बिहार की राजनीति में एक बार फिर 1999 का चर्चित शिल्पी–गौतम केस गरमा गया है। चुनावी मौसम में प्रशांत किशोर ने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या उस हाई-प्रोफाइल रेप और मर्डर केस में सम्राट चौधरी अभियुक्त के तौर पर संदिग्ध थे? क्या सीबीआई जांच में उनका नाम आया था? क्या डीएनए सैंपल लिया गया था या नहीं? प्रशांत किशोर के इन आरोपों ने पुराने जख्म कुरेद दिए हैं और अब इस मामले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
इस प्रकरण पर अब प्रशांत किशोर के आरोपों से भी ज्यादा तूल पकड़ रहा है वो लाइव सिटीज यूट्यूब चैनल द्वारा बनाया गया थमनेल है। जिसमें पूछा गया है कि शिल्पी के अंडरगार्मेंट्स में मिला वो दूसरा वीर्य किसका था…? इसे लेकर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं, एक-एक कर पढ़िए….
आवेश तिवारी-
यह पटना के कथित पत्रकार ज्ञानेश्वर वात्स्यायन के चैनल का थमनेल है। दलाल, उगाही करने वाला यह कथित पत्रकार पहले सैनिक जागरण में था फिर यूट्यूब चैनल खोल लिया। कुछ समय पहले अमित शाह के यहां हाथ जोड़े बैठा आलू बैगन की तरकारी और पुड़ी खा रहा था।
एक मृतक स्त्री को लेकर इसकी भाषा देखिए। यह पूरे चुनाव भर नंगई करेगा। शिल्पी गौतम इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके परिवार वाले जरूर होंगे उन्हें इस निर्लज्ज को जमकर कूटना चाहिए। जो असहमत हों नीचे लिखें।
विवेक त्रिपाठी-
ज्ञानेश्वर जी, आप बहुत सीनियर पत्रकार हैं लेकिन वो पत्रकार ही क्या जिसके पास शब्द न हों.. पत्रकार शब्दों से खेलता है.. उसे शब्दों का खिलाड़ी कहा जाता है.. एक पत्रकार को हमेशा भाषा की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए..
सीबीआई की लिखा-पढ़ी में अगर मां-बहन की गालियां होती तो क्या वो भी आप अपनी खबर में शामिल कर लेते?? आपने उस युवती की फोटो लगाकर जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया उससे आपने न सिर्फ खुद हजारों बार उसका बलात्कार किया बल्कि लोगों से भी कराया.. उस बेचारी की सांसें पता नहीं किन हालातो में छूटी होंगी.. अपने तमाशा बना दिया..
यहां पर आप उचित शब्दों का इस्तेमाल करके भी इस खबर को प्रस्तुत कर सकते थे..
वीडियो के थमनेल पर पत्रकार ज्ञानेश्वर वात्सायन ने जो प्रतिक्रिया दी है, वह भी पढ़ें…
मेरे एक वीडियो के इस Thumbnail पर कल रात से ही हंगामा खड़ा है. क्यों, सबों की अपनी विवेचना हैअ? यह वीडियो शिल्पी-गौतम केस से रिलेटेड है. मेरे पक्ष को पहले सुन लीजिए, फिर भी आपको गलत लगे, तो निंदा जरुर कीजिए. पिछले 35 वर्षों से हमने क्राइम रिपोर्टिंग की है.
क्राइम रिपोर्टिंग कभी मीठी नहीं होती, दर्द से भरी होती है. सबूत खोजने होते हैं हर अपराध के. संदेह-सबूत पर ही राज्य की पुलिस या फिर CBI जैसी एजेंसी जांच करती है. रिपोर्टर अब संदेह-सबूत को क्या तोड़-मरोड़ कर पेश करे.
अब शिल्पी-गौतम कांड, जिससे संबंधित वीडियो का यह थंब है. वीडियो हमने CBI की जांच और क्लोजर रिपोर्ट पर बनाई, जिसका प्रमाण हमारे पास लाल डायरी में मौजूद है. इस केस में जांच शुरु ही इस बात से हुई कि मृत अवस्था में शिल्पी के शरीर पर जो पैंटी थी, उसे जांच के लिए CBI ने हैदराबाद भेजा. अब हम इस तथ्य को कैसे छुपा सकते थे?

CBI ने भी पैंटी शब्द का ही उल्लेख किया है, जो हमने बताया है. फिर जब हैदराबाद की लेबोरेट्री में इस पैंटी की जांच DNA के लिए हुई, तो उस पर दो अलग-अलग किस्म के वीर्य ( सीमेन ) मिले. इसमें एक वीर्य तो शिल्पी के साथ मृत गौतम के मिल गए, पर दूसरा किसका और कब का, यह सवाल CBI के सामने खड़ा हो गया. बिना इस गुत्थी को सुलझाए जांच आगे नहीं बढ़ती.
मतलब CBI को यह पता करना था कि गौतम के अलावा दूसरा कौन और कैसे शिल्पी के साथ इच्छा से या फिर जबरिया सेक्सुअल संसर्ग में आया था. वैसे शरीर के प्राइवेट पार्ट जबरन का संकेत नहीं दे रहे थे. दूसरे वीर्य का पता लगाने को ही CBI ने कई संदेही लोगों के Blood Sample लिए. फिर सभी Blood Samples को उसी दूसरे वीर्य से मिलान के लिए लैब भेजा गया. पर किसी का ब्लड सैंपल उस दूसरे वीर्य से मैच नहीं किया.
ये सारी बातें CBI ने इन्हीं शब्दों में कोर्ट को लिखित तौर पर बताई है. और अब जब बिहार में फिर से इस कांड की चर्चा होने लगी, तो हमने CBI की रिपोर्ट के मुताबिक VIDEO में बताया.
अब आप ही तय करें, क्या तथ्यों/शब्दों को तोड़ कर मैं बताता, तो सही होता या गलत? यदि तोड़ देता, तो क्या ईमानदारी होती. इसलिए, आखिर में फिर से कहना चाहता हूं कि क्राइम की खबरें मीठे शब्दों में नहीं बताई जा सकती, फिर जो सबूत और जांच है, उसके शब्दों को हम कैसे बदल सकते थे. बाकी, अब आप निर्णय करें? वीडियो Live Cities के YouTube चैनल पर है.
शिल्पी–गौतम केस: क्या, कब और कैसे?
- 3 जुलाई 1999 को पटना के फ्रेजर रोड स्थित सरकारी क्वार्टर नंबर-12 (साधु यादव का) के गैराज से एक सफेद मारुति कार में दो शव मिले।
- शव थे – शिल्पी जैन (23, मिस पटना, पटना वीमेंस कॉलेज की छात्रा) और गौतम सिंह (एनआरआई परिवार का बेटा, आरजेडी यूथ विंग से जुड़ा हुआ)।
- दोनों अर्धनग्न हालत में पाए गए।
कहानी:
- शिल्पी और गौतम बचपन के दोस्त थे, बाद में रिश्ता प्रेम में बदल गया।
- 3 जुलाई की सुबह शिल्पी कोचिंग जा रही थीं, लेकिन गौतम के परिचित ने कार में बैठाया और उन्हें सीधे वाल्मी गेस्ट हाउस ले जाया गया।
- उसी रात उनका शव कार से बरामद हुआ।
चौंकाने वाले तथ्य:
- शिल्पी पर कई लोगों द्वारा बलात्कार के निशान मिले।
- गौतम के शरीर पर चोट के निशान।
- घटनास्थल साधु यादव के कब्ज़े वाला क्वार्टर।
पुलिस ने सबूतों से छेड़छाड़ की – कार को ड्राइव करके थाने ले जाया गया, फिंगरप्रिंट व अन्य साक्ष्य नष्ट हो गए।
जांच और विवाद:
- शुरुआती पुलिस कार्रवाई में इसे आत्महत्या बताया गया।
- भारी दबाव में सितंबर 1999 में केस सीबीआई को सौंपा गया।
- सीबीआई ने बलात्कार की पुष्टि की, डीएनए सैंपल साधु यादव से माँगा लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया।
- 2003 में सीबीआई ने केस को आत्महत्या मानकर बंद कर दिया।
बाद की घटनाएँ:
- शिल्पी के भाई प्रशांत जैन ने केस को फिर से खोलने की कोशिश की।
- 2006 में उनका अपहरण हो गया, बाद में छुड़ाया गया।
- परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला।
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