
शीतल पी सिंह-
RSS ने अमेरिका में अपनी ‘राष्ट्रवादी’ छवि चमकाने के लिए Squire Patton Boggs नाम की लॉ फर्म को हायर किया है। लेकिन असली खेल तो यह है कि यही फर्म पाकिस्तान के लिए वाशिंगटन DC में लॉबिंग करती है, और Jamal Khashoggi हत्याकांड में सऊदी क्राउन प्रिंस MBS को बचाने के काम में भी अपना योगदान कर चुकी है!
क्यों हायर किया? RSS के 100 साल पूरे होने पर US lawmakers को ‘शिक्षित’ करने के नाम पर। फोकस: RSS की ‘हिस्ट्री’ (जिसमें फासीवादी जड़ें और मुस्लिमों पर हिंसा के आरोप शामिल) को सफ़ेद करना और RSS को वाशिंगटन के पावर स्ट्रक्चर में ‘इंट्रोड्यूस’ करना। लॉबिस्ट्स ने Senate-House में घूम-घूम कर मीटिंग्स कीं, नागपुर में RSS कैंप अटेंड किया, और Vivek Sharma जैसे लॉबिस्ट्स को इन्वॉल्व किया।
कितना पैसा? 2025 के पहले 3 क्वार्टर्स में ही $330,000 (करीब ₹2.75 करोड़)! रजिस्ट्रेशन 16 जनवरी 2025 को हुआ। ध्यान दें: RSS खुद को ‘व्यक्तियों का संगठन’ बताकर टैक्स नहीं देता, लेकिन विदेश में इतना फंड कहाँ से आया ?
पाकिस्तान कनेक्शन: SPB पाकिस्तान सरकार के लिए डायरेक्ट लॉबिंग करती है – Trump era में Orchid Advisors के जरिए सबकॉन्ट्रैक्ट पर काम, मिनरल्स और US-Pak टाई-अप्स पर फोकस। RSS-पाकिस्तान: पुरानी जड़ें (जिन्ना-सावरकर लिंक) ?
सऊदी ट्विस्ट: यही फर्म Khashoggi मर्डर (2018) के बाद सऊदी की ‘रिपुटेशन रिस्टोर’ में लगी – 16 फर्म्स में से एक, MBS की इमेज बचाने के लिए। RSS का ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ को सऊदी अरब के इस्लामिक तानाशाह से हाथ मिलाने में कोई गुरेज़ नहीं !
ये FARA के बिना LDA रजिस्ट्रेशन पर हो रहा है – ट्रांसपेरेंसी का सवाल! अगर विपक्ष करता तो मीडिया में तूफान मत गया होता लेकिन RSS है तो चुप्पी। राष्ट्रवाद एक ढोंग भर है !
स्रोत: Prism Reports, NYT, Wikipedia।
सौमित्र रॉय-
बेहद विस्फोटक जानकारी– आरएसएस ने लॉ फर्म स्क्वायर पेटोन बॉग्स को अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील में दलाली करने के लिए इसी साल क्रिप्टोकरेंसी SPG में 3 लाख 30 हज़ार डॉलर का भुगतान किया है।
स्क्वायर पेटोन बॉग्स पाकिस्तान की असीम मुनीर सत्ता के लिए भी अमेरिका से दलाली करती है।

इस दलाली में कई सवाल उलझे हैं–
- आरएसएस के पास इतना पैसा कहां से आया?
- आरएसएस ने किस हैसियत से लॉ फर्म को सुपारी दी?
- आरएसएस का भारत में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। तो संघ की फंडिंग और सोर्स की जांच क्यों नहीं हो रही।
- क्या मोदी सत्ता ने दो देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाले इस दलाली को देने की आरएसएस को इजाज़त दी थी?
- भारत–अमेरिका ट्रेड डील से आरएसएस को क्या फायदा है?
मुझे मालूम है कि इस खुलासे से बहुतों की बोलती बंद हो जाएगी।
मोहन भागवत का आरएसएस न तो कोई एनजीओ है और न ही भारत में कोई पंजीकृत संस्था।
आरएसएस भारत सरकार को कोई टैक्स नहीं देता।
फिर भी वह उसी अमेरिकी लॉबिंग फर्म को 2 लाख 30 हज़ार डॉलर बिटकॉइन, यानी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अपने हितों का ध्यान रखने के लिए देती है, जो पाकिस्तान के हितों का भी ध्यान रखती है।
अमेरिका में आरएसएस के क्या हित हैं? आतंकी देश पाकिस्तान चाहता होगा कि अमेरिका उसकी भारत विरोधी हरकतों के बावजूद उसे गोदी में बिठाए रखे।
क्या आरएसएस भी अपने उग्र हिंदुत्व को बचाने के लिए अमेरिकी कंपनी को दलाली दे रहा है?
क्या अमेरिका की ट्रंप सत्ता उस अमेरिकी कंपनी के कहने पर आरएसएस की हरकतों से मुंह फेर लेगी?
क्या आरएसएस का क्रिप्टोकरेंसी में अमेरिकी कंपनी को पेमेंट करना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सही है?
खासकर तब, जबकि वह एक अपंजीकृत संस्था है, जिसके लेन–देन का कोई रिकॉर्ड नहीं?
क्या मोहन भागवत अब अपना खाता–बही जांच के लिए रखेंगे?
अगर आरएसएस क्रिप्टो में डील कर रहा है तो संघ ने कितना निवेश किया है? पैसा कहां से आया?
क्या किसी संघ के भक्त ने आरएसएस के नाम से पेमेंट किया है? कौन है वह? उसके पैसे का क्या सोर्स है?
क्या विदेशी फर्म को दलाली देना आरएसएस के सेवा, स्वदेशी और राष्ट्रवाद की नीति के मुताबिक है?
या फिर आरएसएस को लगा होगा कि क्रिप्टो में पेमेंट करेंगे तो किसी को पता नहीं चलेगा।
आरएसएस एक फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी संगठन है, जिसके पैसे का कोई हिसाब नहीं।
इस एक दस्तावेज़ से यह साबित हो गया है।


