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आयोजन

अफसर से विधायक बने राजेश्वर सिंह ने ये अदभुत काम कर दिया…

यशवंत सिंह-

मैंने अपने जीवन में कई दफे लंगर में खाया है. अमर उजाला ने जब बनारस से आगरा ट्रांसफर किया था तो एक मित्र अनिल मिश्रा बाबा अपने स्कूटर पर बिठाकर अक्सर लंगर खिलाने ले जाते थे. सिर पर रुमाल बांध हम लोग पंगत में बैठते और भोजन करते. पूरा माहौल बेहद सकारात्मक उर्जा से भरा हुआ. ट्रक चालकों की बड़ी संख्या यहां भोजन करती क्योंकि ये लंगर हाईवे के किनारे वाले गुरुद्वारे में था. बहुत से गरीब लोग यहां भोजन करते दिखते.

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सिखों का ये लंगर कानसेप्ट मुझे बहुत अच्छा लगता है. कोई भूख से नहीं मरेगा. यहां भोजन करने आने वालों के जूता-चप्पल और बर्तन तक साफ करते बहुत सारे सिख लोग दिख जाते हैं. इनमें कोई अहंकार नहीं. बड़े बड़े घरों के लोग ये काम करते हैं, श्रद्धा भाव से, सेवा भाव से.

तबसे अक्सर सोचा करता हूं कि हिंदू धर्म में ये लंगर वाला कांसेप्ट क्यों नहीं है. हिन्दू भंडारा करते हैं. लेकिन कोई आदमी केवल भंडारा खाकर जिंदा नहीं रह सकता क्योंकि भंडारा रोज रोज नहीं बल्कि कभी कभार होता है… सिख धर्म की तरह अगर सभी धर्म अपने अपने यहां सुबह-शाम वाला लंगर चालू कर दें तो कोई भूख से न मरे. कम से कम भोजन की चिंता करने की किसी को जरूरत न पड़े. ये अदभुत किस्म का समाजवाद होगा.

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धरती पर जन्मे हो तो भूखे न मरोगे, ये गारंटी धर्मों ने कर दी है, या सरकारों ने कर दी है, या कुछ अच्छे आदमियों ने कर दी है… ऐसा हो जाए तो ये बात कितनी गर्व वाली हो. कितने भी काहिल हो, कितने भी अशक्त हो, कितने भी कामचोर हो, कितने भी दुखी हो… भोजन तो मिलेगा ही. ये गारंटी हो तो कितना बढ़िया हो.

इस कांसेप्ट को अमल में लाना चाहिए क्योंकि भूख से मौत मनुष्यता की विकास यात्रा पर अब तक का सबसे बड़ा तमाचा है. हम इतने तरक्की कर लिए, इतने आगे निकल गए लेकिन कइयों को हम भूख से मरने से बचा न पाते हैं. ऐसे में ये सारी तरक्की ये सारा विकास बेकार लगता है.

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हर धर्म में लंगर हो और ये सुबह-शाम दोनों वक्त चालू रहे, यानि सुबह शाम हर रोज फंक्शनल हो, हफ्ते में किसी एक बेला या किसी एक दिन का ब्रेक लिया जा सकता है. सिख धर्म ये लंगर वाला कांसेप्ट देकर मेरे दिल में बहुत बड़ा जगह बना चुका है. हिंदू धर्म में भी अब इसे शुरू कर देना चाहिए. और नई खबर है कि ये शुरुआत एक लेवल पर हो गई है. ये बड़ा काम लखनऊ से शुरू हो चुका है.

लखनऊ के एक विधायक राजेश्वर सिंह ने ये अदभुत काम कर दिया है. उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र सरोजिनी नगर में रोजाना दो हजार लोगों के लिए सुबह शाम के लंगर की व्यवस्था कर दी है. इसका नाम ‘तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’ रखा है. ये काम उन्होंने अपनी माता जी के नाम पर शुरू किया है और उनकी प्रेरणा से किया है. मानवता के लिए इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता. लखनऊ मैं अब जब भी गया तो एक टाइम यहां खाने जाऊंगा और देखूंगा कि ये कैसे संचालित हो रहा है और क्या कुछ ऐसा ही मेरे जिले गाजीपुर में भी हो सकता है. कल अठारह जुलाई को इसका उदघाटन हुआ. स्थानीय अखबारों ने इसे कवर किया है.

राजेश्वर सिंह पहले अफसर थे. प्रवर्तन निदेशालय के धाकड़ अफसर. ब्लैक मार्केटियरों, हवाला कारोबारियों, देश विरोधी तत्वों को सबक सिखाने के कई रिकार्ड इनके नाम हैं. अब राजनीति में उतरे हैं तो जीवन का मकसद सिर्फ और सिर्फ जनसेवा बना चुके हैं. धार्मिक प्रवृत्ति के राजेश्वर एमएलए भले ही बीजेपी से हैं, लेकिन उनके कई काम उन्हें हर दल से उपर ले जाते हैं. जाहिर है, उनके द्वारा शुरू की गई ‘तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’ की भोजन सुविधा को हर दल के भूखे पेट वाले लोग उठाएंगे. तो इसलिए उनकी तारीफ करने की जरूरत है और हर एक सांसद विधायक से ये मांग करने की आवश्यकता है कि वे भी अपने अपने यहां कुछ ऐसा ही शुरू करें ताकि पापी पेट की चिंता न रहे किसी को. काश, हर राज्य की सरकारें हर जिला मुख्यालय में एक इसी किस्म की नि:शुल्क रसोई की सुविधा शुरू कर दे तो कितना अच्छा रहे.

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