यूपी का हाल : मंत्री स्वाति सिंह ने कहा- गड़बड़ टेंडर निरस्त करो, अफसरों ने जवाब दिया- नहीं करेंगे!

यशवंत सिंह-

यूपी में योगी बाबा के राज में भयंकर अराजकता का आलम है. मंत्री की भी अफसर नहीं सुनते. बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में स्मार्ट मोबाइल फोन खरीदने से संबंधित एक टेंडर सेटिंग गेटिंग के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा था. इसकी गड़बड़ियां जब इसी टेंडर में शामिल रही एक कंपनी ने उजागर किया तो हल्ला मच गया.

मामला मंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने एक पत्र लिखकर इस बिड को निरस्त करते हुए फिर से विंडो ओपन करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा.

लेकिन लगता है मंत्री के निर्देश को अफसरों ने उल्टा सुन लिया. बजाय टेंडर निरस्त करने के, घपले-घोटाले से घिरे पुराने टेंडर की कार्रवाई को ही आगे बढ़ा दिया गया. चहेती कंपनी को टेंडर देने के वास्ते फाइनेंसियल बिड ओपन कर दिया गया.

ज्ञात हो कि टेंडर की शुरुआती स्टेज टेक्निकल बिड की होती है. इसी लेवल पर घपले-घोटाले सामने आ गए कि किस तरह चुनिंदा कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम शर्तें बदली जा रही हैं और नियम-कादयों का घनघोर उल्लंघन किया जा रहा है. टेक्नकिल बिड में शामिल कंपनी लावा ने इन गड़बड़ियों और फिक्सिंग के खिलाफ आवाज उठाई.

लावा के पत्र को भड़ास4मीडिया समेत कई मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया.

नतीजा ये हुआ कि बात उपर तक पहुंची. मंत्री स्वाति सिंह ने पूरे प्रकरण की फाइल को अपने पास मंगाकर गड़बड़ियों को स्वयं देखा और टेक्निकल बिड निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए.

देखें मंत्री के आर्डर की कॉपी-

मंत्री स्वाति सिंह के पत्र के आलोक में विभाग के संयुक्त सचिव महावीर प्रसाद गौतम ने राज्य पोषण मिशन के निदेशक को पत्र लिखकर मंत्री जी की भावना/आदेश से अवगत कराया और टेंडर में नियम प्रक्रियाओं की अवहेलना के बाबत रिपोर्ट तलब की.

यहां ध्यान दीजिए.

मंत्री ने कहा बिड निरस्त करो. उनके संयुक्त सचिव ने सुना कि रिपोर्ट मंगाओ.

पहले लेवल पर यहीं आदेश का उल्लंघन हो गया.

अफसर की इस हरकत से जाहिर है कि मंशा बिड निरस्त करने की नहीं बल्कि गड़बड़ियों के खिलाफ उठे स्वर को दबाने हेतु गुमराह करने वाला एक आदेश दिखाने मात्र को जारी करने की थी.

देखें संयुक्त सचिव का पत्र-

जो अफसर टेंडर-बिड को देख रहे हैं, उन तक आदेश कुछ अलग तरीके से पहुंचा. उन्हें सुनाई पड़ा- काम जारी रखो, वीर जवानों आगे बढ़ो.

फिर क्या था. अफसरों ने टेक्निकल बिड के बाद फाइनेंसियल बिड ओपन कर दिया. मतलब घपले-घोटाले से घिरे स्मार्ट फोन टेंडर की प्रक्रिया एक कदम आगे बढ़ गई.

देखें फाइनेंशियल बिड संबंधी सुबूत-

ये देख लावा कंपनी ने प्रधानमंत्री को विस्तार से एक पत्र लिखा. पत्र में ये भी बताया गया है कि जिस दाम पर स्मार्ट फोन खरीदने का आदेश है, उस प्राइस रेंज के उपर जाकर खरीद की प्रक्रिया होने वाली है.

लावा की तरफ से पीएम मोदी को लिखा गया पत्र ये रहा…

स्पष्ट है कि कमीशन की मोटी रकम पाने के लिए अफसरों ने मंत्री के आदेश को धता बताते हुए अपनी चहेती कंपनी को टेंडर देने का पूरा मन बना लिया है और इसके लिए जितने भी नियमों को तोड़ा जा सकता है, तोड़ते जा रहे हैं.

भारत की कंपनी लावा को साजिश करके इस टेंडर से बाहर किया गया और विदेशी कंपनियों को टेंडर के लिए ओके किया गया.

जिन दो विदेशी कंपनियों को टेंडर के लिए सही माना गया है वो दोनों दिखाती तो खुद को कंपटीटर हैं लेकिन ये कई स्टेट में मिलकर काम करती हैं. मतलब टेंडर में बची दोनों कंपनियां मिलीभगत करके किसी अन्य कंपनी को इस फील्ड में घुसने नहीं देतीं. वे इसके एवज में अफसरों-नेताओं को भरपेट पैसा खिलाती हैं.

नोटों के एहसान तले दबे अफसर कर्ज चुकता करने के वास्ते चहेती कंपनी को हर हाल में टेंडर देने पर आमादा हैं.

इसीलिए तो मंत्री ने कहा कि टेंडर निरस्त करो तो उन्होंने इसका जवाब अपने कर्मों से दे दिया- नहीं करेंगे!

पूरे प्रकरण को समझने के लिए शुरुआती खबर भी पढ़ें-

मोबाइल कंपनी लावा ने सीएम योगी की नाक के नीचे करोड़ों रुपये के स्मार्टफोन घोटाले का आरोप लगाया!

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