कुंभ में मीडिया वालों की बुरी हालत, प्रबंधन में योगी सरकार फेल!

Mangla Prasad : पत्रकार के बिना कुछ होता भी नहीं और पत्रकार उपेक्षित भी है, ये कहां का न्याय है? गुरूवार को प्रयागराज कुंभ में पत्रकार के साथ हुई मारपीट की घटना से न सिर्फ पत्रकार समाज आक्रोशित है बल्कि आम जनमानस भी इस घटना की निंदा कर रहा है।

दरअसल ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक फोटो ग्राफर अनुज खन्ना के साथ कुम्भ मेला डयूटी में लगे एक निरंकुश पुलिसकर्मी ने कवरेज के दौरान पहले तो अभद्रता की फिर जमकर मारपीट की। बता दें कि यह घटना संगम नोज पर राष्ट्रपति कार्यक्रम के समय की है। मौके पर पहुंचे अन्य कैमरामैन लोगों ने फोटो और मारपीट का विडियो बना लिया जो अब वायरल हो रहा है।

सूचना विभाग द्वारा निर्देशित चंद फोटो पत्रकारों को राष्ट्रपति के प्रोग्राम को कवरेज करने की छूट थी। इसमें भी एक जानेमाने समाचार पत्र के वरिष्ठ फोटोग्राफर को पुलिस की आताताई का शिकार होना पड़ा। सूचना विभाग इतनी भी जिम्मेवारी निभाने में सफल नहीं हो सका कि वह चंद प्रत्रकारों को अपने साधन से स्वीकृत क्षेत्र तक ले जा सकता।

किसी वीवीआईपी के नाम पर चारों तरफ से मेले में प्रवेश बर्जित कर देना कहीं से उचित नहीं कहा जा सकता। वीआईपी या वीवीआईपी के आने और जाने का एक मार्ग निश्चित होना चाहिए उसी से उन्हे ले आया और ले जाया जाना चाहिए। मेला संत महात्माओं और श्रद्धालुओं का है उनके आवागमन के लिए भी मार्ग खुला रहना चाहिए।

अभी कुछ दिनों पहले भी धूमनगंज पुलिस द्वारा ‘हिन्दुस्तान अखबार’ के सेल्स हेड अभिनव बाजपेयी जी व उनकी पत्नी के साथ न सिर्फ अभद्रता की गई थी बल्कि उनके साथ भी थाने में ले जाकर मारपीट की गई थी जिसे सभी अखबारों ने प्रमुखता से छापा भी था। इसके बावजूद भी प्रयागराज पुलिस सुधरने का नाम नहीं ले रही है।

बहरहाल पुलिस के इस रवैये से पत्रकारों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। हो भी क्यों न! अच्छा हो या बुरा, हमेशा मीडियाकर्मी ही आपकी आवाज को जन जन तक पहुंचाता है, पर आज मीडियाकर्मी की आवाज कौन बनेगा? मीडिया कर्मीयों को दलाल, चाटुकार कहने, गाली देने को तो हजारों खड़े रहते हैं पर जब किसी मीडियाकर्मी के साथ बुरा बर्ताव होता है तो सबको सांप क्युं सूंघ जाता है? ये दोहरी मानसिकता क्युं? अरे भाई! पत्रकार के बगैर कुछ होता भी नहीं है और पत्रकार उपेक्षित भी?

हम ‘टाइम्स आफ इण्डिया’ के पत्रकार साथी पर किए गए इस अमानवीय व्यवहार की निंदा करते है साथ ही उच्चाधिकारियों से यह मांग भी करते है की सम्पूर्ण मामले की निष्पक्ष जाँच कर आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ उचित कार्रवाई करें, बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद सवाल ये उठता है कि माननीय योगी जी क्या इसी तरह के संवेदनहीन पुलिसकर्मीयों के भरोसे इस कुंभ को दिव्य और भव्य बनायेगें।

फर्जी पत्रकारों पर सूचना विभाग मेहरबान

इस बार कुंभ में सूचना विभाग ने ऐसे ऐसे लोगों को पास बांट दिए हैं जिन्हे खबर का ‘ख’ भी नहीं पता। पर वो पूरे कुंभ क्षेत्र में सेल्फी लेते, विडियो बनाते, माइक लेकर रौब जमाते दिख रहे हैं। यकीन मानिए ऐसे लोगों से खबर तो बहोत दूर की बात है, यदि एक अप्लीकेशन लिखने को बोल दीजिए तो वो भी न लिख पाएंगे। पता नहीं किस मानक का पालन करते हुए सूचना विभाग द्वारा ऐसे लोगों को मीडिया पास जारी किया गया है, जो जिंदगी भर वाट्सएप ग्रुपों से खबरें चोरी करके अपने ग्रुप्स में फारवर्ड करते थे।

पुलिस वालों के साथ सेल्फी सिर्फ इसलिए लेते हैं कि लोग इनको वजन देने लगें, जो मीडिया पास सोशल मीडिया (फेसबुक, वाट्सएप इत्यादि पर) सिर्फ इसलिए वायरल करते हैं कि लोग समझ जाएं ‘भैया यहू पत्राकार आहैं’, जो कुंभ क्षेत्र में खबरें नहीं सिर्फ बाबाओं, मशहूर हस्तियों, पुलिसकर्मीयों और नेताओं के साथ सिर्फ सेल्फी लेने के फिराक में रहते हैं वो भी आज कुंभ में पत्रकारिता का रौब झाड़ रहे थे।

इसके बावजूद भी सूचना विभाग आंखों पर पट्टी बांधकर ऐसे ऐसे अखबारों को पास दिया है जिनको खुद भी नहीं पता होगा कि उनका अखबार बंद कब से है! ऐसे ऐसे पोर्टलों को पास जारी किया गया है जिनपर हफ्ते हफ्ते भर खबरें ही अपडेट नहीं होती, कोई बड़े अखबार वाले का रिश्तेदार है तो कोई बड़के पत्रकार साहब के साथ रहने वाला, या फिर सूचना विभाग के कर्मचारियों के साथ अच्छे सांठगांठ वाला।

यही कारण है जिसके चलते पत्रकार पीटे जाते हैं

उम्मीद नहीं थी कि कल प्रयागराज कुंभ में घटी घटना जिसने पूरे सोशल मीडिया को हिला दिया था, इस तरह से हवा में गायब हो जाएगी। आज किसी भी अखबार में इस घटना का ना तो कोई जिक्र है और ना ही किसी की सहानुभूति। हमेशा की तरह पुलिस की लॉबीइंग कामयाब रही और पत्रकारिता का दम घोट दिया गया। दरअसल संवेदनहीन पुलिसकर्मी नहीं, संवेदनहीन हम खुद हैं, ये जानते हुए कि आज उसकी तो कल हमारी बारी है। खैर.. हिम्मत तो किसी ने दिखाई नहीं तो अब अगली घटना का इंतजार करें।

मंगला तिवारी
हिन्दुस्तान, प्रयागराज

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Comments on “कुंभ में मीडिया वालों की बुरी हालत, प्रबंधन में योगी सरकार फेल!

  • कुम्भ में पत्रकारों के लिए बेहतरीन सुविधाएं हैं। योगी सरकार की ओर से पत्रकारों के लिए हर उस पहलू का ख्याल रखा गया है, जिससे उन्हें कवरेज में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो

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  • कुम्भ को विश्व स्तर पर प्रसारित करने में पत्रकार मित्रो का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, सूचना विभाग हमारे सभी पत्रकार मित्रो का सम्मान करता है एवं ऐसी घटनाओं की निंदा करता है साथ ही हम अपने पत्रकार मित्रों से निवेदन करते है कि वे कृपया वी० आई० पी० प्रोटोकॉल के वक़्त संयम बनाए रखें। हम हमारे पत्रकार मित्रों को कुम्भ की कवरेज करने में हर संभव सुविधा प्रदान करने हेतु प्रयासरत है।

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  • उत्तर प्रदेश में पत्रकार उत्पीड़न की घटना काफी तेजी से बढ़ रहा है पुलिस व अधिकारी की तानाशाही की वजह से पत्रकार उत्पीड़न की घटना में वृद्धि हो रही है.?
    मुख्यमंत्री भी पत्रकारों के हितों व घटनाओं की अनदेखी कर मौन हैं। कोई बात हो तो पत्रकार को बुलाओ और पत्रकार का उत्पीड़न हो तो मौन हो जाओ.? क्या ऐसे ही काम चलेगा.! पत्रकार कवरेज करना छोड़ दें और सच बातों को उजागर करने लगे तो सबको समझ में आ जाएगा.? मीडिया हाउस

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