पत्रकारिता के इस ‘प्रोफेशनल बेगर’ को पहचान लीजिए

Yashwant Singh : (पार्ट-1) यह राजीव शर्मा है. यह शख्स पत्रकारिता में है. सहारा, साधना, न्यूज24 समेत कई न्यूज चैनलों में नौकरी कर चुका है. अपनी सनकपन और धूर्तता के कारण यह अक्सर बेरोजगार ही रहता है. इसका प्रिय शगल है अपने सबसे करीबी की जेब काट लेना. वो भांति भांति की मजबूरियां-दिक्कतें बताकर कर्ज के रूप में पैसे लेता रहता है और जब उसे लगता है कि सामने वाला अब उसे उधार नहीं देगा तो वह रिश्ता तोड़कर गायब हो जाता है. जब उससे उधारी लौटाने की बात की जाती है तो वह फोन उठाना बंद कर लेता है या फिर जवाब ही नहीं दता है. इसके चक्कर में मैं भी बुरी तरह फंसा और कई साल तक इसे उधार देता रहा.

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यह राजीव शर्मा जब बेरोजगार था तो मकान किराया चुकता करने के लिए पैसे मांगता था। इसकी मदद मैं खुद तो करता ही था, दूसरों से भी कराता था। Prasoon Shukla और Sheetal P Singh जी से भी पैसे दिलवाए। मैंने एटीएम कार्ड तक दे दिया था, ये कह कर कि ज़रूरत के हिसाब से निकाल लिया करो। हां, ये क्लीयर कर दिया था, उधार दे रहा हूँ, नौकरी मिलते ही लौटा देना।

नौकरी मिली। ऑप्शन यहां तक दिया कि हर महीने हजार दो हजार ही लौटाते रहो ताकि मुझे ये फील होता रहे कि तुम लौटा रहे हो। पर यह ‘प्रोफेशनल बेगर’ लौटाना तो छोड़िए, मेरे मित्रों से चुपके से उधार लेता रहा और उनको भी लौटाने के नाम पर अंगूठा दिखाता रहा। इंदौर से लेकर इलाहाबाद तक के दर्जनों लोगों को इसी तरह चूना लगा चुका है। ये गर्व से कहता है- ”सच्चा पंडित कभी भूखा नहीं मर सकता”। सही कहता है भाई, नौकरी करते हुए भी उधार मांगते रहने की जो कला जानता हो वो कैसे भूखा मर सकता है। भूखे तो वो मरेंगे जो करुणावान हैं, जो दूसरों का दुख देख कर पैसे उधार दे देते हैं लेकिन जब मुश्किल पड़ने पर वापस मांगते हैं तो कोरे आश्वासन और झूठे वादे पाते हैं।

इस चोटी दाढ़ी वाले राजीव शर्मा से सावधान रहिएगा। दोस्ती ये इसलिए करता है ताकि उधार मांग सके। उधार तब तक ये मांगेगा जब तक आपकी देने की औकात रहेगी। हर बार बिल्कुल नया बहाना होगा और एक बहाने पर कई लोगों से उधार मांग लेगा। जब आप लौटाने की बात करेंगे तो या तो फोन उठाना बन्द कर देगा या आपसे झगड़ने लगेगा। खुद को नंगा घोषित कर देगा, ले सको तो ले लो टाइप।

इसको दर्जनों बार हजार दो हजार इसलिए देता रहा कि बेरोजगार है। इस पैसे को उधारी में गिना भी नहीं। खिलाना पिलाना टहलाना पर खर्च गिना नहीं। पर जो उधार के नाम पर लिए हो, वो तो लौटा दो। ये काफी समय से न्यूज़24 के डिजिटल विंग में है, लेकिन खुद से कभी पैसे लौटाने का नाम नहीं लिया। आज दस हजार रुपए ट्रांसफर करने का वादा किया था इसने। अब बोल रहा है- ”मेरे पास क्या, न देने को पैसा, न कहने को शब्द, न दिखाने को कोई दृश्य… नंगा क्या नहायेगा क्या निचोड़ेगा!”

मतलब साफ है। मेरे पैसे डूब गए।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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महिला पत्रकार और बीएसएफ इंस्पेक्टर को भी चूना लगा चुका है ठग पत्रकार राजीव शर्मा!

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Comments on “पत्रकारिता के इस ‘प्रोफेशनल बेगर’ को पहचान लीजिए

  • सुधीर मिश्रा says:

    ऐसे कई राजीव शर्मा कइयों को चूना लगाते घूम रहे हैं मिडिया में। एक शाहिद साहब हैं जो उधार में हजारों, लाखों लेकर फ्लैट तक खरीद चुके हैं और माँगने पर बहाने बनाने लगते हैं।

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