Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने की तैयारी; अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों में नाराज़गी

नई दिल्ली। अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों से जुड़े एक अहम मुद्दे को लेकर इन दिनों चर्चा तेज़ हो गई है। खबरें सामने आ रही हैं कि केंद्र सरकार संसद में ऐसा विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिससे वर्ष 2025 में Supreme Court of India द्वारा अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के पक्ष में दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के प्रभाव को बदला जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय में देश के करीब 13 हजार अर्धसैनिक अधिकारियों को Organized Service का दर्जा देने की बात कही गई थी। इस फैसले का उद्देश्य अधिकारियों को समयबद्ध पदोन्नति, वित्तीय लाभ और प्रतिनियुक्ति के अवसर प्रदान करना था, ताकि इन बलों में भर्ती होने वाले अधिकारियों को स्पष्ट और सम्मानजनक करियर प्रगति मिल सके।

अर्धसैनिक बलों के अधिकारी Union Public Service Commission के माध्यम से ग्रुप-A सेवा में भर्ती होते हैं। बताया जाता है कि इनमें से कई अधिकारी पिछले डेढ़ दशक से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। अदालत के निर्णय में यह भी व्यवस्था की गई थी कि IG स्तर तक के पद कैडर अधिकारियों के लिए सुरक्षित हों, जिससे बलों के भीतर से आने वाले अधिकारियों को आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके और संस्थागत मनोबल मजबूत रहे।

हालांकि अब जो सूचनाएं सामने आ रही हैं, उनके अनुसार सरकार इस फैसले के प्रभाव को बदलने के लिए संसद में नया विधेयक ला सकती है। इससे अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों में चिंता और असंतोष का माहौल बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि देश की आंतरिक और सीमाई सुरक्षा में अर्धसैनिक बलों की भूमिका बेहद अहम रही है। चाहे नक्सलवाद के खिलाफ अभियान हो, कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई हो, पंजाब में अलगाववाद का दौर रहा हो या पूर्वोत्तर में उग्रवाद — हर कठिन मोर्चे पर इन बलों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है।

Central Reserve Police Force ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हजारों जवानों और अधिकारियों का बलिदान दिया है। वहीं Border Security Force पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर लगातार तैनात रहती है। दुर्गम हिमालयी इलाकों में Indo‑Tibetan Border Police कठोर परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा करती है। इसके अलावा Sashastra Seema Bal और Central Industrial Security Force भी देश की सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

इन बलों के अधिकारी अपने जवानों के साथ जंगलों, पहाड़ों और आतंक प्रभावित क्षेत्रों में कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। ऐसे में यदि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदलने या कमजोर करने की कोशिश होती है तो इससे अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 76 जवानों और अधिकारियों के बलिदान और पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों की घटनाएं अक्सर इस बात की याद दिलाती हैं कि ये बल किस तरह देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाते हैं। ऐसे में कई अधिकारियों का कहना है कि जब वे देश के लिए जोखिम उठाते हैं तो उनके अपने करियर और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

फिर भी अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और नेतृत्व पर भरोसा है। उन्हें उम्मीद है कि Narendra Modi और Amit Shah इस विषय की गंभीरता को समझते हुए ऐसा निर्णय लेंगे जिससे सुरक्षाबलों के सम्मान, अधिकार और मनोबल को बनाए रखा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्र की सुरक्षा में लगे इन बलों के लिए न्यायसंगत करियर व्यवस्था केवल कर्मचारियों के अधिकार का सवाल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्थागत मनोबल से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

संबंधित खबर…

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. Bipin

    March 14, 2026 at 10:29 am

    Ye jo aap adhikari adhikari chilla rahe hai, ye capf ke jonk hai jo mahan bal ki sabhi cheejo ka khoon choos rahe hai, govt ko pata hai ki ips lobby nahi hogi toh ye pura ka pura organisation ko barbad kar denge

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन