विवेक तिवारी-
बहुत दुखी होकर लिख रहा हूं। मैं जर्नलिस्ट हूं एक चैनल का स्टेट हेड हूं। लखनऊ में रहता हूं। कुछ महीनों पहले स्मार्ट मीटर लगा फिर उसे प्रीपेड किया गया। बीते 3 महीने से जब से प्रीपेड हुआ तबसे बिल नहीं आया। फोन पर मैसेज आता है 50 रुपए बचे हैं 100 रुपए बचे हैं तो मैं कुछ न कुछ रिचार्ज कर देता हूं।
एकाध बार संबंधित जेई साहब को कहने पर उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर बिल भेजा। फिर मुझे कहा गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर का app डाउनलोड कर लीजिए। वो भी कर लिया। उस पर बिल न मिलने की कंप्लेंट की तो 24 घंटे बाद शिकायत दूर करने मैसेज आया। लेकिन बिल नहीं आया।
20 दिन पहले खबर थी कि प्रीपेड मीटर का बिल मिलेगा। अब तक तो नहीं मिला। ये टोटल सिस्टम ही फ्रॉड लगता है। कोई तैयारी नहीं कुछ अता पता नहीं। उपभोक्ताओं को अंधेरे कुएं में झोंक दिया है। जाइए और तबाह होइए।
ये हाल है मेरे जैसे उपभोक्ता का जिस पर एक नए पैसे का बकाया नहीं है। इनका एक कथित व्हाट्सएप ग्रुप भी था जिस पर पहले बिल मांगने पर आता था। अब जैसे ही उसमें उपभोक्ता संख्या डालो कोई रिस्पांस नहीं आता।
ये ऐसा विभाग है जो अच्छी तरह से चल रही उपभोक्ता फ्रेंडली व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं कर पाता और उसको बर्बाद करने में उसको सुकून मिलता है।
समस्या solve हो गई। लेकिन दिलचस्प बात ये रही कि दो ऐसे ऐप जिनको बिजली विभाग ने हमको डाउनलोड करने को कहा था और जिन पर मैं बिल ढूंढ रहा था वो किसी काम के नहीं निकले। आज भी विभाग के दो अलग अलग लोगों ने 2 अलग अलग ऐप बताए कि बिल यहां मिलेगा ।इनमें से एक मेरे पास पहले से था जिस पर बिल नहीं मिल रहा था।आज भी उसी ऐप पर देखने को कहा गया। दूसरे फोन पर बताया कि वो ऐप हटा दीजिए एक नया ऐप बता रहा हूं उसे डाउनलोड करिए।जब उसको डाउनलोड किया तो बिल मिल गया।मैने 650 रुपए ज्यादा जमा कर रखे थे।माइनस में है बिल।ये इसलिए हुआ क्योंकि मेसेज आते थे 20 रुपए बचा है रिचार्ज कराए।मारे डर के मै पैसा डाल देता था कि कहीं कट न जाए बिजली। अगर बिल मिलता रहता तो कोई डर न होता। ये हाल है। विभाग के ही लोगों को पता नहीं है कौन सा ऐप कारगर है कौन सा बेकार तो उपभोक्ता बेचारा क्या जानेगा।
खैर मेरे एक पूर्व पत्रकार साथी जो स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी कंपनी में अच्छे पद पर हैं उन्होंने मेरी पोस्ट देखकर रास्ता बनाया और काम हो गया।
विवेक तिवारी, 4/6 बटलर पैलेस कॉलोनी, लखनऊ
उपभोक्ता संख्या- 3578960000
पोस्ट पर आए कुछ कमेंट्स भी पढ़ें…
अनुपम त्रिवेदी-
Aap kisi channel k head ya koi aur yaha sab dhan 22 paseri hai.
गुड्डू मिश्रा-
मेरा भी स्मार्ट मीटर लगा है सब गोलमाल है पहले मीटर रीडिंग लेते थे तो पता नहीं कैसे मीटर स्टोर होने लगा जेई महोदय से बोला तो पच्चीस हजार बिल आया संशोधन कराया तो दस हजार पर खत्म किया। हरिहर पुर विद्युत उपकेंद्र पर जेई और एसडीओ दोनों लोग कार्य पर तत्पर हैं पर अनाप शनाप बिल आता है स्मार्ट मीटर में गलत बिल आए तो विभाग वालों को विभागीय कार्यवाही करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है जीरो टॉलरेंस की सरकार हैं।
ज्ञानेंद्र शुक्ला-
स्मार्ट मीटर के नाम पर गजब की नरक मचा रखी हैं ऊर्जा महकमे ने।
सौरभ तिवारी-
भैया ये वर्टिकल व्यवस्था की वजह से हो रहा है।दूसरा स्मार्ट मीटर का काम जिस कंपनी को दिया है वो सब निरंकुश है किसी भी जे ई से लेकर एक्स सी एन लेवल तक के अधिकारी सिर्फ चिट्ठी ही लिख सकते है बस। अब सवाल बहुत सारे है लेकिन जवाब कोई नहीं। खैर मैं आपकी पोस्ट को कॉपी (स्क्रीनशॉट) कर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में दे रहा हूं।
हेमंत पांडेय-
पूरा प्रदेश इससे त्रस्त है। कर ही क्या सकते हैं। जब मंत्री जी बेबस हैं तो क्या हो सकता है। बेचारे वो तो बहुत कोशिश करते हैं लेकिन अधिकारी उनकी सुनते ही नहीं।
रंजीत दुबे-
Electric Chori rokne ke liye ye sab prayog ke taur par kiya ja raha hai.. Electric deptt ke entire system ko transparent honest aur user friendly hone kee jaroorat hai aur deptt se bhrast evam nikamme logon kee samaybaddha chhataayee kee jaroorat hai jisse inkee nirankush kaarypradali me sudhar ho aur online complaint kee byawastha me twarit sahee kaaryawahi ho.




Rajendra mishra
December 18, 2025 at 11:03 pm
राम राज्य चल रहा है भइया…बिना उपभोक्ता की सहमति के मीटर पोस्ट पेड से प्रीपेड कर दिए