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रामदेव की पतंजलि का यह माफीनामा वह नहीं है जो होना चाहिये!

संजय कुमार सिंह-

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रकाशित पतंजलि का यह माफीनामा वह नहीं है जो होना चाहिये। आप जानते हैं कि बाबा अपने उत्पादों का प्रचार करके पैसे कमाते थे और उन्हें प्रचारित करने के लिए पैसा खर्चते थे। इससे सरकार की सेवा होती थी बदले में सरकारी एजेंसियां (और मीडिया भी) आंख मूंदे रहते थे। लेकिन पाप का घड़ा भर ही जाता है। अब माफी छपवाना पड़ रहा है पर इसमें वह बात नहीं है जो होनी चाहिये या जिसके लिए माफ मांगी जा रही है।

2014 के बाद देश को जो आजादी मिली है या अच्छे दिन आये हैं उसमें वही सब होता है जो देश के वैज्ञानिक स्वभाव और वैज्ञानिक चिकित्सा देखभाल के खिलाफ हो। माफी नामे में इसे स्वीकार किया जाना चाहिये। लीवर डॉक्टर (theliverdr) आयुष से संबंधित गलत सूचनाओं से लड़ रहे हैं और बदले में सरकारी एजेंसियों के शिकार हो रहे हैं। कभी अदालत में कभी थाने में।

उन्होंने लिखा है कि माफी नामा ऐसा होना चाहिये (अनुवाद मेरा) “हम भारत की जनता को अपने अपरीक्षित आयुर्वेदिक हर्बल उत्पादों की विज्ञापित प्रभावशीलता को लेकर गुमराह करने, गलत सूचना देने और धोखा देने तथा भारत के लोगों की राष्ट्रवादी, धार्मिक, सांस्कृतिक व पारंपरिक भावनाओं का फायदा उठाकर अपने अवैज्ञानिक और संभावित रूप से हानिकारक आयुर्वेदिक उत्पाद को बेचने के लिए माफी मांगते हैं।

हम भारत के संविधान में 1976 में किये गये बयालीसवें संशोधन, अनुच्छेद 51 ए (एच), “भारतीय नागरिक के मौलिक कर्तव्य” के तहत भारत के संविधान द्वारा निर्धारित क़ानून का पालन करेंगे और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करेंगे तथा गलत कामों की उचित सज़ा को स्वीकार करेंगे जिससे इस प्यारे देश में वैज्ञानिक स्वभाव और वैज्ञानिक चिकित्सा देखभाल को नुकसान पहुँचाया और बदनाम किया गया।”

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