भास्कर के सताए हुए और श्रम विभाग से निराश नरेंद्र सर्वोदयी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

भास्कर प्रबंधन से परेशान नरेंद्र सर्वोदयी ने भड़सा4मीडिया को लिखे पत्र में बताया है कि किस तरह से भास्कर प्रबंधन ने उन्हें मजीठिया वेतनमान न देने के उद्देश्य से भारत की सीमा पर बाड़मेर कर दिया। उन्होंने अखबार प्रबंधन की तानाशाही और आपबीती इस प्रकार बयान की है – 

” सर, मैंने दैनिक भास्कर में 17 साल संपादकीय विभाग में काम किया। मजीठिया के डर से ही मेरा व तीन अन्य साथियों का तबादला सितंबर 2013 में भारत की सीमा पर बाड़मेर कर दिया गया। मजबूरन मुझे दैनिक भास्कर छोडना पड़ा। मैं कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत था । मेरा दो वर्ष का मजीठिया के अनुसार कोऑर्डिनेटर पद का एरियर, साथ ही 2008 से तीस प्रतिशत अंतरिम राहत का एरियर बनता है। इसके अलावा मुझे पीएफ विभाग से मिलने वाली मात्र 1100 रुपए की पेंशन भी मजीठिया की सेलरी मिलने पर प्रभावित होगी। 

” मैंने एरियर व अन्य लाभों के लिए कई बार दैनिक भास्कर मैनेजमेंट को लिखा। दिल्ली एवं जयपुर में लैबर डिपार्टमेंट को लिखा लेकिन दैनिक भास्कर मैनेजमेंट जवाब नहीं दे रहा है। लेबर विभाग ने मेरी शिकायत पर नोटिस भी जारी किया है लेकिन उसका भी जवाब नहीं दिया गया है। नोटिस की प्रति अटैच है। 

” तंग आकर मैंने भी सुप्रीम कोर्ट में दैनिक भास्कर के खिलाफ अवमानना का मामला दायर कर रखा है। लेबर डिपार्टमेंट का क्या इतना सा ही काम है कि वो नोटिस जारी कर दे। जब भास्कर उसके नोटिस का जवाब नहीं दे रहा है तो उसे क्या कदम उठाने चाहिए? साथ ही क्या वो सुप्रीम कोर्ट को भी इसकी रिपोर्ट भेजेगा? कृपया मार्ग दर्शन करें….नरेन्द्र सर्वोदयी, जयपुर।”

नरेंद्र सर्वोदयी से संपर्क : narendra.sarvoday@gmail.com



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