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प्रधानमंत्री का हिन्दुत्व कार्ड खेलना और टेलीग्राफ का शीर्षक, ‘हे नमो !’

काश हिन्दी के किसी अखबार में ऐसी रचनात्मकता और रीढ़ होती

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल वर्धा में हिन्दुओं के प्रतिनिधि की तरह बात की और अपने विरोधी व प्रतिद्वंद्वी राहुल गांधी के अमेठी के साथ वायनाड से भी चुनाव लड़ने पर टिप्पणी करते हुए कहा, जहां हिन्दू अधिक हैं, वहां चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए वहां भागे जहां बहुतायत में अल्पसंख्यक हैं। यही नहीं, समझौता ट्रेन ब्लास्ट के मुख्य अभियुक्त असीमानंद समेत अन्य को बरी कर दिए जाने के संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस को हिन्दू आतंकवाद पर घेरा और पूछा, इतिहास में कभी ऐसी कोई घटना है क्या? कांग्रेस ने देश के करोड़ों लोगों पर हिन्दू आतंकवाद का कलंक लगाने की कोशिश की है, इन्हें सजा देना जरूरी है (नवभारत टाइम्स)। उन्होंने कांग्रेस पर “हिन्दू आतंकवाद” शब्द गढ़ने का आरोप भी लगाया। इसके जवाब में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि यह भाजपा नेता और प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडलीय सहयोगी आरके सिंह का गढ़ा हुआ है और तब गढ़ा था जब वे गृहसचिव थे (नवोदय टाइम्स)।

कहने की जरूरत नहीं है कि प्रधानमंत्री का यह भाषण बेहद आपत्तिजनक और अनैतिक है। इसमें तथ्यों की भी गलती है और “हिन्दू आतंकवाद” के मामले में पकड़े गए लोगों के साथ पक्षपात और उन्हें बचाने की बेशर्म कोशिश भी है। निश्चित रूप से यह उन एजेंसियों के लिए संकेत है जिसे मामले की जांच करनी है और दोषियों को सजा दिलाना है। इस मामले में तथ्य यह है कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले के सभी अभियुक्त बरी किए जा चुके हैं और गृहमंत्री राजनाथ सिंह कह चुके हैं कि इस मामले में सरकार अपील नहीं करेगी। फैसले में जज ने लिखा है कि एनआईए ने ठीक से जांच नहीं की और सबसे महत्वपूर्ण सबूत पेश नहीं किया। सरकार की चिन्ता यह होनी चाहिए इस मामले में अभियुक्त नहीं पहचाने जा सके और किसी को सजा नहीं हुई। पर सरकार के मुखिया राजनीति कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस ने गलत लोगों को अभियुक्त बनाया। अगर ऐसा हुआ हो तो यह भी गलत है और इसके लिए भी कार्रवाई होनी चाहिए – पर वह तो मुद्दा ही नहीं है।

हमेशा की तरह इस मामले को सबसे अच्छी तरह अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ ने छापा है। अखबार ने बताया है कि एक भाषण में 13 बार हिन्दू और हिन्दू आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया गया। अखबार ने आज की अपनी खबर का शीर्षक, हे राम की तर्ज पर हे नाम लगाया है और छोटे अक्षर से नाम को नमो कर दिया है जो अंग्रेजी में नरेंद्र मोदी का संक्षिप्त नाम है। हिन्दी अखबारों से ऐसी कोई अपेक्षा नहीं की जा सकती है। अखबार ने यह भी लिखा है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता है पर आपने पूछा है तो स्वतंत्र भारत के सबसे जघन्य हिन्दू आतंकवादी को मत भूलिए। इसके नीचे एक व्यक्ति की श्वेत-श्याम तस्वीर है। कैप्शन है, नाथू राम गोड्से जिसने महात्मा गांधी की हत्या की। मैं इस समय के ‘हिन्दुओं’ के बारे में नहीं जानता क्योंकि मैं वैसा हूं नहीं पर बचपन में दादा जी ने बताया था कि जिस दिन महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, उन्होंने ग़ुस्से और तकलीफ़ में अपना जनेऊ निकाल कर फेंक दिया था कि कैसा ब्राम्हणत्व जो ऐसी हत्या करे।

यह सूचना प्रधानमंत्री को भी नहीं मिली है

इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर पहले पन्ने पर टॉप बॉक्स है। दो कॉलम में चार लाइन का शीर्षक है, “कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद शब्द गढ़ा … अब वहां वोट चाहती है जहां बहुसंख्यक कम हैं : प्रधानमंत्री”। वर्धा डेटलाइन से विवेक देशपांडे की खबर कहती है, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनावी भाषण में सोमवार को पहली बार कांग्रेस पर हमला बढ़ाने के लिए समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के अभियुक्तों को रिहा किए जाने का संदर्भ रहा। कांग्रेस पर “हिन्दू आतंकवाद” शब्द गढ़ने और देश के बुनियादी स्वभाव को खराब करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने दुनिया की नजर में हिन्दुओं की छवि खराब करके उन्हें अपमानित करने का गंभीर पाप किया है। रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने हिन्दू जागरण का जिक्र किया और कहा, जिसको उन्होंने आतंकवादी कहा है वो अब जाग चुका है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वायनाड से भी चुनाव लड़ने के निर्णय को उन्हें बहुसंख्यकों के प्रभुत्व वाले क्षेत्र से भागना और उन क्षेत्रों में शरण लेना कहा जहां बहुसंख्यकों की आबादी कम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहे जितना दौड़ ले उसे उसके पापों के लिए कभी माफ नहीं किया जाएगा। अखबार के मुताबिक समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में अभियुक्तों की रिहाई के संदर्भ में उन्होंने कहा, कुछ दिन पहले अदालत ने फैसला दिया जिससे देश के समझ कांग्रेस की साजिश का पर्दाफाश हुआ। …. भाइयों और बहनों क्या कांग्रेस को माफ किया जा सकता है? उन्होंने कहा, …. कांग्रेस ने बहुत बड़ा पाप किया है।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस खबर के साथ रीयलिटी चेक (वास्तविकता की जांच) : अजमेर कनविक्शन (दोषसिद्धी), एटीएस चार्ज शीट अंदर के पन्ने पर होने की सूचना दी है। अंदर बताया है कि इस मामले में वास्तविक स्थिति क्या है। इसमें बताया गया है कि अदालत ने भले ही अभियुक्तों को रिहा कर दिया पर वास्तविक स्थिति यह है कि अदालत ने इसके लिए एनआईए की खिंचाई की है और कहा है कि एनआईए सबसे मजबूत सबूत ही अदालत में पेश करने में नाकामयाब रही, साथ ही मामले की जांच में भी कई लापरवाही बरती गई। केन्द्रीय जांच एजेंसी एनआईए की खिंचाई करते हुए कहा कि ‘वह गहरे दुख और पीड़ा के साथ यह (अभियुक्तों को बरी) कर रहे हैं, क्योंकि एक नृशंस और हिंसक घटना में किसी को सजा नहीं मिली।’ साल 2007 में हुए समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में अदालत ने चारों आरोपियों असीमानंद, कमल चौहान, राजिंदर चौधरी और लोकेश शर्मा को बीती 20 मार्च को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। 28 मार्च को पंचकूला की विशेष अदालत का यह फैसला सार्वजनिक किया गया था।

यह खबर इंडियन एक्सप्रेस ने ही छापी थी और मैंने इस बारे में 29 मार्च को लिखा भी था। 20 मार्च को फैसला सुनाए जाने के बाद (केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से) “यह पूछे जाने पर कि क्या अभियोजन पक्ष इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगा, उन्होंने कहा नहीं, सरकार को क्यों अपील करना चाहिए? इसका कोई मतलब नहीं है। राजनाथ सिंह ने इस मामले में नए सिरे से जाँच को भी ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “एनआईए ने इस मामले की जाँच की। इसके बाद ही उसने आरोप पत्र दाखिल किया। अब जबकि कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुना दिया है, उस पर भरोसा किया जाना चाहिए।”

मैंने लिखा था, उम्मीद है राजनाथ सिंह अब इसपर पुनर्विचार करेंगे। लेकिन हुआ उल्टा। प्रधानमंत्री ने भी शुरुआती खबर को ही सच मान लिया है और वे भी किसी अपील के बारे में विचार करते नहीं लगते हैं और कांग्रेस की निन्दा करने के लिए हिन्दुओं के बचाव में लग गए हैं। मुझे नहीं पता यह कानूनन गलत है कि नहीं या पहले की तरह चुनाव आयोग की नजर में एएनआई की फीड का उपयोग करने के कारण सरकारी संसाधन के दुरुपयोग का मामला न बने पर अनैतिक तो है ही। विपक्ष ने इसपर एतराज किया है और इंडियन एक्सप्रेस ने इसे भी (अंदर के पन्ने पर) प्रमुखता से जगह दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को पहले पन्ने से पहले के अपने अधपन्ने पर छापा है। शीर्षक है, इतिहास कहता है, “एक भी हिन्दू आतंकवाद में शामिल नहीं रहा : प्रधानमंत्री”। चार कॉलम, दो लाइन के शीर्षक वाली इस खबर के साथ अखबार ने एक कॉलम में कांग्रेस का पक्ष भी छापा है। इसका शीर्षक है, “कांग्रेस ने कहा मोदी घृणा फैला रहे हैं”। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है अंदर के पन्ने पर विस्तार से है। इसे संतुलित करने के लिए एनसीपी का पक्ष और राहुल गांधी की फोटो तो है पर भाषण की तथ्यात्मक गलतियों को पाठकों के लिए सुधारा नहीं गया है।

हिन्दी अखबारों में दैनिक भास्कर में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। दैनिक जागरण में भी यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। हिन्दुस्तान में इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, “प्रधानमंत्री बोले शांतिप्रिय धर्म को विपक्ष ने आतंकवाद से जोड़ा”। मुख्य शीर्षक है, “मोदी के हिन्दू कार्ड पर कांग्रेस का पलटवार”। वर्धा / हैदराबाद डेटलाइन से यह एजेंसियों की खबर है। इसके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव से 10 दिन पहले हिन्दू कार्ड खेला। महाराष्ट्र के वर्धा में सोमवार को मोदी ने कहा, “कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद शब्द का प्रयोग कर देश के करोड़ों लोगों को कलंकित किया है। कांग्रेस ने इसपर पलटवार किया। पार्टी नेता मनीष तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी सभा में धर्म के आधार पर बात कर लोकतंत्र का अपमान किया है।

इंटरनेट पर यही शीर्षक, नवजीवन अखबार का भी है। खबर में कहा गया है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अमेठी के साथ केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने के फैसले पर निशाना साधने के दौरान पीएम मोदी द्वारा हिंदू कार्ड खेलने की कोशिश पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि पीएम मोदी को न भूगोल की जानकारी है, न इतिहास की, न स्वतंत्रता संग्राम की और न इस देश की गंगा-जमुनी तहजीब की। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पीएम मोदी भारत की बहुलतावादी, विभिन्न भाषा, वेश-भूषा, धर्म-संस्कृति और संस्कारों के गुलदस्ते की जगह अपने छोटे राजनैतिक उद्देश्यों के लिए पूरे देश में नफरत के कांटे बोना चाहते हैं।

नवभारत टाइम्स में यह खबर लीड है और शीर्षक, “हिन्दू आतंकवाद पर घेरा मोदी ने”। उपशीर्षक है, “पूछा इतिहास में कभी कोई घटना है क्या”? नवोदय टाइम्स ने इस खबर को सिंगल कॉलम से कुछ ज्यादा में छापा है। शीर्षक है, “कांग्रेस ने हिन्दुओं पर लगाया आतंकवाद का ठप्पा : मोदी”। अखबार ने इसके साथ ही मनीष तिवारी की फोटो के साथ उनका जवाब छापा है। शीर्षक है, हिन्दू आतंकवाद पर आरके सिंह से सवाल करें मोदी : कांग्रेस। अमर उजाला में यह खबर छोटी सी है। शीर्षक है, कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी से हिन्दुओं को किया बदनाम। आमने सामने में इस खबर के साथ राहुल गांधी की चुनावी घोषणाएं हैं। इसपर कांग्रेस का जवाब नहीं। राजस्थान पत्रिका में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है।

परिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट।

https://www.youtube.com/watch?v=TOvti1XdDVY
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