जगदलपुर। बस्तर में ग्रामीण पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने के लिए अब हर साल स्व. मुकेश चंद्राकर की स्मृति में ₹50,000 की फेलोशिप प्रदान की जाएगी। इस फेलोशिप की घोषणा देश के प्रख्यात पत्रकार पी. साईंनाथ ने बस्तर जिला पत्रकार संघ द्वारा चेंबर भवन में आयोजित ‘पत्रकारिता व चुनौतियां’ कार्यक्रम में की।
बस्तर के निर्भीक पत्रकार के नाम फेलोशिप
गौरतलब है कि बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की इसी साल जनवरी में निर्मम हत्या कर दी गई थी। वह एक ठेकेदार के भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे, जिसके चलते उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। उनकी साहसिक पत्रकारिता को याद रखते हुए मुख्य वक्ता पी. साईंनाथ ने कहा कि “बस्तर में निष्पक्ष और जमीनी पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को समर्थन और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।”
कैसे होगी फेलोशिप की प्रक्रिया?
यह फेलोशिप पीपल्स आर्काइव ऑफ रूरल इंडिया (PARI) संस्था की ओर से दी जाएगी, जिसे साईंनाथ संचालित करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि बस्तर जिला पत्रकार संघ इसके लिए एक चयन समिति गठित करे, जो हर साल एक पत्रकार का चुनाव करे।
फेलोशिप का उद्देश्य उन पत्रकारों को सम्मानित करना है जो ग्रामीण और जनहित पत्रकारिता में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। चयनित पत्रकार को ₹50,000 की राशि प्रदान की जाएगी, जिससे वह अपनी रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता को आगे बढ़ा सके।
ग्रामीण पत्रकारिता के लिए बड़ा कदम
कार्यक्रम के दौरान साईंनाथ ने कहा, “मुकेश चंद्राकर ने पत्रकारिता के लिए अपनी जान दे दी। हमें ऐसे पत्रकारों के कार्यों को आगे बढ़ाना होगा और उनकी पत्रकारिता को जीवित रखना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता अब मिशन से अधिक व्यवसाय बन गई है, लेकिन बस्तर जैसे इलाकों में अभी भी पत्रकार अपने साहस और ईमानदारी से काम कर रहे हैं।
पत्रकारिता में सुरक्षा भी जरूरी
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकारों ने भी इस फेलोशिप की सराहना की और कहा कि यह ग्रामीण पत्रकारिता करने वालों के लिए एक नई आशा की किरण होगी। साथ ही, उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि मुकेश चंद्राकर जैसी घटनाएँ दोबारा न हों।
परिचर्चा में कई वरिष्ठ पत्रकार रहे मौजूद
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेश रावल, रवि दुबे और राजेंद्र तिवारी भी उपस्थित थे। नरेश मिश्रा ने पी. साईंनाथ का परिचय दिया और उनके ग्रामीण पत्रकारिता में योगदान को रेखांकित किया।
नरेश मिश्रा ने कहा- बस्तर में पत्रकारिता करना आसान नहीं है, लेकिन ‘मुकेश चंद्राकर फेलोशिप’ जैसे कदम निश्चित रूप से साहसी पत्रकारों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देंगे।
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