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उत्तर प्रदेश

सहारा ने नगर निगम की कार्यवाही के खिलाफ पकड़ा हाईकोर्ट का रास्ता

राजेंद्र द्विवेदी-

सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में नगर निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। कंपनी ने नगर निगम द्वारा 8 और 11 सितंबर 2025 को जारी आदेशों को रद्द करने की मांग की है। इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई संभव है।

याचिका में सहारा की ओर से कहा गया है कि संबंधित संपत्तियों से जुड़े मामले में सिविल कोर्ट से पहले से ही स्टे ऑर्डर लागू है। इसके अलावा आर्बिट्रेशन कार्यवाही के दौरान नगर निगम को यह निर्देश दिया गया था कि वह सहारा के पक्ष में लीज एग्रीमेंट को बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बावजूद नगर निगम ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की और अचानक जबरन कब्जा लेने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी।

सहारा का कहना है कि निगम ने यह कार्यवाही कंपनी की बात सुने बिना और बिना नोटिस का समुचित अवसर दिए प्रारंभ कर दी है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

याचिका में उल्लेख है कि नगर निगम ने 22 अक्टूबर 1994 और 23 जून 1995 को गोमतीनगर क्षेत्र में सहारा इंडिया को जो भूमि लीज पर दी थी, उस पर कंपनी ने लगभग ₹2480 करोड़ की लागत से 87 आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां विकसित कीं।

1997 में पट्टे की शर्तों को लेकर नगर निगम और सहारा के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद सहारा ने सिविल कोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी किया था, जो आज भी प्रभावी है।

इसके पश्चात 2017 में आर्बिट्रेशन कार्यवाही में नगर निगम की दलीलों को अस्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल ने सहारा के पक्ष में जमीनों के पट्टे बढ़ाने का आदेश दिया था, किंतु नगर निगम ने अब तक उस आदेश का पालन नहीं किया। इस आदेश के अनुपालन के लिए सहारा ने एक्सिक्यूशन केस भी दायर कर रखा है।

कंपनी का कहना है कि इसके बावजूद नगर निगम अवैध रूप से सहारा सिटी की लीज वाली जमीनों पर जबरन कार्यवाही कर रहा है, जो पूर्णतः गैरकानूनी है।

पूरा मामला समझने के लिए ये खबर पढ़ें…

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