भड़ास पर खबर छपने के बाद मीडियाकर्मी को धमका रहा पत्रिका का ग्वालियर प्रबंधन

पत्रिका ग्वालियर से रूपेश कुमार गुप्ता को हटाने की खबर भड़ास4मीडिया पर छपने से तिलमिलाए ग्वालियर पत्रिका मैनेजमेंट ने साजिश के तहत मुकदमा में फंसाने की धमकी दी है. ग्वालियर पत्रिका के एड बिलिंग में हो रही अनियमिताओं की खबर भड़ास में छपने से ग्वालियर पत्रिका का वर्तमान मैनेजमेंट बहुत घबराया हुआ है.

रूपेश कुमार गुप्ता रिकवरी विभाग पत्रिका ग्वालियर में 2013 से पदस्थ थे. उनको पत्रिका ग्वालियर युनिट हेड ने बिना किसी लिखित आदेश के 4 मई 2018 को हटा दिया. उन्होंने पत्रिका के खिलाफ लेबर कमिश्नर के यहां केस भी फाइल कर दिया है. रूपेश पर दबाव बनाने के लिये पत्रिका प्रबंधन साजिश कर रहा है.

दिनांक 06.06.18 को समय 11:42 पर रुपेश के पास ग्वालियर ऑफिस से फोन आया जिसमें कहा गया कि आपके खिलाफ हम थाने में FIR दर्ज करा रहे हैं. रूपेश ने पूछा कि क्यों करा रहे हैं, तो उनका कहना था कि आपके खिलाफ दतिया जिले के एजेंट ने लिखकर दिया है कि आप एजेंट से रुपया ले आये और जमा नहीं किया. रूपेश ने कहा कि जब रूपया लिया होगा तो रसीद भी दी होगी. इस पर कहा गया कि रसीद नहीं है, एजेंट ने लिखकर दिया है. इस प्रकार रूपेश कुमार गुप्ता पर दबाब बनाया जा रहा है और FIR दर्ज कराने की धमकी दी जा रही है.

इस बीच, पता चला है कि पत्रिका ग्वालियर में एड बिल में एडिटिंग करके ग्वालियर संभाग के सरकारी कार्यालयों को चूना लगाया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर संभाग के सरकारी कार्यालयों के “एड” जो पत्रिका में सीधे प्रकाशन के लिये आते हैं, उन बिलों मे एडिटिंग करके हेराफेरी की जा रही है. यहां से सरकारी रेट का कम राशि का बिल बनता है.

फिर उसके बाद एडिटिंग करके ज्यादा राशि का बिल बना लिया जाता है. ये खेल काफी समय से चल रहा है. ये सब मिली भगत से हो रहा है. सरकारी कार्यालयों से एडिट बिल का ज्यादा का भुगतान प्राप्त होता है. फिर उस बिल का Software बिलिंग विभाग वाली बिल राशि का भुगतान कर दिया जाता है.

जो बचता है, उसको उस जिले की मार्केटिंग एड एजेंसी के खाते में जमा करा दिया जाता है. ये फायदा जब एड एजेंसी को होता है, तो वो भी इस फायदे का बंटवारा करता है. इस खेल की जानकारी क्या ग्वालियर पत्रिका मैनेजमेंट को नहीं होगी! ये फायदा संस्थान को नहीं हो रहा है. हर कोई संस्था के नाम पर अपनी जेबें भरने लगे हैं. लेकिन ग्वालियर संभाग के सरकारी कार्यालयों से ज्यादा भुगतान कराकर मध्य प्रदेश शासन को चूना लगाया जा रहा है.

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