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छत्तीसगढ़

पत्रिका रायपुर के राज्य संपादक की महिला पत्रकार पर मेहरबानी के मायने

पत्रिका के रायपुर संस्करण में एक वक्त था जब पत्रिका ने छत्तीसगढ़ में लांचिंग के साथ ही भास्कर जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र के सालों से जमे जमाए पैर को हिलाने में महीने भर का भी वक्त नहीं लिया। काफी कम समय में पत्रिका ने छत्तीसगढ़ में अपना अलग स्थान स्थापित किया। यही कारण है कि सीएम से लेकर जनता के दिलों में पत्रिका ने अपना अहम स्थान बनाया। पर पिछले एक वर्षों से स्थितियां काफी बदल गई है। जब से स्टेट हेड संपादक साहब ने यहां का कार्यभार संभाला है तब से पत्रिका का कंटेंट बहुत ही घटिया हो गया है।

पत्रिका के रायपुर संस्करण में एक वक्त था जब पत्रिका ने छत्तीसगढ़ में लांचिंग के साथ ही भास्कर जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र के सालों से जमे जमाए पैर को हिलाने में महीने भर का भी वक्त नहीं लिया। काफी कम समय में पत्रिका ने छत्तीसगढ़ में अपना अलग स्थान स्थापित किया। यही कारण है कि सीएम से लेकर जनता के दिलों में पत्रिका ने अपना अहम स्थान बनाया। पर पिछले एक वर्षों से स्थितियां काफी बदल गई है। जब से स्टेट हेड संपादक साहब ने यहां का कार्यभार संभाला है तब से पत्रिका का कंटेंट बहुत ही घटिया हो गया है।

समाचार पत्र में आए दिन गलतियां रहती है। बड़ी खबरों को अंडर डिस्प्ले कर दिया जाता है। जो रिपोर्टर अच्छी खबर लाते हैं उन्हें भी दबा दिया जाता है। रिपोर्टर को प्रोत्साहित करने के बजाय खबरों में बिना मतलब के मीन मेख निकाले जाते हैं। कुछ कर्मचारियों को जान बूझकर प्रताडि़त करने में स्टेट हेड बिल्कुल भी पीछे नहीं रहते। आए दिन बिना गलती के ही डांटते रहते हैं। साथ ही तबादला करने की धमकी तो मानों मुंह से निकलने के लिए तैयार रहती है।

आफिस में चर्चा है कि राज्य संपादक (स्टेट हेड) साहब ने कुछ महीने पहले एक महिला पत्रकार की नियुक्ति की थी। जबकि उस वक्त पत्रिका में कोई जगह भी खाली नहीं थी पर राज्य संपादक साहब ने जबरदस्ती पद बनाकर महिला पत्रकार की नियुक्ति की। ये महिला पत्रकार पत्रिका रायपुर में कार्यरत किसी भी कर्मचारी को कभी भी डांट सुनवा सकती है। सूत्रों की माने तो राज्य संपादक साहब इनके प्रमोशन की व्यवस्था भी कर चुके हैं। जल्द ही इन्हें दो से तीन पदों का प्रमोशन के साथ बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। अभी भी इन्हें ट्रेनी के समतुल्य काम नहीं आता पर राज्य संपादक साहब इन्हें ब्यूरो का विशेष संपादक बना दिया है।

महिला पत्रकार को प्रमोट करने के लिए राज्य संपादक साहब बड़ी-बड़ी खबरों को डंप करने से पीछे नहीं रह रहे हैं। महिला पत्रकार की बाईलाइन ऊपर लगे इसके लिए बड़ी खबर को मिनटों में डंप करवाया जा रहा है। संस्थान में सभी कर्मचारियों के लिए अलग नियम और इस महिला पत्रकार के लिए अलग नियम है। बाकी कोई तय समय से पहले घर नहीं जा सकता है जैसे कितनी ही विकट परिस्थिति हो पर ये महिला पत्रकार तो कई बार आफिस सिर्फ हाजिरी देने के लिए आती है। इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। राज्य संपादक के इस महिला पत्रकार के साथ आत्मीयता का खामियाजा पत्रिका के कर्मचारियों व पत्रिका को झेलना पड़ रहा है। अगर यही स्थिति रही हो पत्रिका न केवल कुछ अच्छे साथी खो देगा बल्कि बाजार में उसकी खबरों के गिरते स्तर के साथ साख भी गिरेगी। आशा है कि राज्य संपादक साहब अपने कर्तव्यों का संपादक धर्म के साथ पालन करेंगे।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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1 Comment

1 Comment

  1. man singh pal

    April 17, 2015 at 10:18 am

    bilkul sahi likha hai is mahila patrkar ke sambandh me ji haan ye mahila patrkar dindori jile ki hai oahle to dindori balon ne inko jhela or ab raipur bale jhel rahe hain .

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