विक्रांत पाटिल-
मुंबई | मुंबई हाई कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने टीवी पत्रकारिता की भाषा और सीमाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया। जस्टिस Milind Jadhav ने Republic TV और उसके एडिटर Arnab Goswami को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा—
“हद पार मत करो! खबरें दिखाओ, आलोचना करो, लेकिन किसी की इज्जत को सरेआम मिट्टी में मत मिलाओ।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उद्योगपति Anil Ambani द्वारा दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है। अंबानी ने आरोप लगाया है कि Republic TV लगातार उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांचों से जोड़कर प्रसारण कर रहा है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।
याचिका में कहा गया कि अंबानी नवंबर 2019 में ही Reliance Communications के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके हैं, इसके बावजूद चैनल उन्हें बार-बार इन मामलों से जोड़ता रहा।
कोर्ट में क्या हुआ?
अंबानी की ओर से पेश वकील एडवोकेट मयूर खांडेपारकर ने अदालत को बताया कि चैनल ने प्रसारण के दौरान अंबानी के लिए “फाइनेंशियल स्कैम का मास्टरमाइंड”, “धोखेबाज”, “मनी लॉन्डरर” और “फर्जी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए जस्टिस मिलिंद जाधव ने कहा—
- “अपनी भाषा पर काबू रखो।”
- “भड़काऊ और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल मत करो।”
- “खबर दिखाना और किसी को नीचा दिखाना—दो अलग बातें हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत मीडिया की स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगा रही, लेकिन मर्यादा और जिम्मेदारी जरूरी है।
सख्त चेतावनी और उदाहरण
अदालत ने साफ चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसे मामले सामने आए, तो सख्त आदेश जारी किए जाएंगे। जस्टिस जाधव ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में Shashi Tharoor से जुड़े मामले जैसी स्थिति उनकी अदालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने “Your goose is cooked” जैसे जुमलों के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह की भाषा पूरी तरह अनुचित है।
चैनल की दलील
चैनल की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने दलील दी कि चूंकि SEBI के आदेश में अंबानी का नाम दर्ज है, इसलिए उस पर टिप्पणी करना “फेयर कमेंट” के दायरे में आता है।
हालांकि अदालत ने इस तर्क को सीमित करते हुए कहा कि— “निष्पक्ष टिप्पणी का अधिकार, किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत छवि खराब करने का लाइसेंस नहीं है।”
अब आगे क्या?
मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। तब तक Republic TV को अपना औपचारिक जवाब दाखिल करना होगा।
इस फैसले का व्यापक महत्व
यह मामला सिर्फ Anil Ambani और Republic TV के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह भारतीय टीवी पत्रकारिता के सामने खड़े एक बड़े सवाल को उजागर करता है— आक्रामक पत्रकारिता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के बीच सीमा कहां है?
अदालत ने साफ संदेश दिया—
- मीडिया स्वतंत्र है
- आलोचना करना उसका अधिकार है
- लेकिन भाषा की गरिमा और तथ्यात्मक संतुलन अनिवार्य है
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