नरेंद्र मोदी कहीं भाजपा के बहादुर शाह जफर यानी अंतिम प्रधानमंत्री तो नहीं साबित होने जा रहे हैं!

Ashwini Kumar Srivastava : देश के तकरीबन हर हिस्से से आ रहीं अराजकता की खबरें अब लोगों के जेहन में यह सवाल उठाने लग गई हैं कि नरेंद्र मोदी कहीं भाजपा के बहादुर शाह जफर यानी अंतिम प्रधानमंत्री तो नहीं साबित होने वाले हैं… जिन्हें इतिहास का ज्ञान होगा, वह जानते होंगे कि साढ़े तीन सौ बरस तक समूचे हिंदुस्तान पर हुकूमत करने वाले मुगल साम्राज्य के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर के समय में पूरा देश तो बहुत दूर की बात थी, दिल्ली और उसके आसपास ही मुगलिया कानून को मानने वाले नहीं रह गए थे…

लिहाजा, बेबस जफर अपने महल में बैठे शायरी कर रहे थे और दिल्ली और उसके आसपास भीड़ अराजक हो चुकी थी …जाहिर है, ऐसे में मुगलिया सल्तनत पूरे देश में भला कैसे टिकी रहती, जब दिल्ली और सम्राट के किले में ही उसने दम तोड़ दिया था। कुछ-कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों मोदी के नेतृत्व में भाजपा की हुकूमत का भी है, जिसका राज तो इस समय दिल्ली समेत सारे देश पर है…लेकिन इनसे न तो कश्मीर संभल पा रहा है और न ही दिल्ली और उसके आसपास का इलाका…

अब देखिये, कल ही कश्मीर में धर्मांध भीड़ ने अपने ही धर्म के डीएसपी को मस्जिद के बाहर ही पीट-पीट कर मार डाला। इसे पढ़कर हम सभी देशवासियों को न सिर्फ गुस्सा आया बल्कि हैरत भी हुई कि आखिर किस कदर अराजकता फैली हुई है कश्मीर में…फिर अचानक देश की राजधानी दिल्ली के बेहद नजदीक बल्लभगढ़ में वैसी ही भयावह घटना होने का समाचार आ गया….

तो क्या अब हमारे देश में कानून का राज खत्म हो चुका है और हमारा देश भी अब पाकिस्तान, सीरिया, अफगानिस्तान जैसे अराजक मुल्कों में बदलने लगा है? जहां कश्मीर से लेकर दिल्ली तक, गुजरात से लेकर बंगाल-झारखंड तक या फिर समूचे देश में ही हत्यारी भीड़ के हाथों सड़कों पर ‘त्वरित न्याय’ होता है…तो क्या अब इस देश का संविधान, कानून, अदालत, पुलिस खुद यहां के लोग ही मानने को तैयार ही नहीं है?

कश्मीर में भीड़ का अराजक होना बेहद चिंताजनक है क्योंकि हम कश्मीर खोना नहीं चाहते… और वहां हम हर कीमत पर भारत के संविधान, कानून, अदालत, पुलिस का राज ही देखना चाहते हैं, लेकिन दिल्ली के नजदीक ही भीड़ का अराजक होना तो उससे भी ज्यादा चिंताजनक है…क्योंकि जब हम दिल्ली और उसके आसपास ही कानून का राज कायम नहीं रख पाएंगे तो कश्मीर तो दिल्ली से वैसे भी बहुत दूर है…

Vikram Singh Chauhan : एक 16 साल के एक मुसलमान लड़के को लोकल ट्रेन में भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला। अब लोग बोल रहे हैं इसे साम्प्रदायिक रंग नहीं दिया जाये। लेकिन भीड़ का शिकार सिर्फ बेगुनाह मुसलमान क्यों हो रहे हैं? अख़लाक़ के बाद से हत्या का दौर जारी है। दरअसल इस भीड़ का नेतृत्व सत्ता में बैठे लोग कर रहे हैं ,उनके मुसलमानों को लेकर दिए जा रहे बयान कर रहे हैं ,टीवी न्यूज़ चैनल कर रहे हैं,उनके बड़बोले नेता मंत्री कर रहे हैं, कथित योगी, गुरु और बाबा कर रहे हैं। इन सबने मिलकर बहुसंख्य हिन्दू को मुसलमानों के खिलाफ उकसाया है और उकसा रहे हैं। इस मासूम की मौत के लिए ये सब जिम्मेदार हैं।

Sheetal P Singh : अजब वक़्त है. कुछ लोग कश्मीर में डिप्टी एस पी को पीट पीट कर मार डालने पर लिखते हैं. और, कुछ दूसरे लोग बल्लभगढ़ में सोलह बरस के बच्चे को पीट पीट कर मार डालने पर लिखते हैं. बहुत कम हैं जिन्हें दोनों घटनाएँ रुला पाती हैं. पता नहीं कैसे इन निर्दोष बेबस मौतों में फ़र्क़ कर लेते हैं लोग? अपनी पसंद का दुख चुन लेते हैं लोग? ओखला से बल्लभगढ़ तक तीन मुस्लिम बच्चों की अकारण सिर्फ मज़हबी आधार पर जानलेवा पिटाई करने वाली भीड़ का जो मानस है वही मोदी जी के बहुमत पाने का आधार है, “विकास”नहीं! और यह विनाश है, विकास नहीं! जिन्हे पसंद है वे देश को गृहयुद्ध में झोंकने की तैयारी ( नाइजीरिया जैसा बनाने) के गुनहगार हैं! दुर्भाग्य से एक तिहाई के करीब भारतीय इस रक्तरंजित मूढ़ता के पक्षकार हैं!

पत्रकार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव, विक्रम सिंह चौहान और शीतल पी. सिंह की एफबी वॉल से.

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Comments on “नरेंद्र मोदी कहीं भाजपा के बहादुर शाह जफर यानी अंतिम प्रधानमंत्री तो नहीं साबित होने जा रहे हैं!

  • mk pramod says:

    What happened to pseudo secular brigade who are always sensitive to target present dispensation for all incident happening in the country. Earlier, when there was damini rape in delhi, where was award wapsi brigade? They were sleeping then because so called secular party congress was ruling then. I think people who has been enjoying their life in India International Centre must now be ashamed of themselves.

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