अशोक कुमार पांडेय-
Trump के पिछले कार्यकाल में उसके झूठों का एक आकलन आया था। उसने अपने चार साल के कार्यकाल में कुल 30537 झूठ बोले थे।
इस बार वह रिकॉर्ड तोड़ने वाला है और गोदी मीडिया उसके झूठों पर नाच रहा है।
पहले कहा 21 मिलियन देकर बाइडेन सरकार गिरवा रहा था मोदी की, अब कहा कि वोटिंग पर्सेंटेज़ बढ़ाने के लिए मैंने आपने दोस्त मोदी को 21 मिलियन दिये थे।
वह शेर तो याद होगा- हुए तुम दोस्त जिसके …
प्रशांत टंडन-
ट्रंप ने USAID के 21 मिलियन डॉलर में मोदी का नाम लेकर सरकार को दबाव में ले लिया है. अब अमेरिका मोदी से वो सब करायेगा जो उसे चाहिये. पहला काम वो टेस्ला की इलेक्ट्रिक कार की भारत के बाजार आसान शर्तो पर एंट्री कराएगा.
ये हुआ तो भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बैठ जाएगी.
60 लाख कारों की सालाना खपत वाला भारत एक बड़ा बाजार है.
इसी तरह स्टील और एल्यूमीनियम में 25% इंपोर्ट ड्यूटी लगा कर ट्रंप भारत को इन दोनों धातुओं का डंपिंग यार्ड बना देगा.
इन दोनों मामलों पर मोदी भारत का हित मनवाने में कामयाब हो जायेंगे ऐसा लगता नहीं है.
मोदी अमेरिका को भारत में अपनी राजनीति चमकाने के लिये इस्तेमाल कर रहे थे. ट्रंप एक चालाक राजनीतिज्ञ है. उसने मोदी की कमज़ोरी भांप ली और अपनी जमीन को राजनीति के लिये इस्तेमाल करने की कीमत तो वसूलेगा ही.
2014 के बाद एक अजीब स्थिति पैदा हुई जब देश के उद्योगपतियों ने सीधे तौर पर राजनीति में हिस्सा लिया. खुल कर मोदी और उनकी ध्रुवीकरण की राजनीति का साथ दिया. हजारों करोड़ खर्च करके टीवी चैनल लगाए जो सिर्फ दो काम करते हैं मोदी का गुणगान और सामाजिक द्वेष पैदा करना.
उद्योगपतियों को सोचना चाहिये कि जिसके लिए उन्होंने ये सब किया वो अब उनके साथ नहीं है. उसे सिर्फ अडानी को बचाना है.
पवन खेड़ा-
USAID ने भारत को 2001-24 के बीच 2.9 बिलियन डॉलर दिए हैं।
इस राशि का 44.4% पैसा मोदी सरकार में आया है। इसीलिए हम श्वेत पत्र की मांग कर रहे हैं, क्योंकि सबके सामने आना चाहिए कि ये पैसा किसको-किसको गया?
इस पैसे का एक चौथाई हिस्सा पिछले 4 साल यानी नरेंद्र मोदी की सरकार में आया। ये पैसा कहां गया? साल 2021-2024 के बीच 650 मिलियन डॉलर आया। इसका हिसाब देश के सामने रखा जाए।
जब 2012 के दौरान अन्ना हजारे का आंदोलन चरम पर था, केजरीवाल अपनी पार्टी बना रहे थे। तब नरेंद्र मोदी, आडवाणी के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे थे।
उस वक्त भी USAID से कितना पैसा आया और किसे गया- ये सब हमें श्वेत पत्र में जानना है?
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