Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

नोएडा बवाल (पार्ट 4): प्रदर्शन में पाकिस्तानी एंगल खोजते प्रशासन और मीडिया के लिए इंसान सस्ता है बाकी सब महंगा!

नोएडा में श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन को लेकर जहां मीडिया और प्रशासन ‘पाकिस्तानी कनेक्शन’ जैसे एंगल तलाशने में जुटे हैं, वहीं इस पूरे मामले की असली जड़—बढ़ती महंगाई और ठहरी हुई मजदूरी—लगातार नजरअंदाज की जा रही है। सवाल यह है कि जब रोजमर्रा का खर्च आसमान छू रहा हो और 10-12 घंटे काम करने के बाद भी वेतन गुजारे लायक न हो, तो आखिर मजदूर अपनी जिंदगी कैसे चलाए? यही दबा हुआ गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है, जिसे समझने के बजाय भटकाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।


इसी ग़रीब जनता का पेट काट-काटकर ऐसे मोदल्लों को 15-15 करोड़ की सैलरी दी जा रही है! और इस मोदल्ले को इन मज़दूरों का ये प्रदर्शन अपने बड़े पॉपॉ और छोटे पॉपॉ के ‘2027 के चुनाव’ के ख़िलाफ़ साज़िश लग रहा है। श्रमिकों के नाम पर राजनीति लग रही है। अबे मोदल्ले! इन ग़रीबों के भी 2-4 रुपये शामिल होंगे तेरी मोटी चमड़ी को तेल पिलाने वाली तेरी मोटी सैलरी में! उसी की शरम कर ले कुछ! -भगतराम


एडवोकेट विजय सिंह-

सड़कें जलीं, 3 दिन से प्रदर्शन लगभग हर बड़े न्यूज़ चैनल के ऑफिस के बाहर था, पर आवाज़ स्टूडियो तक नहीं पहुँची।

ना भाजपाई बोले, ना एंकरों ने पूछा, 10–12 हज़ार में ज़िंदगी कैसे चलती है।

बहस हिंसा पर हुई, मजदूर पर नहीं। सच यही है, यहाँ पसीना सस्ता है, प्रोपेगेंडा महँगा।


रवीश रंजन शुक्ला-

नोएडा में मज़दूरों के हिंसक प्रदर्शन में विदेशी हाथ खोजने वाले प्रशासन के लिए, इस ज़माने में केवल इंसान सस्ता है बाकी सब मंहगा हुआ है…

हरियाणा ने इस एक अप्रैल से मज़दूरों की दिहाड़ी में बढोत्तरी की.. अकुशल मज़दूरों को 11270 रुपए की मजदूरी से बढ़ाकर उसे 15220 रुपए कर दिया

कुशल मज़दूरों की मजदूरी 13700 से बढ़ाकर 18500 कर दिया गया

आपको समझना होगा नोएडा या ग्रेटर नोएडा उतना ही मंहगा है जितना गुरुग्राम या फरीदाबाद फिर मजदूरी क्यों अलग-अलग.. इसी को लेकर मज़दूरों ने 10अप्रैल से शांतिपूर्वक आंदोलन करना शुरु किया लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी समस्याओं के लिए बैठक होती रही हल नहीं निकला।

13 अप्रैल को जब मज़दूरों को लगा कि उनके मसले पर सरकार गंभीर नहीं है तो कुछ शरारती तत्व उग्र हो गए… छोटा सिलेंडर पहले 100 रुपए में भरता था अब दो सौ से तीन सौ रुपए में भर रहा है।

दवा से लेकर लगभग सभी प्रॉडक्ट मंहगे हुए हैं क्योंकि उनका पैकेजिंग का खर्चा बढ़ा है। प्लास्टिक मंहगा होने से दाम सातवें आसमान पर लेकिन मज़दूरों का पसीना पानी है उस पर कहां मंहगाई का असर होता है..


हमारा मीडिया इस्लामाबाद पर कब्ज़ा दिखा सकता है, आसिम मुनीर को हिरासत में लेना दिखा सकता है….तो नोएडा में आक्रोशित फैक्ट्री श्रमिकों के पगार बढ़ाने के आंदोलन में पाकिस्तान की एंट्री कराना इसके लिए कौन सा मुश्किल है? अगर नोएडा में ‘वर्कर्स अनरेस्ट’ के पीछे पाकिस्तान का हाथ है तो हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियां (LIU, RAW) फिर क्या घुइयां छीलने के लिए हैं? कहां सोते रह गए “धुरंधर”? -खुशदीप सहगल

संबंधित खबरें…

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन