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उत्तर प्रदेश

पीलीभीत पत्रकार प्रकरण : प्रेस काउंसिल ने गृह सचिव, डीएम और एसपी को भेजा रिमाइंडर!

निर्मल कांत शुक्ल-

उत्तर प्रदेश की जनपद पीलीभीत के पत्रकार पर फर्जी मुकदमे के प्रकरण में यूपी के गृह सचिव, डीएम-एसपी सहित छह प्रतिवादियों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को ढाई माह का समय बीतने के बाद भी नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। सिर्फ और सिर्फ सात प्रतिवादियों में से एकमात्र जिला महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश कुमार ने ही नोटिस का जवाब भेजा।

प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने नोटिस का जवाब न दिए जाने को भी गंभीरता से लिया है। पीसीआई ने अब उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव संजय प्रसाद, जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा, कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक नरेश त्यागी, कोतवाली के उप निरीक्षक/विवेचक रमेश चंद्र शर्मा को समयबद्ध स्मरण पत्र (रिमाइंडर) जारी किया है।

स्मरण पत्र में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के अवर सचिव (शिकायत) मेजर अपूर्व चित्तौड़िया ने पत्रकार सुमित सक्सेना की शिकायत में पक्षकार बनाए गए अधिकारियों से कहा है कि 29 अगस्त 2024 को भेजे गए नोटिस में परिषद ने संबंधित प्रकरण में लिखित वक्तव्य प्रेषित करने को कहा था, किंतु लिखित वक्तव्य अभी तक प्रेषित नहीं किया गया। इस समय बद्ध स्मरण पत्र के द्वारा पुनः अनुरोध है कि प्रकरण में अपना लिखित वक्तव्य दो सप्ताह के अंदर प्रेषित करें अन्यथा इस प्रकरण को आपके उत्तर के बिना ही सुनवाई के लिए जांच समिति के सम्मुख रख दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि जिला महिला चिकित्सालय (सम्बद्ध स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय) की अव्यवस्थाओं व मरीजों की अनदेखी कर उनसे अमानवीय व्यवहार किए जाने की खबरों के प्रकाशन से क्षुब्ध होकर बरेली से प्रकाशित सांध्य दैनिक समाचार पत्र 2 टूक के संवाददाता सुमित कुमार पर सदर कोतवाली में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की ओर से फर्जी मुकदमा दर्ज कराए जाने को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने बेहद गंभीरता से लिया था।

पक्षकार अधिकारियों को जारी नोटिस में चेयरमैन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने संवाददाता की शिकायत पर विचार करने के उपरांत टिप्पणी की थी कि प्रकरण प्रेस की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण/कुठाराघात का प्रतीत होता है। नोटिस में 2 सप्ताह के भीतर अपना लिखित वक्तव्य प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था।

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