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‘नकली राष्ट्रवाद’ की पीठ पर बैठ सरपट दौड़ते बाजारवाद के लिए मुख्यधारा की मीडिया रास्ता प्रशस्त कर रही!

बनारस : वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय ने कहा कि हमें अपनी प्रतिबद्धता और मूल्यों के प्रति सजग रहने की जरूरत है. यदि ऐसा नहीं किए, तो आने वाली पीढ़ी जब हिसाब मांगेगी तो उसे हम क्या जवाब देंगे. समाजवादी नेता प्रभुनारायण सिंह की 99वीं जयन्ती पर “राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता एवं मूल्यों में गिरावट का संकट” विषय पर पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि बिना विचारधारा के राजनीति संभव नहीं है. टेक्नोलाजी के विकास ने अब अनेक संभावनाओं के दरवाजे खोल दिए हैं. अब लम्बे संघर्ष से नहीं बल्कि त्वरित क्रांति होगी.

उन्होंने कहा कि देश के समक्ष व्याप्त वर्तमान संकट का समाधान हमें खोजना होगा. इसके लिए सोशल मीडिया जैसे हथियार का खूबसूरती से इस्तेमाल करने की कला हमें सीखनी पड़ेगी. महात्मा गांधी की चर्चा करते हुए कहा कि सत्याग्रह व असहयोग आन्दोलन जैसे जिस हथियार का गांधी ने स्वतंत्रता आन्दोलन में प्रयोग किया था, उसे दक्षिण अफ्रीका में सफलता पूर्वक वो अजमा चुके थे.

बनारस में पराड़कर भवन में आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय.

जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय (छपरा, बिहार) के कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने कहा कि प्रभुनारायण जी वैचारिकी के श्रोत थे. कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया में भारत राष्ट्रवाद व राष्ट्रीयता का परचम लहरा रहा है.

प्रोफेसर हरिकेश सिंह का भाषण वैसे तो हम लोगों ने अनेक बार बनारस में सुना है. लेकिन प्रोफेसर सिंह के कुलपति बनने के बाद पहली बार मुझे उनका भाषण सुनने का मौका मिला. और, उनके भाषण से स्पष्ट हो गया कि कोई कुलपति बोल रहा है. यह “पद और व्यक्ति” की गरिमा का सवाल है.

वामपंथी चिंतक प्रोफेसर दीपक मल्लिक ने कहा कि पूंजीवाद और क्रोनी कैप्टलिज्म के युग में जो लोग नैतिकता और मूल्यों की तलाश कर रहे हैं, वो भुलावे में जी रहे हैं. नैतिकता और मूल्यों की पीठ पर सवार होकर ही बाजारवाद आता है. और उसके आने का रास्ता भारत में 1991 में ही खोल दिया गया था जो अब “नकली राष्ट्रवाद” की पीठ पर बैठकर सरपट दौड़ रहा है. मुख्यधारा की मीडिया उसके लिए रास्ता प्रशस्त कर रही है. उन्होंने कहा कि वैचारिक विविधता ही लोकतंत्र की खूबसूरती है.

प्रारम्भ में विषय की स्थापना प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप ने की. अरविन्द सिंह ने अपने पिता प्रभुनारायण जी से सम्बन्धित अनेक संस्मरणों की विस्तार से चर्चा की. परिचर्चा में पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल, पूर्व मेयर रामगोपाल मोहले, विजय शंकर पांडेय, समाजवादी चिंतक विजयनारायण, राधेश्याम सिंह, संजीव सिंह, डा. सूबेदार सिंह, महेशानंद, शिवकुमार सिंह, सुरेश प्रताप आदि ने भी विचार व्यक्त किए. संचालन पत्रकार प्रदीप कुमार व धन्यवाद प्रकाश कुंवर सुरेश सिंह ने किया.

बनारस से वरिष्ठ पत्रकार सुरेश प्रताप सिंह की रिपोर्ट.

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