकारिता के प्रेम से दिल नहीं भरा।
अब वो एक बार फिर जीरो से शुरुआत कर रहे हैं। बिना संसाधन या किसी यूनिट के करीब अस्सी की उम्र में निकल पड़े हैं ग्राउंड रिपोर्टिंग करने। एक हाथ में मोबाइल से रिकार्ड कर रहे हैं और दूसरे हाथ में माइक लिए हैं। उन्होंने अबकि बार डिकोडर नाम से छोटे से यूट्यूब चैनल की शुरुआत की है।
इस बार की पारी में इनके चेहरे पर बुढ़ापा आ गया है। शरीर कमजोर पड़ गया है, लेकिन जोश और जज्बा पहले जैसा ही है। बिल्कुल जवान आंशिक जैसा।
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