
विमल कुमार-
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम का चरित्र हनन करने की कोशिशों की हमें कड़े शब्दों में भर्त्सना करनी चाहिए।
पिछले दिनों एक यूट्यूब चैनल ने अजीत अंजुम पर बड़े उल्टे सीधे आरोप लगाए हैं और गलतबयानी भी की है उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया है। इसका एक वीडियो वायरल भी हुआ है। करीब 16 लाख लोगों ने उस वीडियो को देखा है जिसमें अजीत अंजुम पर हमला किया गया है और उनके बारे में गलत तथ्य पेश कर उनक़ा चरित्र हनन करने की कोशिश की गई है।
दरअसल पिछले कुछ सालों से जिस तरह अजीत अंजुम सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, उससे बहुत लोगों को पेट में दर्द हो रहा है और वे बौखला गए हैं।
वीडियो में अजीत अंजुम का वास्तविक नाम अजीत कुमार झा बताया गया है जबकि वे झा नहीं हैं। बिहार के बेगूसराय के रहने वाले हैं जबकि उनके खिलाफ बने वीडियो में उन्हें भागलपुर का बताया गया है। यह भी बताया गया है कि वे नोएडा में एक पेंट हाउस में रहते हैं जबकि सच्चाई यह है कि वह इंदिरापुरम में रहते हैं। यह भी गलत है कि वह कभी जागरण में काम करते थे जबकि सच यह है कि उन्होंने दिल्ली में अपनी पत्रकारिता की शुरुआत सांध्य टाइम से की थी और बाद में अमर उजाला में काम करने लगे थे। इस तरह की कई गलत बातें उस वीडियो में बताई गई है।
उन पर लड़कियों के शोषण करने के भी आरोप लगाए गए हैं। वीडियो के ऊपर अंजना ओम कश्यप चित्रा त्रिपाठी के फोटो भी लगे हैं। इस तरह इन महिला पत्रकारों को भी इस विवाद में नाहक घसीटा जा रहा है। इन महिला पत्रकारों को सामने आकर सच बताना चाहिए नहीं तो यह समझा जाएगा कि वे अजीत अंजुम के खिलाफ हैं।
आजकल जिस तरह से सोशल मीडिया पर एक दूसरे का चरित्र हनन किया जा रहा है ट्रालिंग की जा रही है उसे पूरा माहौल भी विषाक्त हो गया है। अब कोई आदमी किसी की भी इज्जत उतार सकता है।
अजीत अंजुम ने उस यूट्यूब चैनल को कानूनी नोटिस भेजा है और उनके खिलाफ मुकदमा करने की बात कही है। जिस व्यक्ति ने यूट्यूब चैनल पर ये अनर्गल बात कही है वह व्यक्ति आईएमसी का छात्र रह चुका है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आईएमसी जैसे संस्थान से कैसे कैसे लोग पत्रकार बन रहे हैं। यह पत्रकारिता का दुरुपयोग है। हम अपने मन की भड़ास निकालने के लिए इस माध्यम का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं लेकिन हमारे साहित्यकार भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक दूसरे के खिलाफ जमकर कर रहे हैं और चरित्र हनन कर रहे हैं।
अजीत अंजुम आजकल साहसिक पत्रकारिता कर रहे हैं। हम सबको उनका साथ देना चाहिए। आखिर इतने साल बाद इस तरह के वीडियो बनाने का क्या मतलब।
अजित अंजुम को discredit करना, यह बता रहा कि सरकार समर्थक लोग ऐसे पत्रकारों को बदनाम कर जनता में उनकी विश्वसनीयता को खत्म करना चाहते हैं।
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