‘कल्पतरु एक्सप्रेस’ अखबार के कई वरिष्ठों को नापेंगे विनोद भारद्वाज!

आगरा के वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज के हिन्दी दैनिक कल्पतरु एक्सप्रेस के साथ प्रबंध संपादक के रूप में जुड़ जाने के बाद अब बीच मंझदार में डूबती कल्पतरु एक्सप्रेस नामक नाँव को शायद किनारा नसीब हो जायेगा. कुछ दिन पहले इस समूह में बड़ी संख्या में हुयी छंटनी के बाद अखबार मालिक ने अब सफ़ेद हाथी साबित हो रहे उच्च पदस्थों से मुक्ति पाने की तैयारी कर ली है और इसी क्रम में पहली बार आगरा मीडिया में तीन दशकों से अधिक का पत्रकारिता अनुभव रखने वाले एक स्थापित नाम विनोद भारद्वाज (जिन्हें आगरा मंडल के पत्रकार “गुरु” कहकर संबोधित करते हैं) को अखबार के साथ जोड़ा गया है.

विनोद भारद्वाज इससे पूर्व लगभग 24 वर्षों तक दैनिक जागरण के साथ जुड़े रहे जहाँ उन्होंने वरिष्ठ पदों पर काम किया और जागरण को आगरा मंडल में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.  तीन वर्ष पूर्व कुछ कारणों से वे दैनिक जागरण से अलग हो गये थे. विनोद भारद्वाज के इस समूह के साथ जुड़ जाने के बाद अब वे कर्मचारी शायद थोड़ा परेशान होंगे जो कल्पतरु समूह में नौकरी को सरकारी नौकरी के सामान माना करते थे, जहाँ कि काम करो अथवा नहीं नौकरी और तनख्वाह दोनों सुरक्षित रहती थीं.

गौरतलब है की कुछ दिन पूर्व ही कल्पतरु समूह से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी की खबर आयी थी. एक-दो सप्ताह के भीतर ही छंटनी की तलवार उन्ही उच्च पदस्थों पर लटकने लगी है जिन्होंने कुछ दिन पहले औरों को बेरोजगार किया था. खबर है कि कल्पतरु एक्सप्रेस में अब केवल प्रबंध संपादक एवं संपादक ही होंगे, समूह संपादक-कार्यकारी संपादक और इस जैसे अन्य पद समाप्त कर दिए जायेंगे. आने वाले दिनों में इस अखबार में कई बड़े फेरबदल नजर आयेंगे जो इस अखबार को मजबूती प्रदान करेंगे.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.



 

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Comments on “‘कल्पतरु एक्सप्रेस’ अखबार के कई वरिष्ठों को नापेंगे विनोद भारद्वाज!

  • ajai reporter says:

    ऐसा कुछ नहीं है काफी समय से आर्थिक दिक्कत चल रही है…..समाचारपत्र समूह अपनी विश्वसनीयता खो चुका है

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  • 😛 सच है की अखबार कुछ आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है लेकिन यह भी सच है कि इसका मुख्य कारण बेहिसाब ठूँस कर भर लिये गये वो अकर्मण्य लोग हैं जोकि इस समूह में नौकरी को आराम की नौकरी मानकर चलते रहे हैं जहाँ काम करने की कोई जरुरत नहीं होती लेकिन तनख्वाह समय पर आ जाती है. अब स्थिति बदल चुकी है,ये तो बस शुरुआत है और कई बड़े बदलाव आने अभी बाकी हैं.

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  • is akhabar ka kuchh nahi ho sakata. chahe jo aa jaye. jab tak malikan kee policies nahi badlegi, aisa hi chalata rahega. lala ko shuru se hi chamache palane ki aadat rahi hai jo na kam karate hai aur na kisi ko karane dete hai.

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  • केंद्र में सरकार बदलने के साथ ही इस अखबार में भी ब्राहमण बनिया समीकरण,भारदवाज-साहू , लागू कर दिया गया है , अखबार का मालिक दिवालिया हो रहा है पहले उसने खटाल या डेयरी बेची, घुडसाल बेची, माल को बंद कर रहा है उसी क्रम मे अखबार को भी समेटने के पहले इस समीकरण से शायद चल जाए इस आशा मे …

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