Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

माखनलाल पत्रकारिता विवि के शिक्षक ने ग्रुप में शेयर किया मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला वीडियो, छात्रों ने दौड़ाया

नवनीत झा-

भोपाल स्थित माखनलाल विश्वविद्यालय का मामला, जन संचार विभाग के विभागाध्यक्ष ने व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा था वीडियो, छात्रों ने शिक्षक पर लगाया उकसाने का आरोप, छात्रों के विरोध के बाद प्राध्यापक ने दिया पत्रकारिता का बहाना

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के ऊपर थोपने के लिए विवादों में रहने वाला भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय एक बार फिर कुचर्चा में है। माखनलाल विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष आशीष जोशी पर छात्रों को एक समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काने का आरोप लगा है। आशीष जोशी पर यह आरोप है कि उन्होंने अपनी कक्षा के व्हाट्सएप ग्रुप में मुसलमानों के खिलाफ घृणा फैलाने वाले वीडियो को संप्रेषित किया। लेकिन छात्रों ने जब व्हाट्सएप ग्रुप में शिक्षक के विचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, तब शिक्षक ने विद्यार्थियों को पत्रकारिता का हवाला देकर खुद का बचाव कर लिया।

यह सारा विवाद माखनलाल विवि में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष आशीष जोशी द्वारा छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ है। आशीष जोशी पूर्व में लोकसभा चैनल के एडिटर रह चुके हैं और फिलहाल माखनलाल विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष हैं। आशीष जोशी ने ग्रुप में कपोल कल्पना पर आधारित एक वीडियो साझा किया है जिसमें यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि कैसे सेक्युलरिज्म (धर्मनिरपेक्षता) इस देश के लिए एक खतरा है।

आशीष जोशी द्वारा साझा किए गए इस वीडियो में धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को गलत करार देने के लिए टोक्यो में ओलंपिक मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू का हवाला दिया गया है। प्राध्यापक द्वारा साझा किए गए वीडियो में बताया गया है कि अगर इस देश में सेक्युलरिज्म बचा रह गया तो मीराबाई चानू को लेकर आने वाले समय में जो फिल्म बनेगी उसमें यही चित्रण किया जाएगा कि शांतिप्रिय समुदाय (वीडियो में मुसलमानों के ऊपर कसा गया तंज) से आने वाले अब्दुल चाचा ने मीराबाई को गोश्त खिलाया और मीराबाई के लिए जब मजार पर जाकर दुआ मांगी तब जाकर मीराबाई ने ओलंपिक में मेडल जीता।

काल्पनिक फिल्म के बारे में बताया गया है कि देश में सेक्युलरिज्म के बचे रहने पर उस फिल्म में यही बताया जाएगा कि मीरबाई चानू का गृह राज्य मणिपुर पहले मियांपुर था जिसका नाम बदल कर बाद में मणिपुर कर दिया गया। वीडियो में शाहरुख खान की चक दे इंडिया, आमिर खान की दंगल और अक्षय कुमार की गोल्ड फिल्म का हवाला देकर कहा गया है कि इन फिल्मों को जरिए जिहादी एजेंडे को प्रचारित किया गया है।

ग्रुप के सदस्य छात्रों को आशीष जोशी द्वारा भेजा गया वीडियो को नागवार गुजरा। छात्रों ने शिक्षक को नैतिकता, धर्मनिरपेक्षता और खुद पत्रकारिता का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया। ग्रुप के सदस्य एक छात्र ने वीडियो को लेकर कहा कि समाज के तोड़ने वाली इसी विचारधारा के कारण हमारा देश तरक्की नहीं कर पा रहा है। इस तरह के वीडियो हमारे देश की एकता और समाज को तोड़ने का काम करते हैं। सभी छात्र शिक्षक द्वारा ग्रुप में भेजे गए वीडियो के खिलाफ एक सुर में बोलने लगे और आशीष जोशी से स्पष्टीकरण मांगने लगे। साथ ही वीडियो को डिलीट करने की मांग भी की जाने लगी।

जब व्हाट्सएप ग्रुप में आशीष जोशी ने बवाल मचता हुआ देखा तब जोशी ने छात्रों के सामने पत्रकारिता का हवाला दिया। आशीष जोशी ने कहा कि ये एक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता हुआ एक वीडियो है, एक पत्रकारिता छात्र होने के नाते छात्रों को हर पक्ष को जानना चाहिए। जोशी ने छात्रों से कहा कि मैंने आप लोगों पर कोई विचार थोपा नहीं है, आप अपनी राय बनाने के लिए स्वतंत्र हैं।

लेकिन शिक्षक द्वारा वीडियो को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण छात्रों के गले नहीं उतरा । छात्रों ने आशीष जोशी द्वारा भेजे गए वीडियो के साथ की गई अपील की याद दिलाई। आशीष जोशी ने ग्रुप में वीडियो को भेजते समय छात्रों से चैनल को सब्सक्राइब करने की बात कही थी। छात्रों ने आशीष जोशी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आप हमारे ऊपर किसी विचार को थोपना नहीं चाहते थे, तब आपने हमसे चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए क्यों कहा?

छात्रों ने जोशी से कहा कि जब आप हमसे ये उम्मीद कर रहे हैं कि पत्रकारिता का छात्र होने के नाते हमें हर पक्ष को जानना चाहिए तब हम भी आपसे यही उम्मीद करते हैं कि आगे से आप हमसे हर गैर दक्षिणपंथी विचार को भी साझा करेंगे जो कि आज तक आपने नहीं किया है।

इस पूरे विवाद पर एक छात्र ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि विश्वविद्यालय में यह एक खुला राज़ है कि ज्यादातर प्राध्यापक संघ की विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं, प्राध्यापक आशीष जोशी भी संघ की विचारधारा से आते हैं। छात्र ने बताया कि शुक्रवार देर रात आशीष जोशी ने जनसंचार विभाग के सभी ग्रुप में ये वीडियो भेजा था। छात्र ने कहा कि संघ की विचारधारा का समर्थन करना एक निजी विषय है लेकिन उस विचारधारा को छात्रों पर थोपना अनुचित है। छात्र ने बताया कि खुद आशीष जोशी अमूमन अपनी विचारधारा को छात्रों पर थोपना का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन एक जागरूक छात्र होने के नाते हमें यह ज़रूर पता है कि हमें किस विचार का समर्थन नहीं करना है। कम से कम देश के सामाजिक सौहार्द और एकता के विषय पर तो कोई समझौता नहीं हो सकता।

छात्र ने कहा कि आशीष जोशी निजी तौर पर बेशक किसी भी विचारधारा के समर्थक हो सकते हैं, और हम छात्रों को उनके द्वारा किसी विचारधारा के समर्थन या विरोध करने से कोई गुरेज भी नहीं है। लेकिन ऐसी सामग्रियां जो विचारधारा की आड़ में किसी समुदाय विशेष के खिलाफ द्वेष फैलाने और भड़काने का काम करती हैं, एक शिक्षक होने के नाते उन्हें छात्रों को इसे साझा करने से बचना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा छात्रों के ऊपर थोपने का यह प्रकरण नया नहीं है। अंग्रेजी दैनिक अखबार में काम करने वाले माखनलाल विश्वविद्यालय के ही एक पूर्व छात्र ने बताया कि पहले भी विश्वविद्यालय में छात्रों को संघ की विचारधारा के समर्थित कार्यक्रमों में औपचारिक और अनौपचारिक तौर पर ले जाता जाया रहा है।

विश्वविद्यालय के ही एक अन्य पूर्व छात्र सुहृद तिवारी ने बताया कि आशीष जोशी पर लोकसभा चैनल के एडिटर रहने के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। पूर्व छात्र ने कहा कि जब वे विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे इस दौरान संस्थान में एक खास विचारधारा को थोपने के लिए एबीवीपी से जुड़े लोगों को विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाया जाता था। ऐसे कई उदाहरण हैं जो इस बात की गवाही देते हैं कि कैसे विश्वविद्यालय में छात्रों का एक खास विचारधारा के प्रति झुकाव बनाने की एक सुनियोजित साजिश की जाती है।

सुहृद तिवारी ने कहा कि यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति दीपक तिवारी के कार्यकाल के दौरान संस्थान को संघ के संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए विचारधारा रहित वातावरण बनाने की भरपूर कोशिश हुई थी, लेकिन बीजेपी का कार्यकाल आते ही विश्वविद्यालय अब एक बार फिर अपनी पुरानी पटरी पर लौट आया है। जिसका उद्देश्य संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों का माइंड वॉश किया जाना है। सुहृद तिवारी ने कहा कि कैसे RSS संस्थानों को अपने कब्जे में लेकर नेस्तनाबूत करने का प्रयास करता है, माखनलाल विश्वविद्यालय उसका जीता जागता उदाहरण है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन