संजीव पालीवाल की नई किताब : ‘नैना’ का लेखक इस बार ‘पिशाच’ लेकर आया है!

प्रभात रंजन-

अपराध कथा लेखन की जो परम्परा सुरेंद्र मोहन पाठक के साथ लुप्त होती जा रही थी उसको संजीव पालीवाल ने नए सिरे से खड़ा कर दिया है। ‘नैना’ का लेखक इस बार ‘पिशाच’ लेकर आया है।

मेरा यह मानना है कि किसी लेखक की असली पहचान उसके पहले उपन्यास से नहीं दूसरे उपन्यास से होती है। पुरानी कहावत रही है कि एक उपन्यास भर की कहानी हर इंसान के पास होती है।

संजीव जी के पहले उपन्यास ‘नैना’ की कहानी टेलिविज़न समाचार की उनकी जानी-पहचानी दुनिया की थी तो ‘पिशाच’ की कहानी हमारे आपके जीवन की है, महानगरीय मध्यवर्गीय जीवन के भय की है और सब कुछ इतना समकालीन है कि उपन्यास को पढ़ते हुए आप उसको घटित होता हुआ महसूस कर सकते हैं।

ताज़गी भरे रोमांच की ऐसी कथा जो आपको अंत तक बांधे रखती है। इतना ही कह सकता हूँ कि यह उपन्यास ‘नैना’ से बहुत अलग, बहुत आगे की चीज़ है। अगर लेखक ने पहली गेंद पर कट करके चौका मारा था तो दूसरी गेंद पर स्ट्रेट ड्राइव कर छक्का मार दिया है। जब आप पढ़ेंगे तो आप भी इस बात की तस्दीक़ करेंगे। उपन्यास वेस्टलैंड से प्रकाशित है।

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