बिहार में लग गया आपातकाल, मुजफ्फरपुर मामले की खबर छापने दिखाने पर रोक!

Ravish Kumar : आदेश आया है…. मत बोलना मत लिखना मत देखना… बालिका गृह की बच्चियों तुम्हें इंसाफ़ नहीं मिलेगा। हम यह बात जानते थे। जानते हैं। जानते रहेंगे।

Santosh Singh : सारी मित्र, आज से मुजफ्फरपुर बालिकागृह मामले में कोई खबर दिखा नहीं पायेगे क्योंकि माननीय हाईकोर्ट ने खबर चलाने प़र रोक लगा दिया ह्रै। साहब आप कह देते कि पत्रकारिता ही नहीं, देश छोड़ कर चले जाओ तो ये भी कर देते। ये दिन तो देखने को नहीं मिलता। दुख इस बात का नहीं है कि कलम पर पाबंदी लगी।

दुख इस बात का है कि जिस दो कौड़ी के संतरी ने खबर रुकवाने के सारे प्रपंच आजमा लिये और कुछ नहीं कर पाये, उसके लिए इस हद तक चले जाने कि क्या जरूरत थी। मेरा तो सम्मान बढ़ गया साहब जिस पत्रकारिता से लोगों का मोह भंग हो गया था इस खबर ने एक बार फिर से पत्रकारिता के प्रति लोगों में उम्मीद जागृत कर दिया। अपनी सोचिए, इस फैसले से आपने संस्थान का कितना मान बढ़ाया है। मेरा क्या है, मैंने तो अपना काम कर दिया। इस फैसले से किसका भला होना है, अब तो ये फैसला बिहार की 11 करोड़ जनता ही करेगी।

Sanjaya Kumar Singh : गोदी मीडिया वैसे ही खबरें न छापे पर राज्य के महाधिवक्ता ऐसा आदेश कैसे दे सकते हैं और अगर दें तो वही आदेश क्यों न सामाने आए। जिस विभाग के लोगों की जांच होनी है वह क्यों सूचना निदेशक को सूचना दे रहा है। अगर महाधिवक्ता किसी कारण ऐसा जरूरी और कानूनन जायज समझते हैं तो वही जनता को (या सूचना विभाग को) बताएंगे उसमें अभियुक्त विभाग (मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है तो बाकी अधिकारियों की कौन जाने) को ऐसा करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को इसका विरोध करना चाहिए। यह आदेश अदालत का नहीं हो तो कैसे मान्य हो सकता है। अदालत का भी हो तो उसे ऊपर की अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

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मुजफ्फरपुर आश्रयगृह मामले में सीबीआई को अदालत की फटकार. फिर राज्य के महाधिवक्ता के पत्र के हवाले से संबंधित विभाग द्वारा राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को लिखे गए पत्र का अर्थ समझिए. अदालत का आदेश सीबीआई की जांच से संबंधित सूचनाओं को ‘लीक’ करने से रोकने के लिए है. पर लग ऐसा रहा है जैसे सुनवाई की सूचना भी प्रकाशित नहीं होनी है. इसमें कोई शक नहीं है कि सीबीआई जांच के दौरान सूचनाएं लीक होती रहती हैं और उन पर रोक जरूरी है. ऐसी रोक का दुरुपयोग या दुरुपयोग की कोशिश भी संभव है. नजर रखना होगा.

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वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार, संतोष सिह और संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.


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