पत्रकार रहे एमजे अकबर का भाजपा कोटे से जीतकर राज्यसभा जाना तय

झारखंड से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए दो जुलाई को मतदान होगा. इसमें भाजपा के उम्मीदवार प्रसिद्ध पत्रकार एमजे अकबर का सीधा मुकाबला मुख्य विपक्षी झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी से होगा. चुनाव में एमजे अकबर की जीत तय है. झारखंड विधानसभा के सचिव और राज्यसभा चुनावों के लिए निर्वाचन अधिकारी सुशील सिंह ने जानकारी दी कि नामांकन वापसी के आखिरी दिन यानि गुरुवार को किसी भी उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया है.

भाजपा की ओर से वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर विपक्षी दलों के साझा उम्मीदवार हाजी हुसैन अंसारी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं. भाजपा उसके सहयोगी आजसू को मिलाकर कुल 47 वोट हैं. एक वोट मनोनीत विधायक का भी है. हालांकि आजसू विधायक कमल किशोर भगत की सदस्यता समाप्त हो जाने के कारण भाजपा का एक वोट कम हो गया है. इधर, विरोधी दलों के पास 34 विधायक हैं. राज्य विधानसभा में विधायकों की दलगत स्थिति देखते हुए यहां से एमजे अकबर का जीतना सुनिश्चित माना जा रहा है.



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Comments on “पत्रकार रहे एमजे अकबर का भाजपा कोटे से जीतकर राज्यसभा जाना तय

  • मध्यप्रदश जनसंदेश के says:

    मध्यप्रदश जनसंदेश के डीटीपी कर्मचारियों का उत्पीड़न

    मध्यप्रदेश जनसंदेश के डीटीपी विभाग के कर्मचारियों को जून माह से ठेके पर डाल दिया गया है। ठेका भी उसे दिया गया है जो प्रबंधक अजय सिंह विश्ोन का खासमखास है। डीटीपी विभाग का ठेका मिलने से पहले इस शख्स के पास आईटी का ठेका भी है। आईटी ठेका मोटी रकम पर है, लेकिन आईटी विभाग में कार्यरत दो कर्मचारियों को मात्र कुछ रुपये ही दिए जाते हैं। दिन-रात हाठतोड़ मेहनत तो ये कर्मचारी करते हैं और मलाई ठेकेदार और विश्ोन खा रहे हैं। बताया जाता है कि अखबार के मालिकों को अंध्ोरे में रखकर प्रबंधक अजय सिंह विश्ोन बड़ा-बड़ा ख्ोल कर रहे हैं। एक पीड़ित कर्मचारी का आरोप है कि ठेके के नाम पर कमीशन बाजी हो रही है। चंूकि मालिकों महैर के बाबू साहब राममोहर सिंह मुन्ना सेठ और रेलवे के ठेकेदार राजेश कैला को अपने कामधाम से फुर्सत नहीं है, लिहाजा उन्होंने विश्ोन को अखबार की पूरी जिम्मेदारी सौंप रखी है। ऐसे में बंदर के हाथ अस्तूरा लग गया है। पावर और पैसे की चमक के आगे प्रबंधक अजय सिंह विश्ोन कर्मचारियों के उत्पीड़न पर उतर आए हैं। पिछले माल बिना नोटिस के बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छटनी करने वाले विश्ोन अब डीटीपी विभाग के कर्मचारियों के शोषण पर उतर आए हैं। बताया जाता है कि जो कर्मचारी पहले 12 हजार रुपये प्रतिमाह पाता था, उसे अब 9 से 1० हजार रुपये देने की बात हो रही है। ऐसे में बेरोजगारी से बचने के लिए कर्मचारी मजबूरी में काम कर रहे हैं। यदि मालिकों ने विश्ोन के काले कारनामों पर ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब काफी कुछ बिगड़ चुका होगा। हालांकि पिछले महीने जब कर्मचारियों की छटनी की गई थी, तो प्रबंधन द्बारा कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि अब वेतन में विलंब नहीं होगा, क्योंकि काफी कुछ पटरी पर आ गया है, लेकिन मई का वेतन भी लेट हो गया।

    एक कर्मचारी की पीड़ा

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