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संत सम्मेलन से माहौल और मंदिर पर हिन्दी अखबार फॉर्म में

राम मंदिर निर्माण पर दिल्ली से अयोध्या तक काम शुरू हो गया है। इस क्रम में फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या किए जाने की भी संभावना है। दिल्ली में संत समागम, इंडियन एक्सप्रेस में राम माधव का विशेष इंटरव्यू, गोविन्दाचार्य द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखना, बाबा रामदेव का भी बोल पड़ना और “धर्मादेश” आने की घोषणा, निर्माण शुरू करने का दावा, मंदिर के लिए अध्यादेश लाने की संभावना आदि की चर्चा छेड़कर माहौल बनाने की कोशिश चल रही है। अंग्रेजी अखबारों में इनकी चर्चा पहले पेज पर तो नहीं है लेकिन हिन्दी अखबारों में यह खबर छा गई है।

इंडियन एक्सप्रेस ने, “राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश” और मुख्य शीर्षक, “भाजपा महासचिव ने कहा, अदालत देर कर रही है, स्थिति 1992 जैसी ही” शीर्षक खबर को लीड बनाया है। इस खबर की शुरुआत से पहले सिंगल कॉलम एक लाइन में बड़े अक्षरों में लिखा है, “हिन्दू चिन्तित महसूस कर रहे हैं, 1992 (हैड कनसीक्वेंसेज) के नतीजे रहे थे : राम माधव”। इसके साथ एक और खबर है, “संतों के समागम में अदालतों को ‘मंदिर विरोधी’ कहा गया, राम अवतार मोदी से अपील”। टेलीग्राफ में साधुओं के समागम की फोटो अंदर के पेज पर है जिसका कैप्शन है, हिन्दू साधुओं ने राष्ट्रीय एकता के लिए तालकटोरा स्टेडियम नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित दो दिन के समागम धर्मादेश में हिस्सा लिया। हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया में संत समागम की खबर नहीं है।

टेलीग्राफ ने एक खबर छापी है जिसके मुताबिक इस बार दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जुंग सूक धार्मिक नगरी अयोध्या में राजकीय अतिथि होंगी। वे उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित ‘दीपोत्सव’ समारोह में मुख्य अतिथि होंगी और कई अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। कहा जाता है कि करीब 2,000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी कोरिया की गई थीं। वहां के नरेश किम सूरो से विवाह के बाद उन्हें हिव ह्वांग ओक के नाम से जाना गया। कोरिया की इस रानी के सम्मान में उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ने 1991 में एक स्मारक की योजना बनाई थी। सन 2000 में एक स्मारक का उद्घाटन कोरिया के एक मेयर ने किया था। तब राम प्रकाश गुप्ता उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे। 2001 में राजनाथ सिंह की सरकार ने अयोध्या का विकास दक्षिण कोरिया के एक शहर के सहयोगी के रूप में करने की घोषणा की थी।

इस संबंध में दक्षिण कोरिया के एक मंत्री मार्च 2015 में अयोध्या आए थे। राजकुमारी सुरीरत्न स्मारक परियोजना के संबंध में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ है। अब इसी स्मारक की बुनियाद रखी जानी है। अखबार ने यह भी लिखा है कि इस मौके पर उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले का नाम बदला जा सकता है। अयोध्या इसी जिले में है और फैजाबाद का नाम बदलकर अब अयोध्या किए जाने की योजना है।

दैनिक जागरण की लीड है, “अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जारी होगा धर्मादेश”। उपशीर्षक है, “साधु-संतों के सम्मेलन में उठी सोमनाथ के तर्ज पर कानून लाने की मांग”। इसके साथ, “तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित संभी पंथ एवं संप्रदायों के संतों द्वारा राष्ट्रीय एकता के लिए सामूहिक उद्घोष धर्मादेश में शामिल साधु-संत” कैप्शन के साथ एक फोटो भी है। अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष का एक कोट भी है, “राम मंदिर मुद्दे को अब अनंतकाल तक न्यायालय के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है”। आज जन-जन की एक ही आकांक्षा है कि जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का जल्द से जल्द निर्माण हो। नीलू रंजन की इस खबर का पहला पैरा इस प्रकार है, “अध्यादेश जारी कर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने की संघ परिवार की मांग के समर्थन में देश के साधु-संत धर्मादेश जारी करेंगे। शनिवार को तालकटोरा स्टेडियम में शुरू हुए तीन हजार साधु-संतों के सम्मेलन में रविवार को धर्मादेश जारी किया जाएगा।” मतलब “धर्मादेश” जारी होने ने से पहले ही लीड है।

दैनिक भास्कर ने अयोध्या विवाद से जुड़ी एक और खबर छापी है जो पहले पलटे जा चुके अखबारों में नहीं दिखी। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, “मुंबई के एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस की टिप्पणी – देश में इससे पहले भी विधायी प्रक्रिया से कोर्ट के फैसले रद्द हुए हैं”। मुख्य शीर्षक है, “जस्टिस चेलमेश्वर बोले- राम मंदिर के लिए कानून लाना असंभव नहीं”। खबर की शुरुआत से पहले तीन लाइन में बड़े और बोल्ड अक्षर में लिखा है, “रिटायरमेंट के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए चेलमेश्वर”। अखबार ने मुंबई की इस खबर के साथ, दिल्ली में “राम मंदिर में देरी से नाराज 125 संप्रदायों के तीन हजार संत जुटे” खबर भी छापी है।

भास्कर में इस खबर के साथ एक और सूचना है, “इधर, बीकानेर में एक रैली के दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का एलान- दिवाली के बाद होगा राम मंदिर निर्माण की दिशा में काम”। अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष का कोट यहां भी है। अखबार में संतों के जुटान की फोटो के साथ मंदिर पर भाजपा बनाम भाजपा भी है। इसमें एक तरफ यूपी के डिप्टी सीएम बोले, मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे के साथ बीजेपी सांसद का तंज- मंदिर के नाम पर वोट लेंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे भी छापा है। यह तंज इलाहाबाद क्षमा कीजिएगा प्रयागराज (अखबार में इलाहाबाद ही लिखा है) के भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्ता का है।

नवोदय टाइम्स में यह खबर दूसरे पेज पर टॉप में है। पहले पेज पर भरपूर विज्ञापन है। शीर्षक है, “तालकटोरा स्टेडियम में 3000 सातु-संतों ने भरी हुंकार”। राम मंदिर से कम कुछ भी बर्दाश्त नहीं। फोटो के साथ वेदांती बोले, “दिसंबर में शुरू होगा मंदिर निर्माण” खबर भी है। इसके नीचे डेढ़-डेढ़ कॉलम में दो खबरे हैं, “थरूर बोले, विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास” और “अध्यादेश से हो जन्मभूमि परिसर का अधिग्रहण : गोविन्दाचार्य” भी है।

नवभारत टाइम्स में यह खबर लीड है। शीर्षक है, संतों ने किया एलान, मंदिर अभी बनाएंगे। पूनम पांडे की खबर की शुरुआत इस प्रकार है, राम मंदिर के लिए 1992 जैसे आंदोलन के संघ से मिले संकेत के अगले ही दिन राजधानी में राम मंदिर के लिए हचलच तेज हो गई। तालकटोरा स्टेडियम में जुटे 1000 से ज्यादा (दूसरे अखबारों ने तीन हजार और उससे भी ज्यादा लिखा है) संतों ने दिसंबर में ही राम मंदिर का काम शुरू करने का एलान कर डाला। आज राम मंदिर पर प्रस्ताव भी पास किया जाएगा। अखबार ने धर्म संत महासम्मेलन की फोटो दो कॉलम में लगाई है। इसके नीचे सिंगल कॉलम में दो खबरें हैं। एक का शीर्षक है, “6 दिसंबर को मंदिर का शिलान्यास?” और दूसरी खबर का शीर्षक है, “मूर्ति बनाने से रोका तो देख लेंगे : डिप्टी सीएम”।

अमर उजाला में भी यह खबर लीड है। शीर्षक है, संत बोले – दिसंबर में शुरू होगा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण। उपशीर्षक है, राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य राम विलास वेदांती ने कहा, आपसी सहमति से अयोध्या में मंदिर और लखनऊ में बनेगी मस्जिद। अखबार ने इस मुख्य खबर के साथ कई छोटी-छोटी खबरें छापी हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का बयान, … मंदिर वहीं बनेगा; उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का बयान, …. दुनिया देखेगी नजारा और सियासत भी गर्म शीर्षक से, कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद का, राम मंदिर भाजपा का चुनावी मुद्दा है ….; केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर का सवाल, मंदिर चाहती है या नहीं, कांग्रेस बताए प्रमुख हैं।

दैनिक हिन्दुस्तान में भी यह खबर लीड है। फ्लैग शीर्षक है, “दिल्ली में जुटे संत, बोले – मंदिर का निर्माण जल्द से जल्द हो”जबकि मुख्य शीर्षक है, “राम मंदिर पर संघ के बाद संतों का दबाव”। सूचनाएं वही हैं जिनकी चर्चा पहले हो चुकी है।
राजस्थान पत्रिका में भी यह खबर लीड है। सियासत विषय के तहत फ्लैग शीर्षक है, “राम मंदिर निर्माण पर दिल्ली से लखनऊ तक सुर तेज”। मुख्य शीर्षक है, सेमी फाइनल में ही राम-राम। दूसरे अखबारों में प्रकाशित खबरों और शीर्षक की तुलना में पत्रिका के कुछ शीर्षक नए और अलग हैं। मुख्य खबर के साथ सारी सूचनाओं को समायोजित करने के लिए छोटी की गई इन खबरों के शीर्षक में कुछ नई बातें भी हैं। बाबा रामदेव का बयान, “संसद में जरूर आएगा विधेयक” भी किसी दूसरे अखबार में इस खबर के साथ प्रमुखता से छपा नहीं दिखा।

 

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क : [email protected]

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