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व्हाइट हाउस में मोदी-ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस, AP के पत्रकार की नो एंट्री पर विवाद!

ओवल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस, लेकिन AP को नहीं मिली एंट्री…

हाल ही में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान मीडिया का भारी जमावड़ा देखा गया। हालांकि, इस बैठक में एसोसिएटेड प्रेस (AP) के पत्रकार को प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे यह मुद्दा मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया।

बता दें कि अमेरिका के वरिष्ठ पत्रकार जेके मिलर एपी की तरफ से व्हाइट हाउस के चीफ कॉरेसपॉन्डेंट हैं। जिन्हें इस पीसी से बाहर रखा गया।

AP पत्रकार की एंट्री पर रोक : तीसरी बार ऐसा हुआ

AP के अनुसार, उनके पत्रकार को इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। यह तीसरी बार है जब ट्रंप प्रशासन ने AP के पत्रकारों को ओवल ऑफिस में प्रवेश से वंचित किया है। इससे पहले, मंगलवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर समारोह और बुधवार को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के शपथ ग्रहण समारोह में भी AP के पत्रकारों को रोका गया था।

गल्फ ऑफ मैक्सिको विवाद बना रोक का कारण?

इस विवाद की जड़ ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ के नाम परिवर्तन से जुड़ी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कहकर संबोधित किया था, लेकिन AP ने आधिकारिक रूप से इसे ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ ही लिखा और इस मुद्दे पर प्रशासन से सवाल किए। माना जा रहा है कि इस नाराजगी के चलते ट्रंप प्रशासन ने AP के पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगा दी।

AP की प्रतिक्रिया: मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बताया

AP की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कार्यकारी संपादक जूली पेस ने प्रशासन की इस कार्रवाई को “गंभीर रूप से चिंताजनक” और “मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला” करार दिया। उन्होंने व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ को पत्र लिखकर इस फैसले का विरोध किया।

व्हाइट हाउस का बयान : प्रेस सचिव ने किया बचाव

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि मीडिया तक पहुंच के निर्णय राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने AP के ‘गल्फ ऑफ मैक्सिको’ नाम का उपयोग जारी रखने को “गलत सूचना फैलाने” के समान बताया।

प्रेस की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

AP जैसे प्रतिष्ठित समाचार संगठन के पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखना स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक गंभीर चुनौती है। यह घटना मीडिया की स्वतंत्रता और प्रशासन के साथ उसके संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है।

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