नोएडा। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) नोएडा यूनिट ने एनसीआर में उद्यमियों और बिल्डरों से रंगदारी वसूलने के आरोप में वांछित आरोपी राजीव शर्मा को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को पत्रकार बताकर झूठी शिकायतें दर्ज कराता और बाद में दबाव बनाकर बड़ी रकम वसूलता था।
एसटीएफ के अनुसार, राजीव शर्मा सेक्टर-12 नोएडा का निवासी है और लंबे समय से पत्रकारिता के नाम पर अवैध उगाही कर रहा था। आरोपी एपीएन न्यूज़ चैनल से जुड़ा रहा है, इसके अलावा साधना न्यूज़, एस-वन और अन्य छोटे चैनलों में भी काम कर चुका है।
इससे पहले एसटीएफ ने इसी गिरोह के तीन अन्य सदस्यों — अंकुर गुप्ता (52) निवासी दरियागंज दिल्ली, नरेंद्र धवन और उसका बेटा हरनाम धवन, निवासी शास्त्रीनगर सराय रोहिला, दिल्ली — को गिरफ्तार किया था। इनके पास से चार मोबाइल फोन, ₹62,720 नकद, एक अमेरिकी डॉलर, फर्जी आधार कार्ड और 17 डाक रसीदें बरामद की गई थीं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले तीन वर्षों में दिल्ली-एनसीआर के करीब 25 से अधिक बिल्डरों से पाँच करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। इन लोगों ने साया बिल्डर से पहले 15 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी, जो बाद में घटाकर पाँच करोड़ की गई। गिरोह ने पाँच लाख रुपये से अधिक की रकम पहले ही वसूल कर ली थी और शेष राशि के लिए दबाव बना रहा था।
अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र ने बताया कि आरोपी गिरोह उद्यमियों और बिल्डरों के खिलाफ ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग, जीडीए, रेरा और ईओडब्ल्यू जैसे विभागों में निराधार शिकायतें दर्ज कराता था। बाद में उन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर खबरें चलाकर पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था। कारोबारी अपनी साख और छवि बचाने के लिए रंगदारी देने को मजबूर हो जाते थे।
एसटीएफ अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और मीडिया संस्थानों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
ये कभी मेरा मित्र हुआ करता था। पांडित्य का ढोंग करके लोगों को ख़ुद से जोड़ता था और फिर उनसे पैसे उधार माँग कर हड़प लेता था। दो तीन लाख के चपेटे में जब मैं आ गया तो इसकी कहानी भड़ास पर छापकर इसे नमस्ते कर लिया। मैंने कई मित्रों से भी इसे पैसे दिलवाए थे। कई बरस हो गए इससे बातचीत बंद किए हुए। आज खबर मिली कि इसे एसटीएफ ने अरेस्ट कर लिया। पैसे के लालच में ये ब्लैकमेलिंग और उगाही का मास्टरमाइंड बन गया था। सबसे मजेदार ये है कि इसके आगे पीछे कोई नहीं है। न बीवी है न बच्चे हैं। फिर भी ये पैसे के लिए पागल रहता था। आखिरकार इसके पाप का घड़ा भर ही गया। – यशवंत सिंह

राजीव शर्मा से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
पत्रकारिता के इस ‘प्रोफेशनल बेगर’ को पहचान लीजिए


