भारत के कई शहरों में एलपीजी गैस की किल्लत की खबर कई दिनों से चल रही है। लोग कई कई किलोमीटर लंबी लाइनों में खड़े हैं। कल गोरखपुर में एक गैस एजेंसी का संचालक जमाखोरी के कारण हवालात पहुंच गया। कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद ढाबों, होटलों तक में गैस की आपूर्ति बाधित है। कालाबाजारी चल रही है। लेकिन मजाल है जो हमारी भारतीय मीडिया इस पर चूँ तक कर रही हो। वहीं, दूसरी तरफ सरकार दावा कर रही है कि कहीं कोई कमीं नहीं है, सब बढ़िया है, तो फिर जनता को पहले की तरह सिलेंडर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं।
नीचे पढ़िए रायटर्स ने इस मामले में क्या कुछ पब्लिश किया है?…

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति पर दबाव के कारण कई जगहों पर खाने-पीने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कुछ रसोइयों में गर्म भोजन कम किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है, उस पर भारतीय मुख्यधारा मीडिया में लगभग खामोशी दिखाई दे रही है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और समुद्री शिपिंग में आई बाधाओं के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। खास तौर पर Strait of Hormuz के रास्ते गैस और ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट का असर एलपीजी की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे कई क्षेत्रों में खाना पकाने की व्यवस्था बदलनी पड़ी है।
कैंटीन और होटलों में बदला मेन्यू
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कई कैंटीन, हॉस्टल, फैक्ट्रियों और छोटे भोजन केंद्रों में एलपीजी पर निर्भर व्यंजनों को कम किया जा रहा है। उनकी जगह अब सरल भोजन जैसे चावल, दाल, दही, नींबू पानी या हल्का खाना परोसा जा रहा है। कुछ जगहों पर चाय और अन्य गर्म पेय भी सीमित कर दिए गए हैं।
रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री पर असर
रिपोर्ट के अनुसार गैस आपूर्ति में कमी के कारण कुछ रेस्टोरेंट और होटल अपनी क्षमता कम कर रहे हैं और संचालन पर भी असर पड़ सकता है। वहीं जिन फूड आउटलेट्स में इंडक्शन या अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल होता है, वहां ग्राहकों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है।
ऊर्जा बचाने की अपील
रॉयटर्स के मुताबिक सरकार ने लोगों से घबराने की बजाय ऊर्जा बचाने की अपील की है। साथ ही रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और औद्योगिक क्षेत्रों को आपूर्ति कम करने जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और इसकी बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति में किसी भी बाधा का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि इस पूरे मुद्दे पर भारतीय मुख्यधारा मीडिया में व्यापक रिपोर्टिंग अभी तक देखने को नहीं मिली है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
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