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सलोनी अरोरा बोली- मुझे नहीं मालूम था कल्पेश आत्महत्या जैसा कदम उठाएंगे

सलोनी की रिमांड अवधि तीन दिन के लिए बढ़ी

इंदौर : जिस सलोनी अरोरा की धमकियों, बदनाम करने वाले ऑडियो की वजह से घर-परिवार-रिश्तेदार-भास्कर समूह में छवि धूमिल होते जाने के कारण बेहद तनाव के चलते कल्पेश याग्निक ने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाया, उसी सलोनी को भी उनके इस कदम का अफसोस है।

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रिमांड के दौरान जब एक पुलिस अफसर ने कल्पेश की आत्महत्या को लेकर उससे पूछा तो उसने अंग्रेजी में ही जवाब दिया कि उसे अफसोस है कि उन्होंने यह कदम उठाया। मुझे नहीं मालूम था कि वह ऐसा कदम उठाएंगे, अपना जीवन ही समाप्त कर लेंगे।सलोनी के रिमांड की पांच दिन अवधि पूर्ण होने पर एमआयजी पुलिस ने उसे प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अंशुश्री चौहान की कोर्ट में पेश किया और कुछ अन्य सामान की बरामदगी के लिए पुन: रिमांड दिए जाने का अनुरोध किया था। पुलिस को तीन दिन (12अगस्त तक) का रिमांड मिला है।

पांच दिनी रिमांड अवधि में पुलिस को एक चौंकाने वाली जानकारी यह भी मिली है कि सलोनी फोन पर जिससे भी बातचीत करती थी उसे आडियो रिकार्डिंग मोड पर डाल कर ही बात करती थी। अपने प्रोफेशन से जुड़े लोग तो ठीक, अपने बेटे से फोन पर हुई बातचीत भी रिकार्ड करती थी।

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एक मनोचिकित्सक से जब इस तरह के व्यवहार का कारण जानना चाहा तो उनका कहना था कोई व्यक्ति जब इनसिक्योर (असुरक्षित) महसूस करता है या किसी तरह के अज्ञात भय से ग्रसित होता है तो वह सेफ साइड के लिहाज से ऐसा कदम उठाता है। जैसा कि इस मामले में अब तक जानकारी मिली है कि उसकी वैवाहिक जिंदगी विवाद और तनाव से घिरी रही है तो ऐसे ही कारणों के चलते वह हर फोन कॉल की आडियो रिकार्डिंग करती होगी।

वह फोन तो सिर्फ पुलिस को गच्चा देने के लिए था

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कल्पेश की आत्महत्या (13 जुलाई) के सात दिन बाद एमआयजी पुलिस ने आत्महत्या का प्रकरण दर्ज कर मुख्य अभियुक्त सलोनी अरोरा की तलाश में मुंबई स्थित फ्लेट पर छापा मारा था। उस फ्लेट से एक मोबाइल चार्जिंग पर लगा हुआ मिला था। यह मोबाइल उसने जानबूझकर (पुलिस को गच्चा देने के लिए) छोड़ा था।

पांच दिन के रिमांड में पूछताछ के दौरान सलोनी ने जानकारी दी थी कि बाद में अंधेरी के जिस होटल में वह रह रही थी उसका लेपटॉप भी वहीं हैं।पुलिस उसे लेपटॉप बरामद करने के लिए मुंबई साथ लेकर गई थी।

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सलोनी से यह जानकारी भी मिली कि वह तीन चार मोबाइल इस्तेमाल करती रही है।इन्हीं में एक मोबाइल सबूत नष्ट करने के लिए उसने तोड़ कर फेंक दिया है। पुलिस ने लेपटॉप बरामद किया है इसी में वह कल्पेश से हुई बातचीत की ऑडियो क्लिपिंग मनचाहे तरीके से एडिट करती थी।इस लेपटॉप में तो मूल बातचीत सेव कर ही रखी है, साथ ही एक मोबाइल में भी मूल बातचीत सेव करती थी। एक अन्य मोबाइल से वह एडिट की हुई ऑडियो क्लिपिंग कल्पेश को और उनके परिजनों, प्रबंधन-स्टॉफ आदि को सेंड करती थी।

सलोनी से पूछताछ करने वाले अधिकारियों में से एक ने बताया कि पुलिस के सवालों के जवाब या बोलचाल में अंग्रेजी का ही इस्तेमाल कर के यह अहसास कराती रहती है कि जैसे यह केस हाइप्रोफाइल है वैसे ही वह भी रहनसहन-बोल व्यवहार के स्तर पर हाइप्रोफाइल है।

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मांगा पांच दिन, रिमांड मिला तीन दिन का

पुलिस को दूसरी बार तीन दिन का रिमांड मिला है। गुरुवार को मुंबई से लाकर पुलिस ने उसे प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अंशुश्री चौहान की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान आज भी उसने किसी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। पूरे समय मुँह छिपाती रही। हां उसके हाथों पर मच्छरों के काटे निशान बता रहे थे कि बैरक में रात गुजारना इतना आसान नहीं है उसके लिए। पुलिस ने अपनी ओर से पेश प्रतिवेदन में जानकारी दी कि आरोपी सलोनी ने वह मोबाइल जिसमें ऑडियो एडिट किए गए थे उसे तोड़कर मुंबई में अंधेरी के आगे वासी क्षेत्र में कहीं फेंक दिया है, यह मोबाइल अभी बरामद किया जाना है, जिसके लिए फिर से मुंबई ले जाना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त पूछताछ के लिए उसे फिलहाल रतलाम नीमच भी ले जाना है। अतः कम से कम 5 दिन का पुलिस रिमांड और दिया जाए। जिला लोक अभियोजक विमल कुमार मिश्रा ने बताया कि कोर्ट ने तर्क के आधार पर सलोनी का आगामी 12 अगस्त तक का और पुलिस रिमांड दे दिया। इसके पूर्व उसे 5 दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया था जिसकी अवधि 9 अगस्त गुरुवार को पूरा होने पर आज उसे मुंबई से यहां लाकर पेश किया गया था।

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पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुंबई में सलोनी की निशादेही पर उसके चार मोबाइल फोन और लैपटॉप आदि बरामद किए गए हैं। सूत्रों की माने तो लैपटॉप में वह मूल ऑडियो मिल गए हैं जिन्हें कुछ काट छांट व एडिट करके सलोनी द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किए गए थे। उस मूल ऑडियो में सलोनी ने बातचीत में जो जो बातें कही थी, वह भी है। अब पुलिस को उस मूल मोबाइल की तलाश है, जिससे यह एडिट किए गए थे। जो लेपटॉप मिला है, उसमे काफी सारी रिकार्डिंग की क्लिप्स है, इन्हें पुलिस द्वारा सायबर एक्सपर्ट के माध्यम से खुलवाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इस केस में कुछ और लोगों के षड्यंत्र में शामिल होने की जो बात सामने आ रही है, उसे तस्दीक करना है।

लिव इन के रिश्ते नहीं

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कल्पेश आत्महत्या कांड में सलोनी के साथ पहले दिन से ही आदित्य चौकसे का नाम भी आ रहा है और संस्थान के कतिपय स्टॉफ सदस्यों ने सलोनी-आदित्य के बीच लिव इन जैसे रिश्ते होने का दावा भी किया था। पूछताछ में सलोनी ने आदित्य के साथ लिव इन में रहने को स्पष्ट रूप से नकारा है। हां यह जरूर माना है कि वे मुसीबत के दौरान हर मोड़ पर मदद के लिए साथ देता रहा है। सलोनी के कथन को पुलिस अभी इसलिए सच के करीब मान रही है कि अभी इस कांड में अन्य लोगों से उतनी गहराई से पूछताछ नहीं हुई है।

फिर वो अननोन नंबरों से फोन करती थी

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इस मामले में बीते 7-8 महीनों से सलोनी के कारण कल्पेश का तनाव इसलिए बढ़ता जा रहा था कि वह चाहे जब फोन पर धमकाने वाले लहजे में डिमांड करने लग गई थी। एक नजदीकी बताते हैं कि कल्पेश भाई ने उसके फोन कॉल से परेशान होकर उसके फोन अटैंड करना बंद कर दिए थे। ऐसे में वह अननोन नंबरों से फोन करती और धमकाती कि तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठाते हो? हमने तो कल्पेश भाई से कहा भी था कि उसके फोन आप भी टेप करना शुरु कर दो।छोटे भाई नीरज कहते है वो सिद्धांतवादी थे कहते इस तरह के काम अपराधी करते हैं। मैंने कोई अपराध तो किया नहीं, मैं क्यों फोन टेप करुं। वो जो कर रही है, भुगतेगे भी वही।वो अपने परिवार, हम सब से बेहद प्रेम करते थे, और इसी कारण चिंता में भी रहते थे ।

पहले ऑडियो क्लिप भेजती फिर फोन कर के पूछती

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कल्पेश को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए वह परिजनों-मित्रों-रिश्तेदारों को ऑडियो क्लिप भेजती। बाद में खुद ही इनमें से अधिकांश लोगों को फोन करके ऑडियो क्लिप को लेकर इस तरह बातचीत करती ताकि तस्दीक करले उन तक पहुंची तो सुनी भी या नहीं। कल्पेश के एक नजदीकी मित्र बताते हैं यह अच्छा रहा कि जिसके पास भी यह आडियो क्लिपिंग पहुंचती वे सभी उसे अपने तक ही रखते, वॉयरल नहीं करते थे। किंतु जब कभी परिजन-रिश्तेदार मिलते और इस मुद्दे पर चर्चा करते तो कल्पेश भाई को यह अज्ञात भय सताने लगता था कि ऑडियो पूरे मीडिया जगत में वॉयरल हो गए हैं। वे जब बीते दो-तीन महीनों से अधिक तनाव-भय ग्रस्त नजर आने लगे तो अकसर उन्हें संस्थान छोड़ने-लेने के साथ ही ऑफिस में हममें से कोई साथ ही आता जाता था। उस दिन अमावस्या थी, बस उस दिन ही जाने कैसे सतर्कता नहीं रख पाए….और यह सब हो गया।

लेखक कीर्ति राणा इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार हैं. वे दैनिक भास्कर समूह में भी वरिष्ठ पद पर चुके हैं. फिलहाल उज्जैन-इंइौर से प्रकाशित दैनिक अवंतिका इंदौर में संपादक के रूप में कार्यरत हैं. उनसे संपर्क 8989789896 या [email protected] के जरिए किया जा सकता है. सलोनी-कल्पेश प्रकरण पर दैनिक अवंतिका अखबार ही लगातार लिख रहा है.

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0 Comments

  1. LN Shital

    August 11, 2018 at 2:42 pm

    कीर्ति राणा जी,
    सवाल यह है कि ऐसा क्या किया था कल्पेश ने, जिसकी वज़ह से वह सलोनी से खौफ़ज़दा थे. और, अगर कुछ किया भी था तो डट कर सामने आते, क्योंकि आजकल ‘इन बातों’ को कोई ‘पाप’ नहीं मानता. ‘असम्भव के विरुद्ध’ लिखने वाले को ‘असम्भव के विरुद्ध चलना’ भी चाहिए था. दरअसल वह नंगी है और वह बुज़दिल थे. जिनके भीतर पाखण्ड होता है, वही ऐसा दोहरा आचरण करते हैं. आप ही बताइए कि भैय्यू जी और कल्पेश में फ़र्क़ क्या रह गया?

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