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क्या इस रिपोर्टर या अखबार से पूछा जाएगा कि LPG शॉर्टेज पर एक ही दिन में दो अलग खबरें कैसे छपीं?

मनीष पांडेय-

एक ही अख़बार… और दो बिल्कुल अलग-अलग सच। एक तरफ उसी अख़बार में छोटे से बॉक्स में खबर छपती है कि मेडिकल कॉलेज में आज खाना नहीं बनेगा, क्योंकि गैस नहीं है।

और उसी अख़बार में बड़े-बड़े दो कॉलम की खबर छपती है कि डीएम साहब कह रहे हैं कहीं कोई किल्लत नहीं है। अब जनता आखिर माने किसे? छोटे बॉक्स वाली खबर को या बड़े कॉलम वाली खबर को?

दरअसल यही वह खेल है जो जनता में पैनिक और भ्रम पैदा करता है। एक ही अख़बार जब दो अलग-अलग सच दिखाएगा तो भरोसा टूटना तय है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कभी किसी रिपोर्टर या अख़बार से पूछा जाएगा कि एक ही दिन में दो बिल्कुल उलटी खबरें कैसे छप गईं? जवाब सब जानते हैं।

घंटा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। क्योंकि कल तक जो आपके खनकते सिक्कों पर नाचते थे, आज वही आपको घेरने और काटने के लिए तैयार खड़े हैं। और विडंबना यह है कि जिन्हें आपने छोटे-छोटे मीडिया संस्थानों का गला घोंटकर ऑक्सीजन दी, वही आज आपको डँसने में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।

समझ में आए तो ठीक, नहीं तो मैं तो लिखता ही रहूँगा।

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