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टीवी डिबेट में गेस्ट के विवादित बयान पर एंकर की गिरफ्तारी क्यों?

इस वक्त टीवी न्यूज देखने पर लगता है अपना सिर पीट लो। लड़ते झगड़ते गरियाते एंकर और पैनलिस्टों से समाज को क्या दिशा मिल रही है। खैर, ताज्जुब तो एक बात का है जब हाल ही में साक्षी टीवी के एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि एंकर को जिस बात के लिए गिरफ्तार किया गया वह बयान उसने दिया ही नहीं था। लेकिन आप सोचिए यदि इस तरह की कार्रवाई हिंदी के नेशनल न्यूज चैनलों और डिबेट संचालित करने वाले एंकरों पर होने लगे तो कौन कितने दिन चल सकेगा..? या फिर एंकर और चैनल के खिलाफ यह सत्ता का जोर था, जैसा पहले कई मामलों में देखने को मिला है..?

साक्षी टीवी के वरिष्ठ पत्रकार, एंकर कोमिनेनी श्रीनिवास राव को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी, कोर्ट ने नाविका कुमार और राजदीप सरदेसाई का उदाहरण देकर सवाल उठाया — क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब चुनिंदा पत्रकारों तक सीमित है?

टीवी डिबेट में गेस्ट ने विवादित बयान दिया और गिरफ्तारी हो गई एंकर की। मगर वही डिबेट अगर किसी सत्ता-समर्थक चैनल पर हो, तो न बयान पर सवाल उठता है, न एंकर पर केस दर्ज होता है।

यह सवाल आज सुप्रीम कोर्ट में भी गूंजा जब साक्षी टीवी के एंकर कोमिनेनी श्रीनिवास राव को कोर्ट ने जमानत दी। 70 वर्षीय पत्रकार को आंध्र प्रदेश पुलिस ने उस टिप्पणी के लिए गिरफ्तार किया था, जो उन्होंने की ही नहीं थी — बल्कि शो के एक पैनलिस्ट ने की थी।

क्या कहा कोर्ट ने?

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा — “टिप्पणी राव ने नहीं की थी, फिर गिरफ्तारी क्यों? आज टीवी पर कई वरिष्ठ पत्रकार खुलेआम भड़काऊ और अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं, तब तो किसी को आपत्ति नहीं होती।”

कोर्ट ने विशेष रूप से दो पत्रकारों — नाविका कुमार और राजदीप सरदेसाई — का उदाहरण देते हुए कहा कि यह लोग अक्सर टीवी पर उकसाने वाले बयानों की मेज़बानी करते हैं, पर उनके खिलाफ इस तरह की कोई कार्यवाही नहीं होती।

पूरा विवाद क्या है?

6 जून को साक्षी टीवी पर एक लाइव डिबेट के दौरान पत्रकार राजू ने अमरावती क्षेत्र को “वेश्याओं की राजधानी” कहा। इसके बाद विरोध शुरू हुआ और 9 जून को राव और राजू — दोनों पर FIR दर्ज कर दी गई। IPC, IT एक्ट और SC/ST एक्ट की धाराएं लगाई गईं।

पुलिस ने एंकर को भी आरोपी बना डाला — जबकि वह सिर्फ एंकर की भूमिका में थे, न कि वक्ता की।

फैसले के मायने

कोर्ट ने यह भी कहा कि “पत्रकार के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है। केवल इस आधार पर कि किसी शो में कोई अतिथि कुछ विवादास्पद कह दे, एंकर को जेल भेजना लोकतंत्र के खिलाफ है।”

साथ ही कोर्ट ने राव को चेताया कि वे आगे अपने शो में अपमानजनक टिप्पणी को प्रसारित न होने दें।

बड़ा सवाल — क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी अब चैनल देखकर तय होगी?

आज देश में कई ऐसे टीवी एंकर हैं जो सत्ता के पक्ष में खुलेआम नफरत, भड़काऊ भाषा और गाली-गलौज तक प्रसारित करते हैं — लेकिन उन पर कोई मुकदमा नहीं चलता, कोई गिरफ्तारी नहीं होती।

जब सवाल सरकार या सत्ता से जुड़े विषयों पर उठते हैं, तभी क्या कानून सक्रिय होता है? अगर नहीं, तो यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए एक गहरी चिंता का विषय है।

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