हरियाणा सरकार के पाइलट को डीजीसीए ने किया सस्पेंड

कैप्टन डी एस नेहरा पर लापरवाही और धोखाधड़ी के चलते हुई कार्यवाही

दिल्ली 2 दिसम्बर : हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ पाइलट कैप्टन डी एस नेहरा को भारत सरकार के नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) ने हाल ही में लापरवाही और धोखाधड़ी के संगीन आरोपों की जाँच के बाद सस्पेंड कर दिया। नेहरा पर आरोप था की उन्होंने नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए मार्च 2019 में एक नहीं दो बार ऐसी अनियमित्ताएं की जिसकी सज़ा केवल निलम्बन ही है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, क्योंकि नेहरा के बड़े भाई डीजीसीए में एक उच्च पद पर तैनात थे इसलिए उनपर किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं की गई।

ग़ौरतलब है कि कैप्टन डी एस नेहरा ने 27 व 29 मार्च 2019 को सरकारी हेलीकॉप्टर पर अवैध ढंग से टेस्ट फ्लाइट भरी। ऐसा उन्होंने सिंगल (अकेले) पायलट के रूप में किया और उड़ान से पहले के दो नियामक ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट (शराब पीए होने का पता लगाने के लिए सांस की जांच) भी खुद ही कर डाली। एक अपने लिए और दूसरी, राज्य सरकार के एक पाइलट कैप्टन दिद्दी के लिए, जो कि उस दिन उनके साथ पिंजौर में मौजूद भी नहीं थे।

डीजीसीए की जाँच में यह भी पता चला कि कैप्टन नेहरा ने कैप्टन दिद्दी के फर्जी दस्तखत भी किए। इस घटना के दो दिन बाद ही कैप्टन नेहरा ने एक बार फिर ग्राउंड रन किया और फिर से सिंगल पायलट के रूप में राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर की मेनटेनेंस फ्लाइट भी की।

इस बार उन्होंने उड़ान से पहले होने वाले नियामक और आवश्यक ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट नहीं किया, बल्कि उस टेस्ट को उड़ान के बाद किया। जोकि नागरिक उड्डयन की निर्धारित आवश्यकताओं (सीएआर) का सीधा उल्लंघन है। इस बार भी उन्होंने फर्जीवाड़ा करते हुए, कैप्टन पी के दिद्दी के नाम पर प्री फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर एक्जामिनेशन किया और रजिस्टर पर उनके फर्जी हस्ताक्षर भी किए, क्योंकि उस दिन भी कैप्टन दिद्दी पिंजौर में नहीं थे। वे मोहाली में डीजीसीए के परीक्षा केंद्र में एटीपीएल की परीक्षा दे रहे थे।

इस गम्भीर उल्लंघन के प्रमाण को एक शिकायत के रूप में डीजीसीए को भेजा गया, लेकिन मार्च 2019 से इस मामले में डीजीसीए ने 26 नवम्बर 2020 को निर्णय लेते हुए कैप्टन नेहरा को सस्पेंड कर दिया।

नेहरा की राज्य सरकार में नियुक्ति के समय दिए गए नियमों के तहत, किसी भी तरह की ग़ैर ज़िम्मेदाराना कृत्य या लापरवाही के चलते इनको सेवा से निलम्बित किया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि राज्य सरकार के अतिविशिष्ठ व्यक्तियों की हवाई यात्रा के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे लापरवाह पाइलट के साथ क्या होता है?

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